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रघुनाथ मंदिर की बेशकीमती जमीन का मामला:किशनगढ़ रघुनाथ मंदिर ट्रस्टियों को हटाने, प्रशासक नियुक्ति के लिए देवस्थान विभाग अदालत की शरण में

अजमेर7 दिन पहले
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  • विभाग की ओर से पेश दावे पर अध्यक्ष व सदस्यों को नोटिस जारी, जवाब तलब
  • मंदिर की बेशकीमती 63 बीघा जमीन पर मार्बल मंडी सहित अन्य अवैध कब्जे
  • जमीन मंदिर को वापस दिलाने में प्रशासन को आ रहा है जोर

किशनगढ़ के सावंतसर का प्राचीन रघुनाथ मंदिर और इसकी बेशकीमती जमीन का मामला एक फिर सुर्खियों में हैं। देवस्थान विभाग की ओर से मंदिर प्रन्यास के अध्यक्ष हंसा राम चौधरी व चार सदस्यों को पद से हटाने व मंदिर इसकी संपत्तियों की देखरेख उपखंड अधिकारी की अध्यक्षता में गठित प्रबंध समिति को सुपुर्द करने के लिए जिला न्यायालय में वाद दायर किया है।

वाद पर प्रारंभिक सुनवाई करते हुए अदालत ने विपक्षीगण को नोटिस व समन जारी कर जवाब तलब किया है। प्रकरण में 27 अप्रैल को सुनवाई होगी। मंदिर की करीब 63 बीघा बेशकीमती जमीन पर मार्बल मंडी सहित अन्य अतिक्रमण है जिसे हटाने में प्रशासन को जोर आ रहा है। देवस्थान विभाग के प्रतिनिधि ओमप्रकाश ने राजकीय अधिवक्ता विवेक पाराशर के जरिये जिला न्यायालय में प्रन्यास मंदिर रघुनाथ जी सावंतसर के अध्यक्ष हंसाराम चौधरी के अलावा सदस्य राजकुमार जैन, धर्मचंद ओसवाल, श्याम मनोहरलाल मिश्रा और विनोद कुमार बांगड़ के खिलाफ वाद पेश किया है।

वाद में बताया गया है कि 15 जनवरी 2021 को सहायक आयुक्त देवस्थान गिरीश बच्चानी ने मंदिर व इससे जुड़ी संपत्तियों को लेकर अहम निर्णय देते हुए इसे सार्वजनिक प्रन्यास के रूप में पंजीकृत करने का आदेश दिया था। इस आदेश के साथ ही अध्यक्ष व प्रन्यासियों को दो माह के भीतर मंदिर संपत्ति के विकास की कार्ययोजना बनाने और उसका क्रियान्वयन किए जाने के भी निर्देश दिए गए थे।

इसके तहत भव्य मंदिर बनाने और संपत्तियों का संरक्षण व अन्य कार्य शामिल थे। लेकिन अध्यक्ष व प्रन्यासियों ने इस संबंध में कोई कदम नहीं उठाए। ऐसे में अब देवस्थान विभाग ने राजस्थान लोक न्यास अधिनियम की धारा 40 के तहत प्रन्यास भंग किए जाने और अध्यक्ष व प्रन्यासियों को पद से हटाकर मंदिर व इसकी संपत्तियों की देखरेख संरक्षा उपखंड अधिकारी की अध्यक्षता में गठित समिति को सौंपने की प्रार्थना की है।

उपखंड अधिकारी के साथ ही इस समिति के क्षेत्र के विधायक व कलेक्ट्रेट के उपविधि परामर्शी बतौर सदस्य शामिल होंगे वहीं किशनगढ़ तहसीलदार व नगर परिषद किशनगढ़ के अधिशासी अधिकारी इसके सदस्य सचिव रहेंगे।
पुजारी परिवार ने दे दिए थे मंदिर की जमीन के पट्टे
सहायक आयुक्त देवस्थान में मंदिर श्री रघुनाथ जी का प्रन्यास पंजीकृत करने के लिए कई सालों सालों से कार्रवाई चली थी। इस कार्रवाई में यह सामने आया कि मंदिर के पुजारी रहे कुछ लोगों ने अपने स्तर पर पट्टे बनाकर जारी कर दिए और इसके आधार पर अतिक्रमी काबिज हो गए। हाईकोर्ट ने ऐसे पट्टों को गैरकानूनी बताते हुए ही अतिक्रमियों को राहत देने से इंकार करते हुए जमीन काे अतिक्रमण मुक्त करवाने के आदेश दिए थे।

इससे बचने के लिए ही कुछ लोगों ने बैठक कर प्रन्यास बना लिया और इसका पंजीकरण के लिए सहायक आयुक्त देवस्थान विभाग में अर्जी दी थी। जबकि पुजारी परिवार से एक वर्ग इसे लगातार अपना निजी मंदिर बताता रहा। लेकिन मंदिर को निजी बताने वाले पुजारी यह नहीं बता पाए कि उनके पास यह मंंदिर व संपत्ति कहां से आई।

एक पुजारी ने तो स्वयं को नागा साधु से संबंधित बता दिया लेकिन जब उससे पूछा गया कि नागा साधु तो आजीवन अविवाहित रहते हैं तो उसने दलील दी कि उसके 300 से 350 वर्ष पहले उसके पूर्वज पूजा करते थे और उस समय कपड़े नहीं होते थे इसलिए वह नंगे रहते थे और इसलिए उसने स्वयं को नागा बताया था।
प्रन्यासी बन गए लेकिन न तो मंदिर का इतिहास मालूम न ही परंपराएं
अवैध पट्टों से ली गई जमीन को बचाने के लिए कुछ लोगों ने प्रन्यास गठित कर लिया और प्रन्यासी बन बैठे। लेकिन जब सहायक आयुक्त की अदालत में उनके बयान हुए तो न तो उन्हें मंदिर का इतिहास मालूम था न ही यह बता पाए कि मंदिर में पूजा पाठ व आरती किस तरह होती है और वहां की परंपराए क्या हैं।

हाईकोर्ट दे चुका है जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराने का आदेश
2014 में राजस्थान उच्च न्यायालय ने सांवतसर ग्राम स्थित मंदिर श्री रघुनाथ महाराज की 63 बीघा 18 बिस्वा खातेदारी कृषि भूमि को अतिक्रमण मुक्त करने के आदेश दिए थे। इसकी पालना में 27 फरवरी 2017 को प्रशासन ने अतिक्रमण हटाने की तैयारी भी कर ली थी लेकिन रसूखदारों के दबाव के चलते अतिक्रमण नहीं हटाए जा सके। हाईकोर्ट ने इस पर नाराजगी जताई और एक बार फिर मंदिर भूमि को अतिक्रमण मुक्त करने के निर्देश दिए, लेकिन अतिक्रमी अभी भी काबिज हैं।

मालूम हो कि नेशनल हाइवे आठ अजमेर जयपुर रोड के दोनों तरफ खसरा नंबर 337, 430, 431, 440/1 441 की 63 बीघा 18 बिस्वा मंदिर भूमि है। मंदिर भूमि पर मार्बल गैंगसा, गोदाम, होटल, रेस्टोरेंट सहित करीब 96 व्यापारिक गतिविधियां संचालित हैं। अतिक्रमण हटाने के लिए एक बार तो अतिक्रमियों के बिजली कनेक्शन काटने का भी निर्णय किया गया था लेकिन यह कार्रवाई भी कागजों तक सीमित रह गई।

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