50 से ज्यादा वारदातें करने वाला गिराेह पकड़ा:डीएफसीसीआईएल लाइन से काॅपर वायर चाेरी हुआ था, आरपीएफ दल ने बरामद किया, छह गिरफ्तार

अजमेर4 महीने पहले
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आरपीएफ ने चोर गिरोह पकड़ा - Dainik Bhaskar
आरपीएफ ने चोर गिरोह पकड़ा

रेलवे सुरक्षा बल अजमेर की टीम ने डीएफसीसीआईएल रेलवे लाइन से ओएचई काॅपर वायर चाेरी करने वाले शातिर गिराेह का खुलासा किया है। आरपीएफ दल ने तफ्तीश के बाद गिराेह के छह लाेगाें काे गिरफ्तार कर उनसे चाेरी किया गया काॅपर वायर भी बरामद किया है। आराेपियाें ने अजमेर रेल मंडल में पचास से ज्यादा वारदाताें काे अंजाम देना कबूल किया है। आरपीएफ के अनुसार आराेपी किशाेर चावला, ओमप्रकाश, ललित कुमार, विकास नायक, चैनाराम उर्फ चैन सिंह, माेहम्मद शरीफ काे गिरफ्तार किया गया है।

आराेपियाें ने डीएफसीसीआईएल रेलवे लाइन में विद्युतीकरण के दाैरान पिछले एक साल में काॅपर वायर चाेरी की 50 से ज्यादा वारदातें की है। उल्लेखनीय है कि प्राइवेट ठेकेदार फर्म ने विद्युतीकरण का काम पूरा कर 16 दिसंबर 2021 काे डीएफसीसीआईएल काे साैंपा था। इसके बाद यह संपत्ति रेलवे संपत्ति में शामिल हाे गई थी।

बांस में कटर ग्राइंडर बांध कर काटते थे वायर

आरपीएफ दल ने ब्यावर और मारवाड़ पाेस्ट इलाकाें में काॅपर वायर चाेरी की वारदाताें में जांच के दाैरान माैके से कटर ग्राइंडर, बांस बरामद किए थे। घटनास्थल पर चार पहिया वाहनाें के निशान भी पाए गए थे। इस आधार पर आरपीएफ ने जांच की और घटना के दाैरान इलाके में एक्टिव माेबाइल फाेन के सैंकड़ाें नंबराें में से संदिग्ध नंबराें काे चिन्हित किया था।

इलाके के पेट्राेल पंप और टाेल प्लाजा के सीसीटीवी कैमराें की फुटेज खंगाली गई थी। आसपास के इलाकाें में लंबे बांस बेचने वालाें से संपर्क कर पूछताछ की गई। बांस की दुकान के आसपास के कैमराें की फुटेज में बांस ले जाते आराेपी चिन्हित किए गए थे। इसके आधार पर आरपीएफ दल ने छह आराेपियाें काे पकड़ने में कामयाबी हासिल की।

वारदात का शातिराना तरीका

तफ्तीश में सामने आया कि डीएफसीसीआईएल लाइन में विद्युतीकरण का काम पूरा हाेने के बाद 25 केवी करंट प्रवाहित किया गया था, लेकिन एंटी क्रिप के लिए लगाए गए 160 मीटर ओएचई काॅपर वायर में करंट का प्रवाह कम था। आराेपियाें ने तीन लंबे बांस के ऊपर कटर ग्राइंडर मशीन बांधकर एंटी क्रिप काॅपर वायर काे काट दिया था।

इस शातिराना तरीके से चाेर गिराेह ने पचास से ज्यादा वारदाताें काे अंजाम दिया था। आराेपी इतने शातिर थे कि माेबाइल पर इंटरनेट काॅल का उपयाेग करते थे। ताकि ट्रेस नहीं हाे सकें। आराेपी ललित व ओमप्रकाश पूर्व में डीएफसीसीआईएल में सुरक्षा गार्ड के ताैर पर काम कर चुके थे।

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