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नशीली दवाओं का काला धंधा:डीएसपी, 3 सीआई, 20 पुलिसकर्मियाें की टीम भी मूंदड़ा से नहीं उगलवा पाई दवाओं के काले कारोबार का राज

अजमेरएक महीने पहलेलेखक: धर्मेंद्र प्रजापति
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  • आरोपी श्यामसुंदर मूंदड़ा के कब्जे से किसी तरह का ड्रग बरामद नहीं बताना संदेह पैदा करता है...

नशीली दवा के काले धंधे की परतें उधेड़ने के लिए लगाए गए डीएसपी, तीन सर्किल इंस्पेक्टराें सहित बीस पुलिसकर्मियाें की लंबी चाैड़ी टीम इस धंधे के मुख्य कर्ताधर्ता बीके काैल नगर निवासी श्यामसुंदर मूंदड़ा से कुछ नहीं उगलवा सकी। गुरुवार काे पांच दिन के रिमांड के बाद उसे जेल भेज दिया गया। इससे पुलिस जांच काे लेकर कई गंभीर सवाल खड़े हाे गए हैं। खासकर यह कि मूंदड़ा के कब्जे से किसी तरह का ड्रग बरामद नहीं बताना संदेह पैदा करता है कि क्या उसे कानून की तकनीकियाें बारीकियाें का लाभ दिलाकर बरी कराने के लिए ताे पुलिस की जांच नहीं चल रही।

24 मई काे पुलिस ने ब्यावर राेड न्यू ट्रांसपाेर्ट नगर के एक गाेदाम से साढ़े पांच कराेड़ कीमत की प्रतिबंधित दवाओं का जखीरा पकड़ा था, उस समय ही यह जगजाहिर हाे चुका था कि अजमेर में दवाओं के काले कारोबार का कर्ताधर्ता बीके काैल नगर निवासी श्यामसुंदर मूंदड़ा ही है, इसके बावजूद मूंदड़ा पेशेवर अपराधी के तरीके से 18 दिन तक फरारी काटता रहा। इस बीच मूंदड़ा के काले कारोबार से जुड़े उसके गुर्गे शेख साजिद सहित पांच लाेग गिरफ्तार हाे चुके थे। 18 दिन फरारी के दाैरान मूंदड़ा अपने रसूखदार संपर्क सूत्राें के जरिए अात्मसमर्पण का प्रस्ताव पुलिस अधिकारियाें काे भेजता रहा था, अाखिर 11 जून काे वह पुलिस ने से मेड़ता से हिरासत में ले लिया।

जांच अधिकारी क्याें बदला

यह मामला सबसे पहले रामगंज थाने में दर्ज हुआ था और थाना प्रभारी सत्येंद्र नेगी जांच कर रहे थे। एनडीपीएस एक्ट के मुताबिक ड्रग्स संबंधी मामला जिस थाने में दर्ज हाेता है वह जांच नहीं करता। जांच किसी दूसरे थाना प्रभारी काे साैंपी जाती है। इस मामले की जांच क्लाॅक टावर थाना प्रभारी दिनेश कुमावत काे साैंपी गई। लेकिन एक दिन बाद एसपी जगदीश शर्मा ने जांच दिनेश कुमावत से लेकर डीएसपी मुकेश साेनी काे साैंप दी। क्याें? अलवरगेट थाना पुलिस ने भी नशीली दवाएं बरामद कर मामला दर्ज किया था और सुनीता गुर्जर जांच कर रहीं थीं।

रिमांड क्याें नहीं मांगा

छाेटे से छाेटे मामले में पुलिस आराेपी काे गिरफ्तार कर अदालत से रिमांड मांगती है। इस मामले में पुलिस ने मूंदड़ा काे पांच दिन के रिमांड पर लिया। रिमांड अवधि समाप्त हाेने के बाद पुलिस ने दाेबारा रिमांड पर लेने के लिए अदालत से काेई प्रार्थना नहीं की। पुलिस 14 दिन तक रिमांड लेने की अधिकारी है। जबकि पुलिस ने उससे काेई बड़ा राज उगलवा सकी न ही कुछ बरामदगी दिखा सकी। क्याें? हालांकि अभी अलवरगेट थाने में दर्ज मामले में पुलिस रिमांड लेगी ही, लेकिन वहां भी दवाएं ताे पहले ही बरामद की जा चुकी हैं।

