राहत की खबर / तापमान बढ़ने से सूख गए टिड्डियों के अंडे, लिंफ बाहर नहीं निकल रहे हैं

तबीजी गांव में पेड़ों पर बैठा टिड्डी दल (फाइल फाेटाे) तबीजी गांव में पेड़ों पर बैठा टिड्डी दल (फाइल फाेटाे)
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तबीजी गांव में पेड़ों पर बैठा टिड्डी दल (फाइल फाेटाे)तबीजी गांव में पेड़ों पर बैठा टिड्डी दल (फाइल फाेटाे)

  • राष्ट्रीय बीजीय मसाला अनुसंधान केंद्र के कीट विज्ञान विभाग के प्रधान वैज्ञानिक डाॅ. कृष्ण कांत ने भास्कर से साझा किए टिड्डियों पर हुए तरह-तरह के शाेध के अंश, बताए बचाव के तरीके

दैनिक भास्कर

May 30, 2020, 06:00 AM IST

अजमेर. टिड्डी दलाें के लगातार हमलाें से अजमेर जिले में फसलाें काे भारी नुकसान हुआ है। जिले के पुष्कर, पीसांगन, अराईं, किशनगढ़, ब्यावर सहित आसपास के अन्य क्षेत्राें के गांवाें में फसलाें का भारी खराबा हुआ है। 
इससे सबसे ज्यादा सब्जियाें, फलाें औैर रिजका की फसल खराब हुई है। सब्जियाें में मिर्ची, टमाटर, लाैकी, तुरई, पालक, बैंगन, भिंडी, ग्वार फली, नींबू, केरूंदा ताे फलाें में आम, जामुन, फालसेव, पपीता आदि की फसल काे भारी नुकसान पहुंचा है। वहीं रिजका की फसल ताे तबाह हाे गई है।
हालांकि अब किसानाें की चिंता दूर हाेते नजर आ रही है, यहां से टिड्डियां माइग्रेट कर एमपी औैर महाराष्ट्र की ओर बढ़ गई हैं। कई जगहों पर टिड्डियों ने प्रजनन कर अंडे दिए हैं। यह कराेड़ाें की संख्या में हैं। 
एक टिड्डी 2 ग्राम फसल खा सकती है 
राष्ट्रीय बीजीय मसाला अनुसंधान केंद्र के कीट विज्ञान विभाग के प्रधान वैज्ञानिक डाॅ. कृष्ण कांत ने टिड्डियों पर हुए तरह-तरह के शाेध के अंश औैर बचाव के तरीके भास्कर से साझा किए। उन्हाेंने बताया कि टिड्डियां फल, सब्जी, फूल, पत्ती, अनाज, बीज, पेड़ की छाल और टहनियां तक खा जाती हैं। एक टिड्डी 2 ग्राम फसल खाने की क्षमता रखती है, इस तरह से 1 वर्ग किलाेमीटर में करीब 4 कराेड़ टिड्डियां 10 हाथियाें के बराबर फसल एक दिन में चट कर जाती हैं।
यहां कई जगहाें पर टिड्डियों ने अंडे दिए हैं, वाे तापमान ज्यादा हाेने के कारण सूख गए हैं। उनसे लिंफ बाहर नहीं आ रहे हैं।

जलवायु परिवर्तन के कारण पनप रहे हैं टिड्डी दल

टिड्डियाें के झुंड पैदा हाेने का सीधा संबंध जलवायु परिवर्तन से है। करीब पांच माह पहले जलवायु परिवर्तन के कारण अफ्रीका में अत्याधिक बारिश हुई थी, यहां उपयुक्त माहाैल मिलने से टिड्डियां पनपी। टिड्डियों का झुंड यहां से 150 से 200 राेजाना सफर कर दक्षिण ईरान और फिर पाकिस्तान पहुंचा। यहां भी अनियमित माैसमी परिवर्तन के कारण प्रजनन का माहाैल मिला औैर तादाद कराेड़ाें में हाे गई। पाक से यह भारती की आेर रुख कर गई। जुलाई के अंत तक टिड्डियों का प्रकाेप जारी रहेगा। 
2.5 से 3 इंच के बीच का यह कीट अपने वजन के बराबर फसल खा जाता है। 
एक वर्ग किलाेमीटर में 8 कराेड़ टिड्डियां हाे सकती हैं। टिड्डी दल 15 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से सफर तय करता है।
अजमेर में आया टिड्डी दल 6 किलाेमीटर लंबा औैर 3 किलाेमीटर चाैड़ा था। एक दिन में 150 किलाेमीटर तक उड़ने की क्षमता है।
खाने की क्षमता औैर उड़ने की रफ्तार ज्यादा है, टिड्डियों का एक छाेटा दल भी 35 हजार लाेगाें का खाना खा जाता है।
टिड्डियों का एक छाेटा दल 10 हाथियाें औैर 25 ऊंटाें के खाने के बराबर फसल चट कर जाता है।
3 से 5 माह इनकी उम्र हाेती है। इनके जीवन चक्र की तीन प्रमुख चरण हैं, औसतन दाे सप्ताह में अंडे से बिना पंख वाली लिंफ निकलती है।
30-40 दिनाें में परिपक्व टिड्डी बन जाती है, अगले तीन चार सप्ताह में प्रजनन में सक्षम हाे जाती है।
अफ्रीकी, एशियाई औैर खाड़ी के देशाें में टिड्डियों काे खाने की परंपरा है। यह प्राेटीन के अलावा कई तरह मिनरल, फैटी एसिड का बेहतरीन साेर्स है।

ये हैं बचाव के तरीके 
कीटनाशक रसायनाें का इस्तेमाल करना चाहिए।
टिड्डी प्रकाेप के समय दाे पारियाें में क्लाेरपायरीफाेस, डेल्टामेथरिन, बेंडियाेकार्ब, मेलाथियाॅन आदि काे पानी के साथ मिलाकर छिड़काव करना चाहिए।  
कीटनाशकाें का छिड़काव करते समय किसानाें काे चेहरे पर मास्क और हाथाें में दस्ताने जरूरी ताैर पर पहनने चाहिए।
40 हजार हेक्टेयर फसल कर चुके हैं नष्ट 
टिड्डी दल अब तक राज्य के जाेधपुर, फलाैदी, बाड़मेर, नागाैर, पाली, अजमेर, पुष्कर औैर जयपुर सहित अन्य स्थानाें पर करीब 40 हजार हेक्टेयर से ज्यादा क्षेत्र में फसलाें काे नष्ट कर चुका है। किशनगढ़, अरांई, पुष्कर, ब्यावर, पीसांगन सहित 80 गांवाें में टिड्डियों के हमले से फसल प्रभावित हुई है।

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