एंटी बाडी पर शोध:अजमेर के 1500 फ्रंटलाइन वॉरियर्स और जयपुर के 300 हेल्थ वर्कर्स का ब्लड सैम्पल 11 माह तक जांचेंगे

अजमेरएक महीने पहलेलेखक: मनीष सिंह चौहान
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पंचशील क्षेत्र में कोविड संदिग्धों की घर-घर जांच करती टीम। - Dainik Bhaskar
पंचशील क्षेत्र में कोविड संदिग्धों की घर-घर जांच करती टीम।

हेल्थ वर्कर्स व फ्रंटलाइन वाॅरियर्स को कोरेाना टीका लगे करीब एक साल पूरे होने जा रहे हैं। एक साल के अंदर इनके शरीर में कितनी एंटी बाडी बनी और कितने दिन तक आगे कारगर रहेगी यह जानने के लिए चिकित्सा विभाग एक जांच अभियान शुरू करने जा रहा है। विभाग अजमेर के 1500 फ्रंटलाइन वॉरियर्स और जयपुर के एसएमएस मेडिकल कॉलेज के 300 हेल्थ वर्कर्स का ब्लड सैम्पल 11 माह तक हर माह जांचेंगे। इसके लिए जांच अभियान के लिए अजमेर से 1500 फ्रंटलाइन वॉरियर्स और जयपुर से 300 हेल्थ वर्कर्स का चयन किया गया है। इन सभी के ब्लड सैम्पल जयपुर भेजे जाएंगे, जहां विशेषज्ञ एंटीबाॅडी सहित वैक्सीन के शरीर में वायरस से लड़ने के प्रभावाें की जांच करेंगे।

अभी तक दाेनाें डाेज लगने के बाद बूस्टर डाेज काे लेकर काेई आदेश नहीं अाए हैं। तीसरी लहर से पहले कई काेविड पाॅजिटिव सामने आ रहे हैं। जांच में सामने आया कि ये वे लाेग हैं जिनके दाेनाें डाेज लग चुकी हैं। कई नर्सिंग, फ्रंटलाइन वाॅरियर्स व चिकित्सक भी पाॅजिटिव हुए हैं। इसी कारण अब यह शाेध किया जा रहा है कि इनके शरीर में वैक्सीनेशन के बाद क्या स्थिति है। एंटीबाॅडी का शरीर में क्या प्रभाव है।

हर महीने पांच-पांच एमएल रक्त लिए जाएंगे

अजमेर जिले में 1500 फ्रंटलाइन वाॅरियर्स का चयन किया गया है। तकरीबन 11 माह तक हर माह इनके शरीर से 5-5 एमएल रक्त के सैंपल लेकर जयपुर जांच के लिए भेजे जाएंगे।

इनकाे किया है शामिल
चिकित्सा विभाग की टीम ने फ्रंटलाइन वाॅरियर्स की सूची में सफाई कर्मचारियाें, पुलिसकर्मियाें, राेडवेज कर्मचारियाें व पेट्राेल पंप पर काम करने वाले सेल्समैन काे चिह्नित किया है। यह वे लाेग हैं जाे काेविड की पहली व दूसरी लहर में

आमजन के संपर्क में सबसे अधिक आए।
ब्लड सैम्पल देने के लिए एक माह में दाे दिन किए चिह्रित
एक माह में दाे दिन ही ब्लड सैम्पल लिए जाएंगे। यह दो दिन शनिवार व रविवार होंगे। यह दाे दिन इसीलिए भी रखे गए हैं कि इन दिनाें फाइव डे वीक के चलते अवकाश रहता है। अाम दिनाें की अपेक्षा थानाें, निकायाें व पेट्राेल पंपाें पर भी कम भीड़ रहती है। इसी कारण किसी काे परेशानी भी नहीं हाेगी।

‘भास्कर’ एक्सपर्ट व्यू...

जेएलएन मेडिकल काॅलेज के मेडिसिन यूनिट के वरिष्ठ आचार्य, काेविड-19 के नाेडल ऑफिसर डाॅ. अनिल सामरिया ने बताया कि यह जांच का विषय है कि किस व्यक्ति मेंे कितनी एंटीबाॅडी बनी है। चिकित्सकाें व नर्सिंगकर्मियाें का काेविड की पहली लहर के बाद जनवरी के दूसरे सप्ताह में वैक्सीनेशन हुआ। फरवरी में दूसरी डाेज लगी। इसे एक साल हाेने काे है। यही वाे टीम थी जाे काेविड में संक्रमिताें के बीच वार्ड में अरांउड द क्लाॅक रही। यदि एंटीबाॅडी नहीं बनती ताे अाज कई संक्रमित हाेने के साथ अन्य राेगाें के शिकार हाे जाते।

पहले 28 दिन के अंतराल में दूसरी डाेज लगती थी। आमजन के लिए बाद में यह 85 दिन हाे गए। अभी जाे लाेग वैक्सीनेशन की पहली व दूसरी डाेज लगने के बाद पाॅजिटिव हाे रहे हैं उन्हें भी वैक्सीनेशन करवाए तीन माह हाे चुके हैं। बुखार, हाथ पैराें में दर्द के अलावा काेई विशेष बीमारी नहीं दिख रही है। जाे ज्याद बीमार हाेकर आ रहे हैं उन्हें पहले ही शुगर, बीपी, थायराॅइड सहित दूसरी बीमारियां हैं। वे पाॅजिटिव हाे रहे हैं। ऐसे में यह पता लगाना जरूरी है कि टीका लगने के कितने दिन तक एंटी बाडी शरीर में लड़ने के लिए एक्टिव है।

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