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बिजली बिल पर बवाल:काराेबारी बाेले... लॉकडाउन में जब फैक्ट्री पर ताला जड़ा था ताे बिजली का फिक्स चार्ज क्यों दें?

अजमेर4 महीने पहले
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  • लॉकडाउन में बंद रहे उद्याेग, फिर क्याें भरे भारी-भरकम बिजली के बिल, जितनी खर्च हुई उतने का ही बिल देने की मांग

लाॅकडाउन के दाैरान सरकार से मिली अनुमति के बाद जिलेभर में एमएसएमई इकाइयां ताे शुरू हाे गई, लेकिन माैजूदा हालाताें में प्राेडक्शन शुरू कर पाना उद्याेगपतियाें के लिए परेशानी भरा हाे रहा है। एक ओर मजदूराें का संकट बरकरार है, वहीं दूसरी ओर लॉकडाउन के दाैरान अजमेर डिस्काॅम और टाटा पावर की तरफ से हजाराें रुपए का फिक्स चार्ज सिरदर्द बना हुआ है। काराेबारियाें का कहना है कि बिजली कंपनियाें काे जब केंद्र सरकार ने 90 हजार कराेड़ रुपए का राहत पैकेज दिया है ताे क्याें उद्याेगाें से बिजली का फिक्स चार्ज वसूला जा रहा है। रीकाे औद्याेगिक क्षेत्र परबतपुरा, किशनगढ़, ब्यावर, गेगल, नसीराबाद, सिलाेरा, बेवंजा, जवाजा सहित अन्य क्षेत्राें में स्थित एमएसएमई इकाइयाें काे क्षमता के मुताबिक 10 किलाेवाॅट से 300 किलाेवाॅट तक लाेड स्वीकृत है। लॉकडाउन के कारण सभी इकाइयां 22 मार्च से 17 मई तक अधिकतर इकाइयां बंद ही थीं। प्रत्येक उद्यमी के 20 हजार से लेकर 70 हजार रुपए तक बिजली का फिक्स चार्ज आया है, जबकि उसने बिजली का प्रयाेग ही नहीं किया। 
साेलर एनर्जी का समायाेजन नहीं हाे रहा
 लघु उद्याेग भारती की ओर से एवीवीएनएल से पूर्व में यह मांग की जा चुकी है कि लॉकडाउन अवधि के दाैरान उद्याेगाें के बिल में फिक्स चार्ज काे माफ किया जाए लेकिन इस पर अब तक काेई निर्णय नहीं हुआ है। 
 साेलर प्लांट लगाने वाले उद्यमियाें के लिए काेढ़ में खाज पैदा हाे गई, वास्तविक से चार गुणा बिजली का बिल भरना पड़ा है। उसमें से भी साेलर एनर्जी का समायाेजन नहीं हाे रहा है। इधर, साेलर प्लांट पर लिए गए लाेन पर भारी ब्याज वाली किश्त भी जमा करवानी पड़ा रहा है। 
फिक्स चार्ज काे माफ करना लंबी प्रक्रिया 
अजमेर, जयपुर और जाेधपुर तीनाें डिस्काॅम क्षेत्राें के विभिन्न जिलाें के उद्याेगपतियाें की मांग है कि बिजली का फिक्स चार्ज माफ किया जाए। जब लॉकडाउन में फैक्ट्रियां बंद थी, ताे क्याें वे बिजली का फिक्स चार्ज दें। यह मामला राज्य सरकार के पाले में हैं, डिस्काॅम की रेग्यूलेटरी कमिश्नरी द्वारा इस पर निर्णय किया जाना है। फिक्स चार्ज काे माफ करना लंबी प्रक्रिया है। 
सरकार की दाेहरी नीतियां दुर्भाग्यपूर्ण 
लघु उद्याेग भारती के अध्यक्ष सीए अजीत अग्रवाल ने कहा कि - बिजली कंपनियाें की दाेहरी नीति दुर्भाग्यपूर्ण है। एक तरफ बिजली आपूर्ति की दर में दिनदिनाें बढ़ाेतरी हाे रही है और फिर फ्यूल भावाें में भी कई तरह के सरचार्ज हैं। दूसरी ओर साेलर एनर्जी बिजली खरीद की प्रतिवर्ष घटती दर और उस पर भी लाॅकडाउन में कुछ देय नहीं। सरकार की ऐसी नीतियां हर स्तर पर दमनकारी हैं। यही हालात रहे ताे जिलेभर की 2000 एमएसएमई इकाइयाें में से अधिकतर पर ताले लग जाएंगे। सरकार से मांग की है कि बिजली का फिक्स चार्ज माफ किया जाए।
राज्य सरकार के आदेशाें की पालना करेंगे 
उद्यमियाें द्वारा बिजली के फिक्स चार्ज काे माफ करने की मांग पर डिस्काॅम की रेग्यूलेटरी कमिश्नरी निर्णय लेगी। इस बारे में राज्य सरकार जाे भी आदेश देगी, उसकी पालना की जाएगी। 
-वीएस भाटी, प्रबंध निदेशक, अजमेर डिस्काॅम

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