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ढाई सौ करोड़ रुपए की रोड में फुटपाथ नही:एलिवेटेड रोड बनने के बाद पैदल निकलना होगा मुश्किल

अजमेर8 दिन पहलेलेखक: पंकज यादव
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  • सड़क पर जितना अधिकार वाहन चालक का, उतना ही पैदल यात्री का भी, पर फुटपाथ है कहां

जल्द ही हमारे पास एलिवेटेड रोड होगा, गाड़ियों से शहर के एक छोर से दूसरे पर पहुंचने में समय की बचत होगी, लेकिन विकास की इस दौड़ में पैदल चलने की जगह नहीं है। फुटपाथ घटते-घटते अब खो गए हैं। करीब ढाई सौ करोड़ रुपए की लागत से शहर के तीन प्रमुख सड़कों पर बन रहे एलिवेटेड रोड के ऊपर तो पैदल चलना संभव नहीं होगा, लेकिन सड़क पर नीचे तो कम से कम पैदल चलने वालों के लिए जगह रहनी चाहिए, लेकिन इस ओर न तो एलिवेटेड रोड की डिजाइन व ड्राइंग बनाने वालों ने ध्यान दिया, न ही अफसर और जनप्रतिनिधियाें की इस दिशा में कोई सोच रही है। दुकानदार जहां दुकान के बाहर अतिक्रमण कर जगह कब्जाने की जुगत में हैं, वहीं गाड़ी रखने वालों की चिंता है कि संकरे हो चुके रास्ते पर गाड़ी चलाना मुश्किल होगा, लेकिन पैदल चलना तो अब यहां नामुमकिन हो जाएगा।

जरा संभल कर चलना...
अगर आप सड़क पर चल रहे हैं तो आपको गाड़ियों से बचते बचाते हुए चलना होगा। यही वजह है कि पैदल चलने वालों को अक्सर यह कहा जाता है कि जरा संभल कर चलना। जिला व पुलिस प्रशासन दुपहिया वाहन चालकों को हेलमेट पहनने की नसीहत जरूर देती है लेकिन पैदल वाले की सुरक्षा को लेकर अब तक ना तो प्रशासन ना ही एजेंसियों ने कोई कदम उठाया है।

जहां फुटपाथ वहां अतिक्रमियों का कब्जा
कुछ पुरानी सड़कों पर जो फुटपाथ हैं, उन पर अतिक्रमियों का कब्जा है। कहीं ठेले वालों ने कब्जा किया हुआ है तो कहीं सरकार ने ही गुमटियां बना दी है। हाईकोर्ट ने कुछ साल पहले सरकार को आदेश दिया था कि फुटपाथ खाली कराए जाएं और अवैध रूप से कॉलोनियों में बनाए गए रैंप हटाए जाएं, लेकिन आदेश फाइलों में दब गया।

रोजाना 20 पैदल चलने वालों की मौत
सड़क हादसों में यूं तो बड़ी संख्या में मौत वाहनों के टकराने व अन्य वजह से होती है। भारत में यह आंकड़ा करीब 400 का है, लेकिन इनमें से 20 लोग वे होते हैं जो सड़क पर पैदल चल रहे होते हैं। यह सरकारी आंकड़ा है लेकिन अगर धरातल पर देखा जाए तो यह संख्या दुगुनी हो जाती है।

ये जरूरी है : सड़कों को मुख्यत: पांच भागों में बांटा जाता है। गलियां, संपर्क सड़कें और सिटी रोड पैदल चलने के लिए हैं। सड़क के दोनों ओर तीन-तीन मीटर जगह पैदल चलने के लिए होनी चाहिए। जो पुरानी सड़कें हैं, उनके दोनों ओर दो-दो मीटर फुटपाथ के लिए जरूरी है।

ये हैं मुख्य सड़कें जहां फुटपाथ नहीं

  • पुराने आरपीएससी भवन के कुछ आगे से कचहरी रोड से बाटा तिराहे तक एलिवेटेड रोड का निर्माण चल रहा है। इसके नीचे पूरे सड़क मार्ग पर कहीं फुटपाथ की व्यवस्था नहीं है।
  • आगरा गेट से लेकर मदार गेट चौराहे तक कहीं भी फुटपाथ नहीं है।
  • माकड़वाली मुख्य सड़क सड़क का दो साल पहले ही पुनर्निर्माण किया गया लेकिन फुटपाथ नहीं बनाया गया।
  • नया बाजार, मदार गेट, पुरानी मंडी, दरगाह बाजार से लेकर तमाम मुख्य बाजार में कहीं फुटपाथ नहीं है।
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