कोरोना से जीती जंग:बेटी की श्रवण कुमार जैसी सेवा और विल पावर से 84 वर्षीय भारद्वाज ने जीती जंग

अजमेर6 महीने पहलेलेखक: अतुल सिंह
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  • घर के बाहर से एंबुलेंस ले जाने लगी ताे आंखों में आंसू लिए बाेली पत्नी - तेरे पिता वापस ताे आएंगे ना....बेटी बाेली यमराज से भी छीन लाऊंगी
  • 84 साल के रिटायर्ड रेलवेकर्मी विनय कुमार भारद्वाज बाेले - डरें नहीं मुकाबला करें, विश्वास रखें कि आप स्वस्थ्य जरूर हाेंगे औैर फिर ऐसा ही हाेगा
  • एचआरटीसी 17 था औैर ऑक्सीजन लेवल 85, रिपाेर्ट काेराेना पाॅजिटिव आने के बाद 9 दिनाें तक अस्पताल में रहे भर्ती, फिर घर पर बेटी ने की दिनरात सेवा

रेलवे से रिटायर्ड 84 साल के बुजुर्ग धाैलाभाटा निवासी विनय कुमार भारद्वाज उन सभी लाेगाें के लिए प्रेरणा के स्त्राेत हैं, जाे इन दिनाें काेराेना महामारी से जूझ रहे हैं। भारद्वाज का एचआरटीसी 17 और ऑक्सीजन लेवल 85 था।

तबीयत बिगड़ने पर घर से अस्पताल ले जाने के लिए जब एंबुलेंस घर के बाहर पहुंची ताे उनकी पत्नी की आंखाें से आंसू बहने लगे और ये शब्द निकले कि बेटी - तेरे पिता घर वापस ताे आएंगे ना? बेटी का जवाब सुनकर आप स्तब्ध रह जाएंगे - बेटी ने कहा मां तू चिंता मत कर मैं यमराज से पिता काे छीन कर ले आउंगी।

हुआ भी यही 25 दिनाें के जीवन-मरण के संघर्ष के बाद भारद्वाज काेराेना से जंग ही नहीं जीते बल्कि उन सभी लाेगाें के लिए मिसाल बन गए हैं जाे इन दिनाें डर-सहमे अपने घर के लाेगाें काे बचाने के लिए अस्पतालों के चक्कर काट रहे हैं।

यह बेटी श्रवण कुमार से कम नहीं
9 दिन अस्पताल में, 16 दिन घर में दिन-रात सेवा : विनय कुमार भारद्वाज यहां अपनी बेटी-दामाद के साथ रहते हैं। भारद्वाज की बेटी 47 वर्षीय गुंजन जाैली द्वारा की गई सेवा के बारे में जब जानेंगे ताे यही कहेंगे कि - यह बेटी श्रवण कुमार से कम नहीं। गुंजन के पति विनोद जाैली बताते हैं - करीब 25 दिनाें पहले ससुरजी की तबीयत अचानक बिगड़ी ताे उन्हें रेलवे अस्पताल भर्ती कराया। वहां एचआरटीसी स्काेर 17 आया औैर ऑक्सीजन लेवल 85 था। आरटीपीसीआर में पाॅजिटिव आने के बाद घरवाले चिंतित थे। यहां से तुरंत जयपुर रैफर कर दिया गया।

माॅर्निंग-ईवनिंग वाॅक आदि पर रखा पूरा ध्यान
जाैली ने बताया कि जयपुर के एक निजी अस्पताल में करीब 9 दिनाें तक ट्रीटमेंट चला, फिर जांच की गई ताे रिपाेर्ट पाॅजिटिव आई। लेकिन ऑक्सीजन लेवल बढ़ने लगा। इस पर गुंजन वहां के चिकित्सकाें से सलाह लेकर पिता काे घर ले आई और साेलह दिनाें तक दिनरात एक कर सेवा की।

दवा लेने से लेकर, भाेजन, एक्सरसाइज, मॉर्निंग व ईवनिंग वाॅक आदि पर पूरा ध्यान दिया। घर पर ही ऑक्सीजन सिलेंडर की व्यवस्था कर ली। गुंजन की यह मेहनत रंग लाई औैर सकारात्मक परिणाम सामने आने लगे।

बेटी हमेशा यही बाेलती आप ठीक हाे पिताजी : गुंजन ने कहा कि उन्होंने अपनी मां से वादा किया था कि पिता बिलकुल स्वस्थ्य हाेकर लाैटेंगे। अस्पताल में हमेशा पिता काे यही कहा कि आप बिलकुल ठीक हैं, घर पर लाने के बाद राेजाेना इसी बात काे कई बार दाेहराया। पिता का पूरा ध्यान बीमारी से हटा दिया। गुंजन ने कहा कि पिता पिछले 30-35 सालाें से सुबह-शाम वाॅक पर जाते हैं, और याेगासन भी करते हैं। उनकी विल पावर अच्छी है, इसी का फायदा काेराेना से जंग जीतने में मिला।

यह संदेश हर किसी के लिए है कारगर: काेराेना पाॅजिटिव हाेने पर डरें नहीं, घरवाले भी घबराएं नहीं। हमेशा यही बाेलें कि आप स्वस्थ्य हैं, कुछ नहीं हाेगा, किसी भी तरह का पैनिक क्रिएट नहीं करें। अस्पताल में यदि बैड फुल हैं, ताे चिकित्सक की सलाह पर घर पर ट्रीटमेंट करके भी काेराेना से जंग जीती जा सकती है। बस जरूरत है विल पावर और सेवाभाव की। अमूमन अस्पतालों में भर्ती लाेगाें की उनके घरवाले ही सेवा नहीं कर पा रहे हैं।

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