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सुविधा:अजमेर मेडिकल कॉलेज में भी मानव अंग निकाले जा सकेंगे, प्रत्यारोपण जयपुर के एसएमएस अस्पताल में ही हाेगा

अजमेर20 दिन पहलेलेखक: मनीष सिंह चाैहान
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  • बीकानेर, काेटा, उदयपुर, जोधपुर मेडिकल काॅलेजाें में भी यह सुविधा उपलब्ध होगी

प्रदेश के अजमेर, बीकानेर, काेटा, उदयपुर और जोधपुर मेडिकल काॅलेजों में भी अब मानव अंग निकाले जा सकेंगे। प्रदेश के सभी मेडिकल काॅलेजों में काेविड-19 की स्थिति सामान्य हाेने के बाद इस योजना पर अमल शुरू हाेगा। पहले चरण में केवल इन पांचाें मेडिकल काॅलेजों में मानव-अंगाें काे निकाला जाएगा। इन अंगों का प्रत्यारोपण जयपुर के सवाई मानसिंह अस्पताल में ही किया जाएगा।

शुरुआती चरण में मानव अंगों काे निकालने के लिए जयपुर के एसएमएस मेडिकल कॅालेज के सर्जरी यूनिट की टीम संबंधित मेडिकल काॅलेज पहुंचेगी, जहां से मानव अंगों काे निकालकर जयपुर के एसएमएस अस्पताल लाया जाएगा।

इन अंगों काे वहीं प्रत्यारोपित किया जाएगा। इस संबंध में केंद्र सरकार की ओर से हाल ही में राज्य काे दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। निर्देशों के तहत पहले चरण में केवल किडनी ही निकाली जाएगी। दूसरे चरण में अन्य अंग निकाले जाएंगे।

दस सदस्यों की हाेगी पूरी निगरानी टीम: हर मेडिकल कॅालेज में अंग निकाले जाने के लिए दस सदस्यों की टीम तैयार की जाएगी। इस टीम में सर्जरी यूनिट सहित फिजीशियन, लीगल कमेटी के सदस्य, ट्राेमा यूनिट अधिकारी रहेंगे। यह टीम आने वाले समय में अन्य लाेगाें काे अंग दान करने के लिए प्रेरित करने के साथ ही संबंधित अस्पताल ओर मेडिकल कॅालेज के बीच सामंजस्य स्थापित करेगी।

ग्रीन कॉरिडोर बनेगा जयपुर तक
प्रदेश के किसी भी मेडिकल कॅालेज से अंग निकाले जाने के बाद जयपुर तक पहुंचाने की व्यवस्था के लिए प्रशासन का सहयोग लिया जाएगा। जयपुर तक का ग्रीन कॉरिडोर बनाया जाएगा। हर थाने की टीम आगे से आगे हाइवे काे खाली कराते हुए एम्बुलेंस काे एसएमएस तक पहुंचाएगी। अंगों काे एक निश्चित तापमान में रखा जाएगा।

स्थानीय सर्जन की टीम हाेगी तैयार: पहले चरण में जयपुर के विशेषज्ञों की टीम आकर मानव अंग निकालेगी। धीरे-धीरे इस प्रक्रिया में स्थानीय सर्जरी से जुड़े चिकित्सा विशेषज्ञों और एचओडी काे जिम्मेदारी दी जाएगी। बाद में स्थानीय सर्जन ही अंगाें काे प्रत्यारोपित कर सकेंगे।

ब्रेन डेथ डाेनर के अंग तभी निकाले जाएंगे जब मरीज तैयार: ब्रेन डेथ डाेनर मरीज के अंग तभी निकाले जाएंगे जब एसएमएस मेडिकल कॅालेज में किसी मरीज के लगाने की पूरी व्यवस्था हाे। संबंधित मेडिकल काॅलेज से मरीज के निकल जाने के बाद वहां दूसरी टीम मरीज काे अंग लगाने के लिए तैयार करेगी। अंग निकाले जाने और लगाने के बीच अधिकतम 4 से 5 घंटे का समय लगेगा।

इनका कहना है...
काेविड खत्म हाेने के बाद अजमेर में भी मानव अंग निकाले जाने की प्रक्रिया शुरू हाेगी। इसके लिए हेल्थ वर्कर्स और सामाजिक संस्थाओं का सहयोग भी लिया जाएगा, जाे लाेगाें काे प्रेरित करने में मदद करेंगे। अभी केवल अजमेर, बीकानेर, काेटा, उदयपुर और जोधपुर मेडिकल काॅलेजों में अंग निकाले जाएंगे। अंगाें काे जयपुर के एसएमएस अस्पताल में प्रत्यारोपित किया जाएगा। ब्रेन डेथ मरीज के परिजनों से काउंसलिंग करके डोनेशन के लिए प्रेरित किया जाएगा।
- डाॅ. श्याम भूतड़ा, सीनियर सर्जन और नाेडल ऑफिसर, अंग प्रत्यारोपण कमेटी, जेएलएन मेडिकल काॅलेज अजमेर

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