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पर्यावरण दिवस पर विशेष:पथरीली जमीन को कर दिया हरा-भरा; MDSU अजमेर में 413 बीघा जमीन पर लगाए करीब 6000 पेड़, 25 साल से मेहनत कर रहे राजेन्द्र तिवारी

अजमेर4 महीने पहलेलेखक: सुनिल कुमार जैन
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MDSU अजमेर में हरे-भरे गार्डन - Dainik Bhaskar
MDSU अजमेर में हरे-भरे गार्डन

अगर मन में कुछ कर गुजरने की तमन्ना हो तो कोई राह मुश्किल नहीं होती। पर्यावरण दिवस पर ऐसे ही एक शख्स की बात करेंगे, जिसने अपनी मेहनत व तकनीक का उपयोग कर पथरीली जमीन को हरा भरा कर दिया। वह शख्स है अजमेर के महर्षि दयानन्द सरस्वती विश्वविद्यालय के उद्यान निरीक्षक राजेन्द्र तिवारी।

उनकी इस पहल पर पूर्व राज्यपाल भी सराहना कर चुके है और जिला स्तर पर भी सम्मानित किया जा चुका है। तिवारी ने जब जोइन किया तो विश्वविद्यालय की सैकड़ों बीघा जमीन पर गिने चुने ही पेड़ थे लेकिन आज पूरा परिसर हरा-भरा है। यहां लगे विभिन्न प्रकार के छह हजार पेड़ उनकी 25 साल की मेहनत की कहानी बयां कर रहे हैं।

पथरीली जमीन देख कर प्लानिंग से किया काम

उद्यान निरीक्षक राजेन्द्र तिवारी ने बताया कि जब विश्वविद्यालय में 1995 में जोइन किया तो पाया कि विश्वविद्यालय की संपूर्ण भूमि पथरीली होने के कारण यहां वृक्षारोपण किया जाना, काफी कठिन था। साथ ही परिसर की चारदीवारी का कार्य भी पूरा नहीं हुआ था और पानी की कमी भी थी। ऐसे में पौधों के पनपने की उम्मीद कम ही नजर आ रही थी। ऐसे में तय किया कि ऐसी कौनसी प्रजातियां है जो कम पानी एवं पथरीली जमीन में सफलतापूर्वक विकसित होगी, उनका चयन किया। वृक्षों को रोपित करने से पहले ढाई फिट चौड़ा और 3 फीट गहरे गड्ढे खोदे गए और उन गड्ढों में अच्छी मिट्टी और खाद डाला गया। उसके पश्चात ही वृक्षारोपण किया।

धीरे धीरे लाई मेहनत रंग

धीरे धीरे मेहनत रंग लाने लगी और हौंसला भी बढ़ा। आज अर्जुन ,करंज, केशिया सामिया शीशम ,सिरस, मौलश्री, अल्स्टोनिया बड, पीपल , तबुबिया, लार्जरस्त रोमिया इंडिका ,बकायन ,जैकेरेंडा ,कजलियां गुलमोहर, कचनार के साथ साथ अमलतास के पेड़ लगे है। इन सब में मुख्य रूप से अर्जुन के पेड़ अधिक मात्रा में लगाए गए हैं,जिनका औषधीय महत्व भी है। विश्वविद्यालय परिसर में वनस्पति विभाग में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं के अध्ययन के लिए उपयोगी विभिन्न किस्मों के पेड़ पौधों को भी लगाया गया।

इससे मिला प्रोत्साहन

  • राजस्थान के पूर्व राज्यपाल मार्गरेट अल्वा व पूर्व राज्यपाल कल्याण सिंह की ओर से ग्रीन एवं क्लीन कैंपस के लिए सराहना की जा चुकी है।
  • वर्ष 2020 में जिला स्तर पर गणतंत्र दिवस समारोह में पथरीली जमीन पर सघन वृक्षारोपण के लिए सरकार के मंत्री रघु शर्मा की ओर से सम्मानित किया गया।

...ताकि बनी रहे उर्वरता

पर्यावरण की दृष्टि से वृक्षों से गिरने वाले सूखे-पत्तों व टहनियों इत्यादि को संग्रहित कर परिसर में बनाए गए कंपोस्ट पिट में डाला जाता है। इससे तैयार खाद का उपयोग पौधों केलिए किया जाता है। इसके अतिरिक्त शेष बचे पत्तों एवं पेड़ पौधों के अवशेषों को जमीन में दबा दिया जाता है, जिससे वहां की मिट्टी में सूक्ष्मजीव विकसित हो सके और मृदा उर्वरता में भी वृद्धि की जा सके। ऐसे प्रयास भी किए जा रहे हैं।

मदसविवि में छाई हरियाली
मदसविवि में छाई हरियाली

ऑक्सीजन जोन भी बनाए

विश्वविद्यालय परिसर में कुछ ऐसे स्थानों को चिन्हित कर ऑक्सीजन जोन विकसित किए गए हैं। जहां पर विश्वविद्यालय में आने वाले आगंतुक और छात्र-छात्राओं को सघन वृक्षों के नीचे बैठने पर आनंद का अनुभव हो। इसके लिए वहां पर बैठने के लिए चबूतरे नुमा व्यवस्थाएं भी की गई है।

मदस विश्वविद्यालय : एक नजर

महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय की स्थापना 1 अगस्त 1987 को हुई। इसके पश्चात विश्वविद्यालय के परिसर का निर्माण मार्च 1990 में किया गया। विश्वविद्यालय का संपूर्ण परिसर 734 बीघा में विस्तृत रूप से फैला हुआ है, जिसमें से 413 बीघा में मुख्य भवन के साथ-साथ मुख्य मार्ग एवं उप मार्ग के साथ -साथ छायादार, फलदार, फूलदार एवं औषधीय महत्व के करीब 6000 पौधे व पेड़ लगाए हैं। वहीं करीब तीन सौ बीघा जमीन वर्तमान में खाली पड़ी है।

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