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एक विवाह ऐसा भी...:बैंडबाजा न बारात, न मचा धमाल; केवल माता-पिता की एंट्री, 10 जोडे़ विवाह के परिणय सूत्र में बंधे, मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग का रखा गया ख्याल

अजमेर2 महीने पहले
शादी की रस्म अदायगी के दौरान बैठे दूल्हा-दुल्हन।

कोरोना महामारी के बीच पुष्कर में अखिल भारतीय खटीक महासभा के तत्वावधान में आयोजित सामूहिक विवाह सम्मेलन मिसाल बन गया है। इसमें 10 जोडे़ विवाह के परिणय सूत्र में बंधे। कोरोना गाइडलाइन की पालना के साथ सादगी से हुए समारोह में न बैंड-बाजे के साथ बारात निकाली और न ही कोई भीड़ दिखी। केवल माता-पिता को ही एंट्री दी गई।

नवदंपतियोंं को स्मृति चिन्ह देते एसडीओ।
नवदंपतियोंं को स्मृति चिन्ह देते एसडीओ।

समाज के दस जोड़ों का कोरोना गाइड लाइन की पालना के साथ सादगी से सामूहिक विवाह सम्मेलन आयोजित किया। सम्मेलन में न लोगों की भीड़ थी और गई। यही नहीं सम्मेलन में वर-वधु के भाई-भतीजें को भी एंट्री नहीं दी गई। केवल कन्या दान के लिए दुल्हन के माता-पिता को मंडप में प्रवेश की अनुमति दी गई।

महासभा अध्यक्ष छीतरमल टेपण ने बताया कि गनाहेड़ा रोड स्थित खटीक समाज के छात्रावास भवन में समाज के दस जोड़ों का सामूहिक विवाह सम्मेलन का आयोजन किया गया। तोरण व वरमाला की रस्म के बाद वैदिक मंत्रोचारण के बीच पाणिग्रहण संस्कार किया गया, जिसमें नव दंपतियों को मुख्य अतिथि एसडीओ दिलीप सिंह राठौड़ व नायब तहसीलदार संदीप चौधरी ने स्मृति चिन्ह व प्रमाण-पत्र देकर आशीर्वाद दिया।

अध्यक्ष टेपण ने बताया कि सम्मेलन में कोरोना गाइड लाइन की पालना की गई। केवल वर-वधु के अलावा उनके माता-पिता को ही कार्यक्रम में शिरकत करने की अनुमति दी गई, बाकी अन्य किसी भी समाज बंधु व दूल्हा-दूल्हन के परिवार के सदस्यों को भी आमंत्रित नहीं किया गया। सम्मेलन में उपस्थित वर-वधु समेत सभी लोग मास्क पहन रखे थे तथा सेनेटाइजर की व्यवस्था की गई। डिस्टेंसिंग की भी पालना की गई।

केवल पाणिग्रहण संस्कार के दौरान कन्या दान के लिए वर-वधु के साथ दुल्हन के माता-पिता मौजूद रहे। इसके अलावा कार्यक्रम में समाज के कुछ प्रबुद्ध नागरिक व महासभा के पदाधिकारी उपस्थित थे। उधर, एसडीओ दिलीप सिंह राठौड़ ने राजस्व टीम के साथ सामूहिक विवाह सम्मेलन स्थल का निरीक्षण किया।

(फोटो-भीकम शर्मा)

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