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  • 65 Died In Somalpur Village, Yet 65% People Did Not Get Vaccinated; It Is Said That If You Vaccinate, You Will Die, Despite The Persuasion, The Villagers Are Not Agreeing

वैक्सीनेशन की अफवाह ले रही लोगों की जान:अजमेर के सोमलपुर गांव में अब तक 65 की मौत, 14 कैंप लगे फिर भी 65% ने नहीं लगवाया टीका​​​​​​​; कहते हैं इससे बच्चे नहीं होंगे, दो साल में मौत हो जाएगी

अजमेर4 महीने पहलेलेखक: सुनिल कुमार जैन

अजमेर के निकटवर्ती एक गांव सोमलपुर है। यहां कोरोना की दूसरी लहर के बाद 65 लोगों की मौत हुई, हालांकि सरकारी रिकॉर्ड की मानें तो कोरोना के कारण सिर्फ 5 मौत बताई है और अन्य मौतों का कारण अन्य बीमारियां रहीं। इसके बावजूद यहां 65 फीसदी से ज्यादा लोगों ने कोरोना वैक्सीन नहीं लगवाई। इसका कारण गांव में फैली भ्रान्तियां हैं की टीका लगाने से प्रजनन क्षमता खत्म हो जाएगी और दो साल बाद मर जाएंगे।

ऐसा भी नहीं है कि चिकित्सा विभाग व प्रशासन ने इनको समझाने के प्रयास नहीं किए, लेकिन हालात ज्यों के त्यों है। इनके तमाम प्रयासों के बावजूद वैक्सीनेशन में ग्रामीण रुचि नहीं दिखा रहे। जब सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र सराधना में जाकर पड़ताल की तो पता चला कि गांव में 2029 लोग ऐसे हैं, जिनकी उम्र 45 साल से ज्यादा है। इनमें से करीब 725 ने ही पहली डोज लगाई है। वहीं दूसरी डोज लगाने वालों की संख्या केवल 85 के करीब है। गांव में टीकाकरण के लिए 14 बार कैम्प लगाए गए, लेकिन इन कैम्पों में कभी 10 से 15 लोग ही आए तो कभी 20 से 30, एक बार 52 और एक बार 65 लाेगों ने वैक्सीनेशन कराया।

भ्रांति के कारण कम हुआ वैक्सीनेशन

सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र के प्रभारी चिकित्सक डॉ. मोहम्मद अकरम कुरैशी ने बताया कि उनके कार्य क्षेत्र में सराधना, केसरपुरा, राजगढ़, तबीजी, दौराई व सोमलपुर ग्राम पंचायत आती है, लेकिन सबसे कम टीकाकरण सोमलपुर का है,यहां 45 वर्ष से ऊपर के 2029 लोग है लेकिन वैक्सीनेशन केवल 725 ने ही कराया है। लोगों को समझा रहे है लेकिन उनके मन में भ्रांति बैठ गई है कि टीका लगाने से प्रजनन क्षमता कम हो जाएगी, मिर्गी के दौरे पडे़ंगे, बीमार हो जाएंगे, दाे साल बाद मर जाएंगे। ऐसे में लोगों को घर घर जाकर समझाया भी गया और अभी भी समझा रहे है, लेकिन लोगों में शिक्षा की कमी है और समझ नहीं रहे। यहां दूसरी लहर के दौरान 65 लोगों की मौत हुई लेकिन कोरोना से सिर्फ 5 लोग मरे है।

सराधना के सीएचसी प्रभारी डॉ. मोहम्मद अकरम कुरैशी ने बताया कि दूसरी लहर में मरने वालों की संख्या का आंकड़ा 65 है। हालांकि कोरोना की जांच पांच ही लोगों की हुई थी। बाकी ज्यादातर लोग बुखार और अन्य बीमारियों से ग्रसित थे। गांव के उप सरपंच इमरान खान कहते हैं, अब लोगों में जागरूकता आ रही है। जो मौतें हुई, वे कोरोना से मिलते-जुलते लक्षणों से हुई थी, लेकिन जांच ही नहीं हुई थी। लेकिन गांव में एक साथ 65 मौतें कभी नहीं हुई। यह सामान्य नहीं है।

माईक्रो प्लान भी नहीं हुआ सफल

डॉ. मोहम्मद अकरम कुरैशी ने बताया कि हमने माइक्रो प्लान बनाया और गांव का सर्वे कराया। इसमें ऐसे लोगों को सूचिबद्ध किया जो वैक्सीन लगाना चाहते है। इसके लिए 462 लोगों की सूची बनी और इनके लिए दो जगह कैम्प लगाया लेकिन इसके बावजूद भी पचास के करीब लोगों ने ही टीके लगवाए। लोग अपने मन में सोच कर बैठे भ्रांति को निकालना ही नहीं चाह रहे।

ग्राम पंचायत के बाहर खडे़ ग्रामवासी व उपसरपंच
ग्राम पंचायत के बाहर खडे़ ग्रामवासी व उपसरपंच

गांव में जाकर लोगों से बात की तो यह बताया

  • गांव के ही ई-मित्र संचालक सलीमुद्दीन चीता ने बताया कि छोटू व मंगला ने पहला टीका लगाया, उसके बाद कुछ दिन बाद ही उनकी मौत हो गई तो लोगों में डर बैठ गया और ऐसे में लोग टीका लगाने से कतराने लगे। हालांकि, दोनों ही पहले से गम्भीर बीमारी से ग्रसित थे और उन दोनों की मौत का कारण टीका नहीं था, लेकिन लोगों में भ्रांति फैल गई।
  • सद्दाम ने बताया कि उसकी मां शान्ति को करीब दो माह पहले पहला डोज लगाया गया। उसके बाद से ही उसके हाथों, पैंरों व सिर में दर्द है और बुखार रहता है। ऐसे में उसके मन में डर बैठ गया और वह दूसरा डोज नहीं लगा रही थी। खूब समझाया लेकिन वह नहीं मानी। अब वह मान गई है और जब भी डोज लगेगा तो लगवा लेंगी।
  • नसरुद्दीन ने बताया कि उनकी 55 साल की मां पतासी ने पन्द्रह दिन पहले टीका लगाया और उसके हाथ पैरों में दर्द है, बुखार भी आ रहा है, हालांकि, इसका कारण टीका नहीं होगा, लेकिन जो लोग देखते है और पता चलता है तो भ्रांति फैल ही जाती है। वैसे हम तो दूसरा टीका भी समय आने पर लगा लेंगे।
  • उपसरपंच इमरान खान ने बताया कि पहले यहां भ्रांतियां फैल गई कि टीका लगाया तो बीमार हो जांएगे, मर जाएंगे,यह टीका सही नहीं, इस कारण लोगों ने टीका नहीं लगवाया। अब चिकित्सा विभाग के साथ ग्रामीण जनप्रतिनिधि भी समझाइश कर रहे है और लोगों में जागरूकता आई है। प्रयास कर रहे है कि गांव में ज्यादा से ज्यादा टीकाकरण हो जाए।
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