पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • Local
  • Rajasthan
  • Ajmer
  • For 54 Years, Water Comes Up To 13 Km With The Help Of Gravity, Neither Electricity Is Spent Nor Does They Resort To Pumping.

इंजीनियर्स-डे आज:54 साल से ग्रेविटी के सहारे 13 किमी तक आता है पानी, ना बिजली खर्च होती है और ना ही पंपिंग का सहारा लेते हैं

अजमेर9 दिन पहले
  • कॉपी लिंक
1967 में मैसेनरी सीडब्लूआर बनाकर पहली बार अजमेर शहर में लाया गया था ग्रेविटी से पानी - Dainik Bhaskar
1967 में मैसेनरी सीडब्लूआर बनाकर पहली बार अजमेर शहर में लाया गया था ग्रेविटी से पानी
  • रोजाना करीब ढाई करोड़ लीटर पानी खुद ब खुद सुभाष उद्यान पंप हाउस पहुंचता है

अजमेर शहर में सन‌् 1967 यानी 54 साल पहले पहली बार ग्रेविटी से नसीराबाद घाटी के एसआर-7 टैंक से सुभाष उद्यान पंप हाउस तक पीने का पानी लाया गया था। यह दूरी 13 किमी है। इस काम में ना बिजली खर्च होती है और ना ही पंपिंग का सहारा लिया गया है। अब भी रोजाना 24 एमएलडी से ज्यादा यानी करीब ढाई करोड़ लीटर (कटौती नहीं होने की स्थिति में) पानी अब भी खुद ब खुद सुभाष उद्यान पंप हाउस पहुंचता है।

जलदाय विभाग के सेवानिवृत्त इंजीनियर नंदराम चौधरी का कहना है कि 1967 में एक्सईएन पीएस राजवंशी की देखदेख में इस काम को पूरा किया गया था, ग्रेविटी लेवल और अलाइमेंट को लेकर काफी मेहनत की गई थी। तब वे जूनियर इंजीनियर थे। यह प्रोजेक्ट उस समय प्रदेश का यूनिक ग्रेविटी प्रोजेक्ट था। इसके बाद ही पहाड़ी क्षेत्रों वाले जिलों में इस प्रोजेक्ट की तर्ज पर काम किया गया। जलदाय विभाग के एसई राजीव कुमार एवं एक्सईएन प्रोजेक्ट प्रहलाद चौधरी का कहना है कि एक अनुमान के मुताबिक यदि इसी पानी को बिना ग्रेविटी के प्लान किया जाता तो जलदाय महकमे को 60 लाख प्रति माह बिजली पर खर्च करना पड़ता।

पहले मैसेनरी सीडब्लूआर, फिर 25 और बाद में 75 एमएलडी का स्टोरेज

1967 के पहले नगर निगम अजमेर में पानी देता था। इसके बाद नसीराबाद घाटी में बनास योजना के तहत पहली बार पत्थर के साथ चूने और मिट्‌टी के मिश्रण से टैंक बनाया गया, जिससे अजमेर में ग्रेविटी से पानी लाया गया। बाद में बीसलपुर परियोजना विस्तार के लिए पहले 25 और बाद में 75 एमएलडी का स्टोरेज टैंक बनाया गया।

स्मार्ट इंजीनियरिंग- 6 पंपिंग स्टेशन, सभी इंटरचेंजेबल

प्रोजेक्ट विंग के एक्सईएन प्रहलाद पारीक का कहना है कि बनास से नसीराबाद घाटी तक 6 पंपिंग स्टेशन आते थे। नेगड़िया, कादेड़ा, अजगरा, गोयला, लोहरवाड़ा इन सभी पर इंटरचेंजेबल पंप लगाए गए थे, जिसे एक-दूसरे की जगह काम में लिया जा सकता था। दरअसल, उस समय देश में पंप नहीं बनते थे, पार्ट्स बाहर से आते थे, जो असेंबल होते थे। इस कारण इन्हें इंटरचेंजेबल रखा गया।

13 किमी लाइन

नसीराबाद के एसआर-7 टैंक से सुभाष उद्यान पंप हाउस तक लाइन 100 से 600 एमएम की रहती है। अलवर गेट से लाइन डायरवर्ट भी होती है, जिससे शहरभर में पानी जाता है।

1.60 लाख घरों में पानी

अजमेर सिटी-1 और सिटी-2 के 1.60 लाख घरों में पानी दिया जाता है। सुभाष उद्यान, अलवर गेट से पानी को अलग-अलग क्षेत्रों में पंप कर भेजा जाता है।

57 मीटर का अंतर

एसआर-7 की समुद्र तल से ऊंचाई 541.4 मीटर तथा सुभाष उद्यान पंप हाउस की समुद्र तल से ऊंचाई 484.4 मीटर है। दोनों में 57 मीटर का अंतर है।

खबरें और भी हैं...