क्षमता / मशीनरी निर्माण का बड़ा केंद्र बन सकता है अजमेर, यहां बनी मशीनों की पूरे देश में मांग

Ajmer can become a major center for machinery manufacturing, demand of machines made here across the country
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Ajmer can become a major center for machinery manufacturing, demand of machines made here across the country

  • अजमेर की 90 से अधिक फैक्ट्रियों में करीब दस हजार श्रमिक काम करते हैं

दैनिक भास्कर

May 24, 2020, 05:59 AM IST

अजमेर. अजमेर का रीकाे क्षेत्र मार्बल, ग्रेनाइट व कटिंग सहित क्रेन मशीनें बनाने का हब बन सकता है। यहां पिछले एक दशक में मशीन बनाने की फैक्ट्रियों ने काफी रफ्तार पकड़ी है। अजमेर में बड़ी कंपनियों काे लाने का प्रयास किया जाए ताे यहां की मशीनें विदेशों में पहचान बना सकती हैं। 50 साल पहले एचएमटी ने अजमेर की पहचान जाे देश-विदेश में बनाई, वह फिर से कायम हाे सकती है। 
अजमेर में मशीनरी उद्योग में काफी स्काेप है, यहां बनी मशीनों की पूरे देश में सबसे अधिक डिमांड है। वहीं, रेलवे के स्क्रेप से निकला लोहा सस्ती दर पर कंपनियों को मिल जाता है और लोहे की क्वालिटी भी काफी बेहतर होती है। मशीनों को जिस सांचे में ढाला जाता है, उसमें पुष्कर की मिट्‌टी का इस्तेमाल होता है, जिससे मशीन को फिनिशिंग अच्छी मिलती है। यहां बनने वाली मशीनों की डिमांड को देखते हुए अब रेवाड़ी, जयपुर व मुंबई में कई फैक्ट्रियां खोली गई हैं।
यहां बनने वाली मशीनों की मांग को देखते हुए अब रेवाड़ी, जयपुर व मुंबई में भी कई फैक्ट्रियां खुलीं
यह है हमारी ताकत 
    अजमेर में छाेटी बड़ी करीब 90 फैक्ट्रियां संचालित होती हैं।
    ग्रेनाइट मार्बल कटिंग की मशीनें बनाने की 50 फैक्ट्रियां है।
    छाेटे स्लैब टाइल्स कटिंग की 20 फैक्ट्रियां संचालित हैं।
    बाड़मेर सैंड स्टाेन कटिंग व क्रेन बनाने के काम में 20 फैक्ट्रियां काम कर रही हैं।
    इन फैक्ट्रियां का सालाना टर्न ओवर 650 से 700 कराेड़ रुपए है। 
    हर माह अजमेर में 8 क्रेन तैयार करके दूसरे राज्यों में भेजी जाती है।
    शॉपर प्लेट, बड़ी प्लेट हर माह करीब तीन हजार टन तैयार हाेती है।
    कच्चा माल हर माह आता है। कुछ माल जयपुर से भी मंगवाया जाता है।
यहां हाेती है सप्लाई
अजमेर में बनी मशीनों का सबसे बड़ा बाजार आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, केरल, तेलंगाना, कर्नाटक, उड़ीसा और बेंगलुरू है। बड़ी मशीनों काे तीन से चार पार्ट्स में भेजा जाता है। मैकेनिक वहां जाकर पार्ट्स काे एसेम्बल करते हैं। वहां ग्रेनाइट के ब्लाॅक छाेटे निकलते हैं। इस कारण मशीनों की वहां डिमांड काफी ज्यादा है।
10 से 12 साल में अजमेर की बनी अलग पहचान
    पूरे देश में केवल अजमेर में ही स्टाेन, ग्रेनाइट कटिंग व ब्लाॅक निकालने की मशीनें तैयार हाेती हैं। 
    अजमेर में शॉपर प्लेट, कटर मशीन, राउंड प्लेट, ग्रेनट्री क्रेन 50 से 70 टन वजनी, मल्टी कलर लाइनर, लाइनर पाॅलिश, ग्रेनाइट कटर, सिंगल कटर, एमरी स्टाेन, स्टील प्लेट, राउंड बाट विशेष मशीनें बनती हैं, जिनकी देश में डिमांड सबसे अधिक है। 
    बीते 10 से 12 सालाें में यहां स्टाेन क्रेशर, मार्बल कटिंग, ग्रेनाइट के स्लैब निकालने की मशीन, बाड़मेर सैंड स्टाेन कटिंग मशीन, मिनी टाइल्स कटिंग मशीन और रेजिंग प्लांट कटर बनाने की मशीनें काफी बन रही हैं।
पर्वतपुरा से पालरा रीकाे तक इन फैक्ट्रियां का जाल बिछा हुआ है। 
    मशीनें बनाने में दस हजार से अधिक श्रमिक लगे हुए हैं। 
    बड़ी मशीनों की स्थिति देखें ताे 30 से 40 बड़ी मशीनें हर माह अजमेर से दूसरे राज्यों काे भेजी जा रही हैं। 
बड़ी कंपनियां आतीं तो स्थिति कुछ और होती
स्वास्तिक इंडस्ट्रीज के एमडी रमेश शर्मा ने बताया कि यहां मशीनरी में काफी स्काेप है, यदि यहां पर टाटा, एसआर स्टील, लीलैंड जैसी कंपनियों काे निवेश करने का मौका मिलता तो यहां की स्थिति कुछ और ही होती।
रीको में खाली पड़ी है जमीनें  
रीकाे में काफी जमीनें खाली पड़ी हैं। इसका उपयोग नई फैक्ट्रियां लगाने के लिए किया जाना चाहिए। सरकार पानी की कमी की बात कहती थी, लेकिन बीसलपुर का पानी जयपुर जा सकता है ताे उसका उपयोग यहां की फैक्ट्रियों के लिए क्यों नहीं हाे सकता।
उद्याेग संघ आगे आए | जिले की फैक्ट्री संचालकों का कहना है कि जयपुर इंडस्ट्रीयल एरिया नई फैक्ट्रियों काे लाने के लिए प्रयास कर रहा है, जबकि अजमेर में अब तक ऐसे प्रयास नहीं किए गए हैं।

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