परेशानी / मकरेड़ा तालाब हुआ साफ, बिचड़ली में पसरी जलकुंभी

बिचड़ली में पसरी हुई जलकुंभी बिचड़ली में पसरी हुई जलकुंभी
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बिचड़ली में पसरी हुई जलकुंभीबिचड़ली में पसरी हुई जलकुंभी

  • अधिकारियों का कहना है कि तालाब किनारे निर्मित होने वाले दो एसटीपी (सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट) के शुरू होने के बाद इस तालाब का पानी भी स्वच्छ नजर आएगा

दैनिक भास्कर

Jun 01, 2020, 05:00 AM IST

अजमेर. लॉकडाउन में प्रकृति को राहत मिलने से बड़े बदलाव भी नजर आ रहे हैं। प्रदूषण में गिरावट आने के साथ नदियों और तालाबों में पानी साफ हुआ लेकिन इसे ब्यावर का दुर्भाग्य ही कहेंगे कि यहां स्थित एकमात्र बिचड़ली तालाब ही ऐसा है जिस पर लॉकडाउन का कोई असर नहीं हुआ, बल्कि जलकुंभी का जाल ऐसा फैला कि पूरे तालाब को ही इसने अपने आगोश में ले लिया। इसकी तुलना यदि समीप ही स्थित मकरेड़ा तालाब से की जाए तो यहां न सिर्फ पानी स्वच्छ हुआ बल्कि ग्रामीणों की आस भी बंधी है कि अब एक बार फिर इसका पानी सिंचाई के काम में आ सकेगा।
निकटवर्ती मकरेड़ा तालाब में विभिन्न औद्योगिक इकाईयों से निकलने वाले दूषित पानी जमा होने के कारण पिछले कुछ वर्षों में इस तालाब के पानी का कोई उपयोग नहीं हो पा रहा था। लॉकडाउन के दौरान फैक्ट्रियों से निकलने वाले केमिकल युक्त दूषित पानी के इसमें नहीं मिलने से इसका पानी साफ नजर आने लगा। साथ ही ग्रामीणों ने भी इसके पानी को फिर से सिंचाई योग्य बनाने की कवायद शुरू करने का निर्णय लिया। इसके लिए उनका मानना है कि केमिकल युक्त पानी पर यदि रोक लगे तो इस तालाब के पानी का फिर से उपयोग हो सके।
दूसरी ओर बिचड़ली तालाब की बात करें तो न तो प्रशासन ने और न ही जनता ने इसकी कभी सुध ली। हालात यह है कि लॉकडाउन पहले जहां इसमें थोड़ा बहुत पानी नजर आता था वहां भी जलकुंभी ने अपना जाल फैला लिया। तेजा मेला से पहले सुचारू व्यवस्था या जलकुंभी साफ करने के बहाने से ही अब तक नगर परिषद अब तक यहां लाखों रुपए खर्च कर चुकी है मगर नतीजा कुछ भी नहीं निकला। महज सात-आठ साल पहले पैदा हुई जलकुंभी को हटाने के नाम हर साल बजट भी मंजूर होता है मगर उसके सकारात्मक परिणाम नहीं निकलते।
इसी प्रकार गत तेजा मेले से पूर्व तत्कालीन आयुक्त सुखराम खोखर ने तालाब से कई टन जलकुंभी निकलवाकर तालाब की पाल को चौड़ा भी किया मगर धीरे-धीरे जलकुंभी ने फिर अपना जाल फैला लिया। एक्सपर्ट की मानें तो इस तालाब का कायाकल्प तभी हो सकता है जब इसमें गिरते गंदे पानी से निजात मिले। इसके लिए परिषद प्रशासन को सीवरेज प्रोजेक्ट के पूरा होने का इंतजार है। अधिकारियों का कहना है कि तालाब किनारे निर्मित होने वाले दो एसटीपी (सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट) के शुरू होने के बाद इस तालाब का पानी भी स्वच्छ नजर आएगा।

बिचड़ली तालाब में गिरने वाले नाले
    बाल मंदिर से शुरू होकर मेवाड़ी गेट होते हुए तालाब में
    मेवाड़ी गेट से शुरू होकर अंदरकोट होता हुआ बालाजी की खिड़की से तालाब में।
    आशापुरा माता मंदिर से अमरी का बाड़िया और वहां से प्रताप कॉलोनी होते हुए तालाब में।
    हाउसिंग बोर्ड विनोद नगर बाबा रामदेव मंदिर होता हुआ मेवाड़ी गेट नाले में मिल रहा।
    नेहरू गेट, विनोद नगर, जटिया कॉलोनी, सहित ऊपरी कॉलोनियों का पानी भी तालाब में जा रहा है।


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