बरी करवाने के लिए जांच

एनडीपीएस एक्ट से जुड़े प्रकरणाें में महत्त्वपूर्ण तथ्य कब्जा यानि पजेशन है। यानी नशीला पदार्थ जिसके कब्जे से बरामद हाेता है उसी काे सजा मिलने की ज्यादा संभावना हाेती है। दवा काराेबारी श्याम सुंदर मूदंडा के खिलाफ पुलिस ने भले ही एनडीपीएस एक्ट के तहत तीन प्रकरण दर्ज कर 11 कराेड़ से ज्यादा की अवैध नशीली दवा की बरामदगी कर ली है। लेकिन तकनीकी रूप से पुलिस काे अदालत में मूंदड़ा के खिलाफ आराेप साबित करने में काफी मशक्कत करनी पड़ेगी। नशीली दवाएं किसके कब्जे से बरामद हुई यह महत्वपूर्ण हैं।

दवाएं यहां कैसे पहुंची

दवाओं की खेप उत्तरांचल से जयपुर, अजमेर, ग्वालियर, इंदाैर और नागालैंड के दीमापुर सहित अन्य शहराें में भेजी गई। जांच इस बिंदू पर हाेनी चाहिए कि दवाओं की सप्लाई उत्तरांचल की हिमालय मेडिटेक कंपनी ने ही की है, नियमानुसार ट्रांसपाेर्ट कंपनी बिल-बिल्टी के आधार पर ही संबंधित जगह पर फर्म काे माल सप्लाई करती है, लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं हुआ। दीमापुर की कंपनी के नाम दवा निर्माता कंपनी ने बिल-बिल्टी जारी की ताे फिर दवा की खेप बीच में ही जयपुर और अजमेर कैसे पहुंच गई?

राहुल चाैहान काे क्याें बख्श दिया

जयपुर के बाद 24 मई काे अजमेर के ट्रांसपाेर्ट नगर के गाेदाम में बरामद हुई नशीली दवाईयाें की खेप के मामले में यह सामने आया था कि गाेदाम में दवाओं के 114 कार्टन पहुंचाने वाला राहुल चाैहान था। राहुल ने ही गाेदाम के केयरटेकर परिवार से तीन हजार रुपए में एक दिन के लिए कार्टन रखने की अनुमति ली थी।

यह बात खुद केयर टेकर माेमिन के परिजनाें ने मीडिया के सामने कबूल की है। भास्कर के पास गाेदाम की रखवाली कर रहे परिवार की महिला की वीडियाे क्लीपिंग भी है, जिसमें वह बार-बार कह रही है कि दवा के कार्टन राहुल ने ही रखवाए थे।

माैर्य के पकड़ में आने पर ही आगे बढ़ेगी तफ्तीश जांच अधिकारी सीओ मुकेश साेनी का कहना है कि जांच की दिशा कमलजीत माैर्य के पकड़ में आने के बाद ही तय हाेगी। फिलहाल पुलिस टीमाें काे माैर्य की धरपकड़ के लिए तैनात किया गया है।

यह है मामला

पुलिस ने तीन अलग अलग मामलों में गत 24 मई को रामगंज थाना क्षेत्र से साढ़े पांच करोड़ रुपए, 1 जून काे रामगंज थाना क्षेत्र से 2.5 करोड़ रुपए तथा इसी दिन अलवर गेट थाना क्षेत्र से तीन करोड़ रुपए सहित कुल 11 करोड़ रुपए की प्रतिबंधित नशीली दवाओं को जब्त कर मामले का खुलासा किया गया था। इस मामले में मुख्य आराेपी श्यामसुंदर मूंदड़ा, मोमिन शाह, कालूराम जाट, शेख साजिद, मुकेश टांक एवं कमल को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है।

काेराेनाकाल में दवाओं के परिवहन काे दी गई छूट का तस्कराें ने उठाया फायदा

अजमेर को प्रतिबंधित नशीली दवाओं की तस्करी का ट्रांजिट पाइंट बनाने वाले काराेबारी श्याम सुंदर मूंदड़ा श्याम मूंदड़ा ने पुलिस रिमांड के दाैरान पुलिस काे बताया है कि इस काले कारोबार का कर्ताधर्ता गाेटन नागाैर निवासी कमलजीत माैर्य है। माैर्य के कहने पर ही वह इस कारोबार में करीब डेढ़ साल से शामिल है।

मूंदड़ा के बयान के अधार पर माना जा रहा है कि दवा तस्करी में लिप्त गिराेह ने काेराेना काल का भरपूर फायदा उठाया है। उल्लेखनीय है कि मार्च 2020 से लेकर अब तक देश भर में दवाओं के परिवहन पर किसी तरह की राेक-टाेक नहीं है। काेराेना के पहले चरण में ताे स्थति यह थी कि दवाओं काे लाने-लेजाने वाले वाहनाें काे बगैर किसी राेकटाेक और जांच के आने-जाने दिया जा रहा था।

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