बीजीय मसाला अनुसंधान केंद्र प्रशिक्षण शुरू:जीरा निर्यात में भारत का प्रमुख स्थान;  राजस्थान व गुजरात के मास्टर ट्रेनरों को  प्रशिक्षण

अजमेर9 महीने पहले
पोस्टर का विमोचन।

राष्ट्रीय बीजीय मसाला अनुसंधान केन्द्र में प्रशिक्षकों के लिए तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम भारत में मसाला मूल्य श्रृंखला सशक्तिकरण के लिए जीरा व सौंफ में अच्छी एवं स्वच्छ कृषि क्रियांए का बुधवार को शुभारंभ हुआ। इस कार्यक्रम में राजस्थान व गुजरात से आए मास्टर ट्रेनर भाग ले रहे हैं। कार्यक्रम संयुक्त राष्ट्र संघ के एफ.ए.ओ. के एस.टी.डी.एफ. कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित किया जा रहा है। केंद्र के निदेशक डॉ. एस.एन सक्सेना ने अतिथियों का स्वागत किया और प्रशिक्षण की आवश्यकता पर चर्चा की। डॉ. सक्सेना ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में जीरा के निर्यात में भारत का प्रमुख स्थान है। देश से करीब 4 हजार करोड़ रुपए का जीरा निर्यात होता है। इसमें से आधा यानी करीब 2 हजार करोड़ रुपए का जीरा अकेला चीन खरीदता है। लेकिन कुछ समय पूर्व ही चीन ने जीरा और अन्य मसाला फसलों के आयात को लेकर कुछ नए मापदंड तय किए हैं। इन मापदंडों पर खरा उतरने वाले जीरे को ही चीन खरीदेगा। इसमें मुख्य रूप से जीरा कीटनाशक रहित होना आवश्यक है।

जीरे की जांच प्रमाणित लैब से होने और प्रमाण पत्र मिलने के बाद ही जीरा चीन आयात कर सकेगा। चीन के नए नियमों को भारत सरकार ने चुनौती के रूप में लिया है। निर्यात के लिए नित नए नियमों और मापदंडों के लिए किसानों को जीरा बुवाई से लेकर प्रोडक्शन और प्रसंस्करण तक की प्रक्रिया को समझाने के लिए ही यह मास्टर ट्रेनर का प्रोग्राम आयोजित किया जा रहा है। ये ट्रेनर अपने-अपने क्षेत्रों में पहुंच कर अन्य ट्रेनर और किसानों को प्रशिक्षित कर सकेंगे। इस अवसर पर क्षेत्रीय मसाला बोर्ड के उपनिदेशक डॉ.. एम.वाई. होन्नूर ने भी संबोधित किया।

खाद्य एवं कृषि संगठन, भारत सरकार के प्रतिनिधि डॉ. कोन्डा रेड्डी ने भारतीय मसालों के ग्लोबल व्यापार पर प्रकाश डाला तथा मसाला निर्यात में स्वच्छता तथा सुरक्षित गुणवत्ता को रेखांकित किया। मानव संसाधन विकास के माध्यम से फूड सेफ्टी के विषय को कृषकों व अन्य हितधारकों तक पहुँचाने की आवश्यकता पर बल दिया। डॉ. विनय सिंह ने मसालों में सालमोनेला जीवाणु तथा अफलाटाक्सिन के कारण निर्यात पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों के बारे में बताया तथा मूल्य श्रृंखला के सभी बिन्दुओं पर सावधानी की आवश्यकता को बताया।

ऑन लाइन संबोधन
मसाला बोर्ड के अनुसंधान निदेशक डॉ. रेमा श्री एवं अन्य वैज्ञानिक ऑन लाइन रुप से जुड़े। उन्होंने कहा कि एस.टी.डी.एफ. प्रोजेक्ट के अंतर्गत बीजीय मसालों विशेषकर जीरा, सौंफ व धनिया की उन्नत कृषि प्रक्रियाओं के माध्यम से निर्यात के लिए सुरक्षित व गुणवत्ता पूर्ण मूल्य श्रृंखला के माध्यम से किसानों की आय वृद्धि तथा निर्यात को बढ़ावा देना है।

मैनुअल का विमोचन
इस अवसर पर दो प्रशिक्षण मैनुअल का भी विमोचन किया गया। जिसमें जीरा व सौंफ की उन्नत कृषि प्रक्रियाओं तथा सुरक्षित उत्पादन विधियों को संकलित किया गया है। इस कार्यक्रम के समन्वयक डॉ. ओ.पी. ऐश्वथ ने सभी प्रतिभागियों और गणमान्य अतिथियों एवं वैज्ञानिकों को कार्यक्रम के बारे में बताया। डॉ. कृष्ण कांत, बी.के. मिश्र, शिवलाल एवं नरेन्द्र चैधरी ने प्रतिभागियों को उन्नत कृषि प्रक्रियाओं के विषय में चर्चा की। इस कार्यक्रम में भारत के विभिन्न क्षेत्रों से कुल 38 प्रशिक्षकों ने भाग लिया।

(रिपोर्ट : आरिफ कुरैशी)