ऑक्सीजन प्लांट पर राउंड द क्लाॅक वर्किंग:तपती दोपहरी में भी गर्म मशीनों के पास खड़े रहते हैं कर्मचारी

अजमेर6 महीने पहलेलेखक: मनीष सिंह चाैहान
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पर्वतपुरा बाइपास स्थित अजमेर ऑक्सीजन प्लांट का पूरा स्टाफ राउंड द क्लाक काम कर रहा है। बीते एक सप्ताह से अवकाश तक नहीं ले रहे हैं। मकसद यही है कि इनके कारण किसी मरीज तक ऑक्सीजन के सिलेंडर पहुंचने में देरी नहीं हाे जाए। दैनिक भास्कर की टीम ने दोपहरी में प्लांट की स्थिति देखी ताे यहां अलग अलग प्लांट में सिलेंडर भरने के हिसाब से टीमें लगी हुई है।

इस टीम में ऑपरेटर, फिलर, लाेडर, सेल्समैन व टीम के दूसरे साथी शामिल हैं। प्लांट में जिला औषध नियंत्रण विभाग के अधिकारी ओमप्रकाश बगड़िया भी लगे हुए हैं, जाे अस्पताल जाने वाले सिलेंडरों की मॉनिटरिंग व वहां से आने वाली डिमांड के अनुसार जल्दी सिलेंडर भिजवाने की व्यवस्था कर रहे हैं।
एक ट्रक में 55 से 60 सिलेंडर आ रहे

एक ट्रक में 55 से 60 सिलेंडर आते हैं। ट्रक काे भरने में ही कम से कम एक घंटे का समय लग जाता है। सिलेंडर काे किस अनुपात में किस तरह भरना है, यह लाेडर काे पता है। सभी अस्पतालों काे तय समय पर ऑक्सीजन सिलेंडर पहुंचाने के लिए प्रबंधक सुभाष भटड़ खुद मॉनिटरिंग कर रहे हैं। इन्होंने बताया कि चार मशीनों से हाेते हुए ऑक्सीजन सिलेंडर तक पहुंचती है। सिलेंडर भरने के दौरान सबसे अधिक ट्रिपिंग पर ध्यान रखा जाता है। यदि एक बार भी ट्रिपिंग हाे गई ताे पूरे प्रोसेस काे फिर से चालू करने में 40 मिनट लगते हैं।
यूं चलती है ऑक्सीजन लाइन

प्रबंधक सुभाष बताते हैं कि सबसे पहले बॉयलर में 800 पाैंड तक यानी 40 किलाे तक हवा का दबाव लेकर उसमें पानी जनरेट किया जाता है। पानी गरम हाेने के कारण ठंडा करने के लिए कोल्ड वाटर मशीन में जाता है। वहां से प्रोसेस हाेकर माइंस 183 लिक्विड फाॅर्म में गैस का तापमान सामान्य किया जाता है। यहां से एक अन्य मशीन से जुड़े पाइप के जरिये गैस मुख्य प्लांट में जाती है। 22 पाैंड यानी 140 से 150 किलाे के प्रेशर से सिलेंडर में ऑक्सीजन भरी जाती है। दाे प्लांट पर प्रतिदिन डेढ़ हजार ऑक्सीजन सिलेंडर होते हैं तैयार: पर्वतपुरा बाइपास पर एक प्लांट की 1200 व दूसरे की 400 सिलेंडरों में ऑक्सीजन भरने की क्षमता है यानी डेढ़ हजार सिलेंडर तक प्रतिदिन सप्लाई हाे सकते हैं।

फिर भी नहीं माना फ्रंटलाइन वाॅरियर्स

प्लांट स्टाफ कोरोना काल में लगातार काम कर रहा है फिर भी इन्हें कोरोना वाॅरियर्स नहीं मानते।

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