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गजब कहानी, कभी खुदकुशी करने वाले थे:पिता की मौत हुई तो सड़क पर आ गया था परिवार, पहले सब्जी बेची, फिर मूर्ति बनाने का शुरू किया काम; लाखों खर्च कर बना रहे हनुमान मंदिर

अजमेर4 महीने पहले
पूजा करते संत।

ईश्वर में आस्था और विश्वास, किसी भी बुरे वक्त से बाहर निकलकर तकदीर बदल देता है। ऐसे ही एक कहानी है ग्राम लाडपुरा निवासी प्रताप रावत(63) की। उनकी माने तो करीब 15 साल पहले कर्ज के बोझ से परेशान होकर आत्महत्या करने का सोच लिया था। फिर सपने में बजरंग बली ने आकर मूर्ति बनाने का काम शुरू करने की सलाह दी। अब एक से दो लाख रुपए माह के कमा रहे हैं। आज वे संत रावत प्रसाद (मूर्तिकार) के नाम से जाने जाते हैं।

खास बात यह है कि रावत ने जितना भी मूर्ति के कामकाज से पैसा कमाया है, उसी से मंदिर का निर्माण कराने में लगे हैं। मंदिर निर्माण के लिए किसी भी भामाशाह की मदद नहीं ले रहे हैं। मंदिर निर्माण में वह अब लाखों रुपए खर्च कर चुके हैं। इसकी वजह से ही आज मंदिर में ग्रामीण क्षेत्र के साथ जयपुर, अजमेर, टोंक, भीलवाड़ा, उदयपुर, पाली, चूरू, नसीराबाद, किशनगढ़, सरदार शहर, फलौदी, पुष्कर, बूंदी आदि शहरों से भक्त मंदिर में दर्शन के लिए आते हैं।

मंदिर में स्थापित मूर्तियों की करते पूजा अर्चना
मंदिर में स्थापित मूर्तियों की करते पूजा अर्चना

कुएं की खुदाई पर किस्मत ने दिया धोखा
संत रावत प्रताप दास महाराज ने बताया कि वर्ष 1983 में कुंआ खुदवाने के लिए सवा लाख रुपए से कार्य किया। 60 हजार लोन बैंक से लिया और बाकी पैसा अन्य लोगों से, लेकिन खेत में मिट्‌टी सरकने की वजह से कुआं पूरी तरह से पत्थरों व मिट्‌टी से बंद हो गया। इस सदमे की वजह से महाराज के पिता जोधा सिंह की उसी साल मौत हो गई। रावत की उम्र उस समय सिर्फ 25 साल थी। बैंक वालों ने लोन की वसूली के लिए घर व जमीन कुर्क कर ली। परिवार सड़क पर आ गया। ऐसे में परेशान होकर महाराज ने जिला कलेक्टर से आत्महत्या करने की अनुमति देने की गुहार लगाई। इसके बाद कलेक्टर से बैंक अधिकारियों को प्रति माह किश्त बांध पैसा वसूलने के आदेश दिए।

अजमेर में सब्जी बेचने से की शुरुआत, अब बना रहे मूर्तियां
इसके बाद उन्होंने अजमेर जाकर अपनी मां के साथ सब्जी बेचने का कार्य शुरू किया। कर्जा देने वाले आए दिन परेशान करने लगे। उन्होंने आत्महत्या करने का पूरा विचार कर लिया। उनका कहना है कि उसी रात ईष्ट देवता बंजरगबली सपने में आए और उन्होंने आत्महत्या ना करते हुए मूर्ति कार्य करने का आदेश दिया। इसके बाद पूरे राज्य में मूर्ति बना कर बेचने का कार्य शुरू किया। इसमें प्रति माह 1 से 2 लाख रुपए की कमाई होती है। इस सफलता के बाद बंजरगबली का मंदिर बनाने का निर्णय किया। 2005 से मंदिर निर्माण का काम शुरू किया, जो आज तक चल रहा है।

पूजा अर्चना करते संत
पूजा अर्चना करते संत

जन्म के साथ धर्म के माता-पिता की मूर्ति भी स्थापित
श्री इच्छापूर्ण बालाजी मंदिर में स्थापित बालाजी की मूर्ति के साथ ही शिव परिवार, राम परिवार, लक्ष्मी, सरस्वती, गणेश, दुर्गा, जगदम्बा, रामदेव परिवार की अपने हाथाें से बनाई मूर्ति के साथ जीवन देने वाले माता-पिता की मूर्ति है। इसके अलावा जीवन में सही राह दिखाने वाले धर्म के माता-पिता की मूर्ति भी स्थापित की है।

वे बताते हैं कि मंदिर में सेवा करने के साथ ही मंदिर को पूरा करने के लिए बेलदारी तक कर रहा हूं। बालाजी के चमत्कार की वजह से मंदिर में मंगलवार व शनिवार को विशेष आरती होती है। जिसमें श्रृद्धालुओं की भीड़ लगती है।

(रिपोर्ट व फोटो : गुलशन शर्मा)

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