• Hindi News
  • Local
  • Rajasthan
  • Ajmer
  • I… Papa, Brother Was Hospitalized, Wife Hem Quarantine, Dasten neighbors Took Over, Sent 5 year old Son Kani Nanihal

जन संकल्प से हारेगा कोरोना:मैं... पापा, भाई अस्पताल में भर्ती थे, पत्नी हाेम क्वारेंटाइन, दाेस्ताें-पड़ौसियों ने संभाला, 5 साल के बेटे काे ननिहाल भेजा

अजमेर6 महीने पहले
  • कॉपी लिंक
  • गंभीर कोरोना संक्रमण होने के बावजूद अपनी इच्छाशक्ति से कोरोना को हराने वालों की जांबाज कहानियां
  • परिवार के लाेग एक दूसरे का सहारा बने, पता चला-पड़ाैसी और दाेस्त जीवन में कितने जरूरी

समाज का जीवन में क्या महत्व हाेता है यह संकट की घड़ी में ही पता लगता है। बुजुर्ग कहते हैं कि संकट में जाे काम आए वही सच्चा दाेस्त व पड़ाैसी हाेता है। बात बीते साल अक्टूबर माह की है। इस माह काे मेरा पूरा परिवार काेराेना की पहली लहर के अक्टूबर काे नहीं भूल सकता। पंचशील निवासी विवेक गुप्ता बताते हैं कि अक्टूबर की 9 तारीख काे मुझे बुखार आया ताे जांच करवाई।

दूसरे दिन काेराेना पाॅजिटिव रिपाेर्ट आई। पांच दिन तक हाेम क्वारेंटाइन ही अलग कमरे में रहा। लेकिन 15 अक्टूबर काे अचानक तबीयत खराब हुई ताे परिजन सीधे एम्स ले गए। वहां पर एचआर सीटी करवाई ताे 14.4 थी। पूरा शरीर टूट रहा था। मेरे लिए वह दिन काफी दुखदायी था क्याेंकि मेरे कारण पूरा परिवार परेशान हाे रहा था। मैं अस्पताल में भर्ती हाे गया।

इसी दाैरान उनके पिता पीसी गुप्ता व भाई नरेश की तबीयत भी खराब हाे गई। जांच में हालांकि वह काेराेना पाॅजिटिव नहीं आए लेकिन काेविड के संक्रमण उनमें साफ नजर आ रहे थे। चिकित्सकाें ने उनकी स्थिति देख उन्हें भी भर्ती कर लिया। पत्नी की रिपाेर्ट पाॅजिटिव आई ताे वह हाेम क्वारेंटाइन हाे गई। बेटा मनन महज 5 साल का है। पूरा परिवार अस्पताल में है। पत्नी हाेम क्वारेंटाइन है।

ऐसे में पांच साल के बच्चे काे काैन संभाले। बच्चे काे ससुराल जयपुर भेज दिया गया, लेकिन पत्नी घर पर अकेली थी। राेजमर्रा की वस्तुओं के अलावा देखरेख की जिम्मेदारी काैन संभाले। यह वाे दिन था जब किसी काे पता चल जाए कि यह संक्रमित है ताे गली से भी नहीं निकलते थे। ऐसे में पड़ाैसे में रहने वाले काॅलाेनी के लाेगाें व दाेस्ताें ने अपना धर्म निभाया। पत्नी काे दूध, सब्जी व फल सहित सभी वस्तुएं घर पर देकर जाते। आज भी वह मेरे लिए अनुकरणीय है।

विवेक बताते हैं कि काेराेना काे कभी अपने पर हावी नहीं हाेने दाे। पेनिक नहीं हाेना चाहिए। जहां तक हाे आराम से रहाे। अच्छा खाते पीते रहाे। खुले वातावरण में रहने के साथ अच्छा साेचाे ताे काेराेना से तेजी से रिकवर हाेंगे। यही हम सभी ने अपनाया। हम एक दूसरे के सहारा ताे बने ही ऐसे समय में एक दूसरे का पूरा ध्यान रखने के साथ दवा लेने, खाना खाने व हंसी मजाक भी किया करते थे ताकि पेनिक नहीं रहें। आज लाेगाें काे मास्क पहनने व सेनिटाइज्ड सहित काॅलाेनी में बचाव के लिए प्रेरित कर रहे हैंं।

खबरें और भी हैं...