बिग कंट्राेवर्सी:‘राज्यपाल काे एसी के निर्णय पर हस्तक्षेप का अधिकार नहीं’, एमडीएसयू कुलपति व भाजपा नेता आमने-सामने

अजमेर2 महीने पहले
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राज्यपाल काे ज्ञापन देते भाजपा नेता। - Dainik Bhaskar
राज्यपाल काे ज्ञापन देते भाजपा नेता।
  • योग प्रसार को पीएम की देन बताना भी राजनीतिक आग्रह है : थानवी

एमडीएस यूनिवर्सिटी याेगा विभाग के प्रशिक्षकाें काे वापस मूल संस्थान भेजने के एकेडमिक काउंसिल के निर्णय काे लेकर कार्यवाहक कुलपति और भाजपा नेताओं में तलवारें खिंच गई हैं। शनिवार काे भाजपा नेता राजभवन जा पहुंचे और राज्यपाल से आग्रह किया कि स्थायी कुलपति लगाया जाए।

उन्होंने आराेप भी लगाया कि थानवी अयाेग्य कुलपति हैं और एक पार्टी विशेष की विचारधारा की आड़ में याेगा सेंटर बंद करना चाहते हैं। दूसरी ओर कुलपति थानवी ने याेगा सेंटर के प्रशिक्षकों काे उनके मूल संस्थान में भेजे जाने के एकेडमिक काउंसिल के फैसले पर राेक लगाए जाने संबंधी राज्यपाल के पत्र के जवाबी पत्र में साफ शब्दाें में लिखा है कि यूनिवर्सिटी एक्ट के अनुसार राज्यपाल काे यह अधिकार ही नहीं है।

एसी के निर्णय पर पुनर्विचार सिर्फ बाॅम में हाे सकता है। उन्होंने पत्र में भाजपा के पूर्व देहात अध्यक्ष और यूनिवर्सिटी से ही रिटायर हुए प्राे. बीपी सारस्वत पर राज्यपाल काे राजनीति में घसीटने का आराेप लगाया है।

विवाद का मूल कारण

एमडीएसयू में याेगा सेंटर भाजपा शासन में कुलपति बनाए गए प्राे. पीएल चतुर्वेदी के कार्यकाल में शुरु हुआ था। प्राे. चतुर्वेदी भाजपा के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष रहे अरुण चतुर्वेदी के पिता थे। विवेकानंद याेग केंद्र बैंगलुरू से करार के आधार पर यहां दाे प्रशिक्षक संविदा पर नियुक्त हैं।

हर तीन साल में प्रशिक्षक बदलते रहते थे। करार करीब चार साल पूर्व समाप्त हाे चुका हैं। वसुंधरा राजे सरकार के दाैरान यूनिवर्सिटी में 6 अक्टूबर 2018 काे प्राे. आरपी सिंह कुलपति बनाए गए। प्राे. सिंह के कार्यकाल में इन प्रशिक्षकाें ने इस आधार पर अपना पदनाम बदलने और पदाेन्नति की मांग की थी कि उन्हें उनके मूल संस्थान विवेकानंद याेग केंद्र ने पदाेन्नत कर दिया है।

इस मांग का विराेध हुआ ताे प्राे. सिंह ने प्राे. शिवदयाल काे जांच साैंपी। जांच पूरी हाेने से पहले आरपी सिंह रिश्वत के आराेप में एसीबी द्वारा गिरफ्तार कर लिए गए। प्रदेश में अशाेक गहलाेत सरकार आ गई और ओम थानवी कार्यवाहक कुलपति तैनात किए गए।

प्राे. शिवदयाल की रिपाेर्ट एकेडमिक काउंसिल की बैठक में रखी गई। काउंसिल ने दाेनाें प्रशिक्षकाें काे उनके मूल संस्थान भेजने का निर्णय किया। यह भी तय किया कि याेगा विभाग यूनिवर्सिटी स्थानीय स्तर पर ही संविदा के आधार पर प्रशिक्षक तैनात कर चलाएगी। प्राे. सारस्वत ने काउंसिल के इसी फैसले के खिलाफ राज्यपाल काे शिकायत की थी जिस पर राज्यपाल ने फैसले पर राेक लगाने संबंधी पत्र यूनिवर्सिटी काे भेज दिया।

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आराेप लगाने वाले खुद राजनीति कर रहे हैं

सूत्र ने बताया कि कार्यवाहक कुलपति ने जवाबी पत्र में कहा है कि राजनीति का आराेप लगाने वाले खुद ही राजनीति कर रहे हैं। दुर्भाग्य की बात है कि वे लाेग याेग काे एक पार्टी विशेष की देन मानते हैं। कार्यवाहक कुलपति ने अपने जवाब में आगे लिखा है कि भाजपा कार्यकर्ता बीपी सारस्वत ने यूनिवर्सिटी काे न लिखकर राज्यपाल को लिखा कि वे एकेडमिक काउंसिल के निर्णय को निरस्त कर दें।

यह अनावश्यक रूप से राज्यपाल को भाजपा की राजनीति में घसीटने की कोशिश है। उन्होंने पत्र में लिखा है कि यूनिवर्सिटी के एक्ट के तहत राज्यपाल को यह अधिकार ही प्राप्त नहीं है। एकेडमिक काउंसिल के िनर्णयाें पर केवल बाेर्ड ऑफ मैनेजमेंट ही पुनर्विचार कर सकता है।

उन्होंने लिखा है कि बीपी सारस्वत ने पत्र में लिखा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने योग को अंतरराष्ट्रीय पहचान दी है और एमडीएसयू में योग विभाग को बंद करने की योजना दिखाई दे रही है। कुलपति ने विचारधारा के आधार पर यह निर्णय करवाया है।

राज्यपाल काे 12 सूत्रीय ज्ञापन दिया

यूनिवर्सिटी के हालात राज्यपाल कलराज मिश्र काे बताने भाजपा नेताओं में सांसद भागीरथ चाैधरी, विधायक वासुदेव देवनानी, पूर्व भाजपा अजमेर देहात जिलाध्यक्ष और एमडीएसयू के रिटायर प्राे. बीपी सारस्वत, पूर्व राज्यसभा सांसद ओंकार सिंह लखावत और विधायक रामस्वरूप लांबा राजभवन पहुंचे। इन नेताओं ने राज्यपाल काे 12 सूत्रीय ज्ञापन देकर आराेप लगाया कि कार्यवाहक कुलपति ओम थानवी काे अयाेग्य कुलपति हैं। उन्हें हटाकर किसी और काे अतिरिक्त प्रभार दिया जाए। राज्यपाल से सीईएसबीएम काे मर्ज करने, निजी काॅलेजाें से पैनल्टी वसूलने, रिसर्च काे लेकर आ रही समस्याओं और परीक्षा काे लेकर चर्चा की। कुलपति की शैक्षिक योग्यता पर भी सवाल उठाया गया।

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