एक्टर अजय देवगन को अजमेर कंज्यूमर कोर्ट से मिली राहत:पोस्टर में दिखाया स्टंट सीन नहीं करने पर दर्शक ने किया था केस

अजमेर6 महीने पहले
फिल्म का पोस्टर जिस पर केस हुआ।

अजमेर कंज्यूमर कोर्ट ने फिल्म एक्टर अजय देवगन की 'दे दे प्यार दे' फिल्म के पोस्टर पर दायर केस पर सोमवार को फैसला सुनाया। दरअसल, फिल्म के पोस्टर में दिखाए गए स्टंट सीन को फिल्म में नहीं दिखाया गया। इस पर अजमेर के तरुण अग्रवाल ने 2019 में एक परिवार दायर किया। आखिर कोर्ट ने फिल्म में स्टंट नहीं दिखाने का जिम्मेदार अजय देवगन को नहीं माना। साथ ही परिवाद से नाम हटाने के आदेश दिए हैं।

मामले के अनुसार, अजमेर निवासी परिवादी तरुण अग्रवाल ने वर्ष 2019 में उपभोक्ता आयोग में इस आशय का एक परिवाद प्रस्तुत किया। उसमें कहा गया कि वह लव प्रोडक्शन निर्मित मूवी 'दे दे प्यार दे' के पोस्टर में बताए गए स्टंट सीन को देखकर फिल्म देखने गया, लेकिन फिल्म के पोस्टर में बताया गया सीन नहीं था। परिवादी ने इसके लिए लव फिल्मस प्रोडक्शन, अभिनेता अजय देवगन और माया मंदिर सिनेमा को गलत विज्ञापन दिखाने के लिए जिम्मेदार बताते हुए खंडन जारी करने, भविष्य में ऐसे भ्रामक विज्ञापन जारी नहीं करने और गलत विज्ञापन और अनुचित व्यापार व्यवहार से उसे पहुंची मानसिक एवं आर्थिक क्षति के बतौर 4 लाख 51 हजार रुपए और परिवाद खर्च के 11 हजार दिलाने की मांग की।

अजय देवगन ने कहा- फिल्म के प्रचार प्रसार के लिए वह जिम्मेदार नहीं

परिवादी के नोटिस मिलने के बाद फिल्म अभिनेता अजय देवगन ने वकील अमित गांधी और प्रांजुल चौपड़ा के जरिए उपभोक्ता आयोग में एक प्रार्थना पत्र प्रस्तुत कर उसे परिवाद में से हटाने की प्रार्थना की। अभिनेता अजय देवगन की ओर से तर्क दिया गया कि उसने 'दे दे प्यार दे' फिल्म में केवल मात्र अभिनय किया है। फिल्म के प्रचार प्रसार के लिए वह जिम्मेदार नहीं है। उसे अनुचित रुप से पक्षकार बनाया गया है। अभिनेता की ओर से यह भी तर्क दिया गया कि परिवादी ने प्रतिफल देकर उससे किसी प्रकार की सेवाएं नहीं ली है, इसलिए परिवादी उसका उपभोक्ता नहीं है। अजय देवगन के वकील का तर्क था कि भ्रामक विज्ञापन के लिए परिवादी को केंद्रीय उपभोक्ता प्राधिकरण में शिकायत करनी चाहिए थी।

इसके विपरीत परिवादी का तर्क था कि अभिनेता अजय देवगन ने यह जानते हुए कि यह दृश्य फिल्म में नहीं है, उसके बावजूद उसने पोस्टर को फिल्म के मुख्य विज्ञापन के तौर पर सोशल मीडिया व अन्य प्लेटफार्म पर प्रचारित किया है। इसलिए वह भ्रामक विज्ञापन के लिए जिम्मेदार है। उपभोक्ता आयोग अजमेर के अध्यक्ष रमेश कुमार शर्मा और सदस्य दिनेश चतुर्वेदी ने दोनों पक्षों की बहस सुनकर अपने निर्णय में लिखा कि अजय देवगन केवल अभिनेता मात्र है। संबंधित फिल्म में कौन सा सीन रखना है, कौन सा काटना है, किस प्रकार के होर्डिंग लगाने हैं,किस प्रकार अखबार में उसका विज्ञापन प्रकाशित कराना है, इन सब बातों के लिए फिल्म अभिनेता का कोई लेना देना नहीं होता है। परिवादी ने उसे बिना आधार के पक्षकार बनाया है।

आयोग ने निर्णय में लिखा कि अभिनेता अजय देवगन का प्रार्थना पत्र स्वीकार किया जाकर उसे परिवाद में से पक्षकार के बतौर हटाए जाने के आदेश दिए जाते हैं। आयोग ने 14 दिन के भीतर परिवादी को संशोधित परिवाद शीर्षक प्रस्तुत करने के आदेश भी दिए।