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अजमेर में कॉल सेंटर पर रेड:लोन का लालच देकर प्रोसेसिंग फीस के नाम पर दक्षिण भारत में रहने वाले लोगों से 70 लाख की ठगी की, कॉल सेंटर का संचालक गिरफ्तार

अजमेरएक महीने पहले
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गिरफ्तार संचालक भवानीखेडा नसीराबाद निवासी सावरसिंह रावत। ( सफेद शर्ट में) - Dainik Bhaskar
गिरफ्तार संचालक भवानीखेडा नसीराबाद निवासी सावरसिंह रावत। ( सफेद शर्ट में)
  • जयपुर-अजमेर पुलिस ने गुरुवार देर रात केनोपस कॉल सेंटर पर रेड की थी

अजमेर के सिविल लाइन स्थित एक कॉल सेंटर से सस्ते लोन का झांसा देकर बीते 6 महीने में 70 लाख की ठगी की गई। जयपुर और ​अजमेर पुलिस ने गुरुवार देर रात छापा मार कर यहां से कम्प्यूटर और दस्तावेज जब्त कर लिए। इसके अलावा केनोपस कॉल सेंटर के संचालक को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने यह कार्रवाई महाराष्ट्र की एक महिला की शिकायत पर की। शुक्रवार को इस बात का खुलासा पुलिस अधीक्षक जगदीश चन्द्र शर्मा ने किया।

जयपुर और अजमेर पुलिस ने सिविल लाइन में विधिक सेवा प्राधिकरण कार्यालय के पास कॉल सेन्टर केनोपस टोटल सर्विस प्राइवेट लिमिटेड के ऑफिस पर छापा मारा। देर रात संचालक भवानीखेड़ा नसीराबाद निवासी सावरसिंह रावत को हिरासत में लिया और उसकी कार भी जब्त की।

ऐसे हुआ खुलासा
एसपी शर्मा ने बताया कि जयपुर से पुलिस कमिश्नर ने उन्हें सूचना दी कि महाराष्ट की रहने वाली अनिता अनिल जोशी ने जयपुर में परिवाद पेश कर बताया कि सस्ते लोन का झांसा देकर उसके साथ 73 हजार की ठगी की गई। ठगी करने वाले ने जयपुर में अपना कार्यालय बताया। जब जांच की तो पाया कि यह मामला अजमेर से जुड़ा है। इस पर जयपुर से इंस्पेक्टर सत्यपाल सिंह, अजमेर से सीओ प्रिंयका और सिविल लाइन प्रभारी अरविन्द सिंह ने पुलिस टीम के साथ कॉलसेंटर पर छापा मारा।

ऐसे कर रहे थे ठगी
एसपी शर्मा ने बताया कि आरोपी संचालक भवानीखेडा नसीराबाद निवासी सावरसिंह रावत ने केनोपस टोटल सर्विस प्राइवेट लिमिटेड के नाम से कंपनी बना रखी थी। यूट्यूब व डिजिटल मार्केट की वेबसाइट आड़ में ग्लोबल बिजनेस सर्विस और रिप​ब्लिक फायनेंस कंपनी बनाकर सस्ते लोन देने का झांसा देते थे। इसके लिए 20 से 30 युवक लड़कियों को नौकरी पर रखा था। कंपनी छोटे-छोटे लोन के प्रस्ताव देकर प्रोसे​सिंग फीस के नाम पर दस से तीस हजार रुपए की वसूली करते थे। यह रकम वे अलग-अलग खातों में जमा कराते थे। बाद में अपने मोबाइल बंद कर लेते थे।

प्रत्येक को टारगेट 150 कॉल
एसपी ने बताया कि यहां काम करने वालों को 150 कॉल रोजाना करने के लिए बोला जाता था और इसके लिए उनको सूची भी उपलब्ध कराई जाती थी। इन सभी को अलग-अलग मोबाइल दिए जाते थे। ठगी के मामले में इन कार्मिकों की कोई भूमिका है या नहीं, इस बारे में जांच की जा रही है।

दक्षिण राज्यों के लोग शिकार
एसपी शर्मा ने बताया कि अभी तक की जांच में यह भी पाया कि राजस्थान से किसी को ठगी का शिकार नहीं बनाया गया बल्कि ठगी का शिकार होने वाले अधिकांश लोग दक्षिण राज्यों से हैं। बीते 6 महीने में इन लोगों ने करीब 60 से 70 लाख की ठगी की है। इसके लिए इनके बैंक खातों की भी जांच की जा रही है।

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