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  • Hate Language (Prohibition) Act 2021 Passed In Rajasthan; Strict Law Made To Stop Indecent Remarks, CM Ashok Gehlot Will Submit Memorandum Tomorrow

अजमेर ख्वाजा साहब की दरगाह में कांफ्रेंस:राजस्थान में पारित हो अभद्र भाषा (निषेध) अधिनियम 2021; अभद्र टिप्पणी रोकने के लिए बने सख्त कानून,CM अशोक गहलोत कल सौंपेंगे मेमोरेंडम

अजमेर2 महीने पहले
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दरगाह में कांफ्रेंस - Dainik Bhaskar
दरगाह में कांफ्रेंस

सूफी संत हजरत ख्वाजा ग़रीब नवाज़ की दरगाह में मंगलवार को तहफ्फुजे नामूसे रिसालत बोर्ड की ओर से एक कांफ्रेंस आयोजित की गई। अहाता-ए-नूर में हुए इस आयोजन में विभिन्न उलेमा मशाईख और खास तौर से राजस्थान के इदारों ने राजस्थान में अभद्र भाषा (निषेध) अधिनियम 2021 पारित करवानें की मांग की। इसी मांग को लेकर बुधवार को एक मेमोरेंडम वक्फ और अल्पसंख्यक मामलात मंत्री शालेह मोहम्मद के माध्यम से मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को दिया जाएगा।

रजा एकेडमी के महासचिव सईद नूरी ने कहा कि आज मुल्क में एक प्रोपेगेन्डा फैलाने का माहौल चल रहा है । कुछ खास लोग अपनी शोहरत के लिए मज़हब, मजहबी रहनुमाओं और खास तौर से पैगम्बरे इस्लाम के लिए ना क़ाबिले बर्दाश्त बयान जारी कर रहे है। इन बयानों को जारी करने से जहां ये लोग अपने खास हल्के में सुर्खियाँ बटोर लेते हैं, वहीं दूसरी तरफ आम व खास लोगों को इससे तकलीफ होती है। हालात यह हो जाते हैं कि कई बार शहरों, बस्तियों और गलियों तक में लॉ एंड ऑर्डर खराब होने की स्थिति हो जाती है। इन तमाम बातों को लेकर ही हम ने पहले महाराष्ट्र से और अब राजस्थान सरकार से भी मांग कर रहे है कि राजस्थान में अभद्र भाषा (निषेध) बिल लाया जाए।

आल इंडिया क़ाजी बोर्ड के महासचिव मौलाना फजले हक ने कहा कि इस बिल के आ जाने के बाद बढ़ती वारदातों को रोका जा सकेगा। साथ ही भारतीय संविधान के मुताबिक सभी को इज्जत और बराबरी का दर्जा हासिल होगा। अभी हालात यह बन रहे हैं कि लोग रंगों से मजहब की पहचान कर रहे हैं। हमें चाहिए कि हम इंसान के किरदार से उसकी पहचान करें।

अंजुमन सैयदजादगान के सचिव सैयद वाहिद हुसैन अंगाराशाह ने कहा कि अगर हमें आज इज्जत और मोहब्बत की बात देखनी है तो हिन्दुस्तान की सबसे बड़ी मिसाल ख्वाजा ग़रीब नवाज़ की दरगाह शरीफ है। यहां पर सभी को अपने छोटे बड़े का एहसास खत्म हो जाता है। हमें चाहिए कि हम सभी मजहबों की इज्जत करें और सीने से लगाए, क्योंकि सूफी संतो की ही यही तालिमात है। इस मौके पर सैयद मोईनुद्दीन अशरफी, मुफ्ती शेर मोहम्मद, सैयद जामी अशरफ़ जीलानी, सैयद निसार अहमद, मुफ्ती कौनेन, मुफ्ती खालिद अय्यूब, मौलाना बशीरूल क़ादरी इत्यादि मौजूद रहे।

(रिपोर्ट : आरिफ कुरेशी)

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