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  • A Year And A Half Ago, The Current Struck; Right Leg Does Not Work And Right Arm Had To Be Amputated, Learned Writing With Left Hand, Divyang Manisha Wants To Become IAS

हादसे के बावजूद हारी नहीं हिम्मत:डेढ़ साल पहले करंट की चपेट में आई; बायां पैर काम नहीं करता और दायां हाथ काटना पड़ा,  IAS बनना चाहती है दिव्यांग मनीषा

अजमेर.सुनिल कुमार जैन6 महीने पहले

हादसा, जीवन की दशा और दिशा बदल देता है, लेकिन कुछ लोग हादसे के बावजूद अपनी हिम्मत नहीं हारते और अपने सपने को पूरा करने में लग जाते है। ऐसा ही कुछ हुआ है ब्यावर की मनीषा साहू के साथ, जो डेढ़ साल पहले करंट की चपेट में आई और उस समय उसकी जान बचाने के लिए दायां हाथ काटना पड़ा और अभी भी बायां पैर काम नहीं करता। लेकिन कुछ कर गुजरने के जज्बे के चलते मनीषा ने हार नहीं मानी और अपनी इस कमजोरी को अपने ऊपर हावी भी नहीं होने दिया।

14 साल की मनीषा ने दिव्यांग होने के बावजूद दिन रात मेहनत कर बाएं हाथ से लिखना सीख लिया और वर्तमान में वह 10 वीं कक्षा में पढ़ती है। मनीषा ने बताया कि जनवरी 2020 में यह कपडे़ सुखाने के लिए छत पर गई और करंट की चपेट में आने से हादसा हुआ। लेकिन उसने इस हादसे के बावजूद हार नहीं मानी और अपनी पढ़ाई जारी रखी। मनीषा ने बताया कि वह भारतीय प्रशासनिक सेवा में जाकर समाज सेवा करना चाहती है और दायां हाथ गंवाने के बावजूद उसने अथक मेहनत कर बाएं हाथ से लिखना सीखा और आज वह बेहतर लिख पा रही है।

परिवार व स्कूल से मिला संबल, दोस्तों ने बढ़ाया मनोबल
मनीषा साहू ने बताया कि घर आने के बाद एक बार तो वह तनाव में आ गई। लेकिन खुद काे सम्भाला। परिवार व स्कूल प्रबन्धन ने संबल दिया और दोस्तों ने मनोबल बढ़ाया। सहपाठी छात्रा खुशी करीब दो माह तक रोज उसके घर जाती और उसके साथ हंसी मजाक करती, उसे पढ़ाती व समझाती थी। गोदावरी स्कूल प्रबन्धन ने भी संबल बंधाया और हर सम्भव सहयोग का भरोसा दिलाया।

हर समय स्कूल प्रबंधन मनीषा के साथ
गोदावरी बालिका स्कूल प्राचार्य अंजली शर्मा ने बताया कि मनीषा साहू में पढ़कर कुछ करने की ललक है, यही कारण है कि हाथ-पैर खोने के बावजूद हार नहीं मानी। हमे लगता है कि मनीषा को देखकर दूसरी बालिकाओं में पढ़ने की ललक ओर बढ़ेगी। स्कूल प्रबंधन हर सहयोग के लिए मनीषा के साथ है।

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