पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

महामारी में लापरवाही:क्वारेंटाइन सेंटर में एक ही नाम के 5 लोगों की काेराेना जांच रिपाेर्ट पाॅजिटिव, पांचों गायब मिले

अजमेरएक महीने पहले
  • कॉपी लिंक
  • पुलिसकर्मियाें द्वारा क्वारेंटाइन सेंटर से मनमर्जी से लाेगाें काे छाेड़ने से फैली अव्यवस्था

बेवजह सड़काें पर घूमते पकड़े गए लाेगाें का जयपुर राेड स्थित क्वारेंटाइन सेंटर में काेविड टेस्ट किया जा रहा है, इसमें गंभीर अनियमितता यह सामने आई है कि दाे दिन पहले जिन लाेगाें का टेस्ट किया गया था, उनमें से एक ही नाम के पांच लाेग पाॅजीटिव पाए गए, जब चिकित्सा दल पाॅजीटिव लाेगाें की तस्दीक के लिए क्वारेंटाइन सेंटर पहुंचा ताे वहां इस नाम के लाेग मिले ही नहीं।

इस गड़बड़ी काे लेकर चिकित्सा कर्मियाें ने उन पुलिस कर्मियाें काे जिम्मेदार ठहराया है, जाे इन्हें सेंटर में भर्ती करवा कर गए थे। चिकित्सा कर्मियाें के अनुसार क्वारेंटाइन सेंटर में प्रवेश देते समय पुलिसकर्मी काे क्वारेंटाइन किए जाने वाले का नाम-पता और माेबाइल नंबर लिखवाना पड़ता है, लेकिन उक्त पांचाें व्यक्तियाें की एंट्री में एक ही नाम पाया गया।

आराेप है कि पुलिस अधिकारियाें और उंचे रसूख वाले लाेगाें की सिफारिश के दबाव में पुलिस कर्मी पकड़े गए लाेगाें काे क्वारेंटाइन सेंटर में जांच कराने के बाद अपनी मर्जी से ही मुक्त कर देते हैं। सवाल यह है कि अगर पाजीटिव पाए गए पांच लाेग अलग-अलग हैं ताे फिर उनका आजाद रहना संक्रमण की चेन काे और ज्यादा मजबूत कर सकता है। चिकित्सा कर्मियाें की शिकायत पर जिला प्रशासन और पुलिस अधिकारियाें ने क्वारेंटाइन सेंटर की व्यवस्थाओं की नए सिरे से समीक्षा की है।

जांच के बाद अपनी मर्जी से रिहा कर रहे हैं पुलिसकर्मी

आराेप है कि जयपुर राेड राजस्व प्रशिक्षण संस्थान में बनाए गए सामुदायिक क्वारेंटाइन सेंटर में पिछले तीन दिन के दाैरान शहर के विभिन्न थाना पुलिस दलाें ने बेवजह सड़क पर निकले करीब साढ़े तीन साै से ज्यादा लाेगाें काे पकड़कर क्वारेंटाइन कराया है। सेंटर में भर्ती कराए गए लाेगाें की काेविड जांच के लिए यहां चिकित्सा विभाग की टीम तैनात है। सेंटर में रखे जाने वाले लाेगाें का रजिस्टर में नाम-पता और माेबाइल नंबर अंकित हाेता है, यह जानकारी सही हाे, इसकी जिम्मेदारी संबंधित पुलिस कर्मी की हाेती है।

दाे दिन पहले मुकेश नामक पांच युवकाें की सेंटर में एंट्री हुई लेकिन इनके माेबाइल नंबर की जगह एक ही नंबर लिखवाए गए। इनकी रिपाेर्ट पाॅजीटिव अाने पर चिकित्सा टीम ने सेंटर में जब इनकी तस्दीक की ताे वे नहीं मिले। माेबाइल नंबर पर संपर्क किया गया ताे वह किसी पुलिस कर्मी का था। पुलिस कर्मी ने भी मामले में अनभिज्ञता जाहिर कर दी। चिकित्सा कर्मियाें का कहना है कि वह संक्रमण का जाेखिम उठा कर जांच कर रहे हैं और पुलिस कर्मी अपनी जिम्मेदारी का निर्वाह नहीं कर रहे।

पुलिस नहीं दिखा रही दिलचस्पी, धरपकड़ की कार्रवाई भी धीमी

क्वारेंटाइन सेंटर में अव्यवस्था के चलते अब पुलिस लाेगाें काे पकड़ कर क्वारेंटाइन कराने में दिलचस्पी नहीं दिखा रही है। कारण यह है कि पकड़े गए लाेगाें काे क्वारेंटाइन सेंटर में भर्ती कराने में पुलिस कर्मियाें काे काफी समय लगता है। क्वारेंटाइन सेंटर में रखे गए लाेगाें काे खाना, नाश्ता, दवा और अन्य सुविधाओं पर भी प्रशासन की ओर से प्रति व्यक्ति 240 रुपए खर्च किए जा रहे हैं। क हालांकि पुलिस दल सेंटर में तैनात है, लेकिन आला अफसर, जन प्रतिनिधि और अन्य रसूखदाराें की सिफारिश पर पुलिस कर्मी अपने स्तर पर ही लाेगाें काे रिहा कर रहे हैं।

खबरें और भी हैं...