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रमजान मुबारक:जुमातुल विदा आज, घरों में ही अदा होगी जोहर की नमाज

अजमेरएक महीने पहले
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  • 84 साल की उम्र में भी स्वर्ण पदक विजेता प्रौढ़ धावक कंवर मंजर रख रहे हैं पूरे रोजे

अजमेर के प्रौढ़ धावक कंवर मंजर 84 साल की उम्र में भी इस तेज गर्मी में पूरे रोजे रख रहे हैं। शारीरिक रूप से फिट मंजर ने 14 मार्च को ही राजस्थान मास्टर एथलेटिक चैंपियनशिप के तीन इवेंट जेवेलिन थ्रो, शॉटपुट और 100 मीटर दौड़ में धाक जमाते हुए स्वर्ण पदक जीते हैं।

मंजर इन दिनों इबादत में ही लीन हैं और लोगों को भी रोजा रखने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस समय रमजान का मुबारक महीना चल रहा है। यह मुबारक महीना घड़ी यानी वॉच के पांचों अक्षरों की तरह व्यक्ति को जीवन में ईमानदार बनने सहित पांच बड़ी सीख देता है। 84 वर्षीय मंजर ने रोजे की अहमियत बताते हुए कहा कि रोजा वॉच के पांच अक्षरों पर चलना सिखाता है। इसकी व्याख्या करते हुए उन्होंने बताया कि वॉच का पहला अक्षर डब्ल्यू है। इससे ही वर्क बनता है और वर्क इज वर्शिप, यानी काम हमारी इबादत व पूजा है।

दूसरे अक्षर ए(एक्टिव) से हमें हर समय एक्टिव रहने की सीख मिलती है। ए से ही (आल) भी बनता है यानी हम सब मिलकर दुआ करें कि देश और दुनिया से कोरोना का खात्मा हो और सभी इंसानों को राहत मिले। अगला अक्षर टी यानी (ट्रुथ) सच्चाई पर चलना और टाईम कि पंक्चुएलिटी भी रोजा सिखाता है। सी से तात्पर्य(केरेक्टर) यानी एक अच्छा चरित्रवान बनना भी रोजा सिखाता है।

वॉच का अंतिम अक्षर एच यानी ओनेस्टी, रोजा व्यक्ति को ईमानदार भी बनाता है। उन्होंने कहा कि इस्लाम में रोजा रखना फर्ज है। बीमारी या सफर की हालत में ही छोड़ा जा सकता है। उन्होंने सभी से आग्रह किया कि फिट रहने के लिए एक्सरसाइज के साथ ही साल के एक महीने में रोजा रखना भी जरूरी है। यही वजह है कि इस उम्र में भी वे बिना किसी तकलीफ के रोजा रखते हैं और अपने सभी काम पूरे करते हैं।

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