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सफलता के लिए धैर्य जरूरी:मनीषा ने सरकारी सेवा में रहते RAS-2018 में हासिल की 32 वीं रैंक; श्वेता ने हाथ फ्रैक्चर होने के बाद भी नहीं मानी हार, पाई कामयाबी

अजमेर18 दिन पहले
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RAS-2018 भर्ती परीक्षा में अजमेर जिले के ग्राम बरना निवासी मनीषा चौधरी ने जहां 32 वीं रैंक हासिल की, वहीं पुराना शहर किशनगढ़ निवासी श्वेता दाधीच ने 143 वां स्थान हासिल किया। मनीषा ने जहां यह सफलता सरकारी सेवा में रहते हुए हासिल की, वहीं श्वेता ने हाथ फ्रेक्चर होने के बावजूद हार नहीं मानी और कामयाबी पाई। दोनों का ही कहना था कि सफलता के लिए धेर्ये जरूरी है और मेहनत व लगन से हर सपना पूरा किया जा सकता है।

परिवार व ग्रामीणों के साथ मनीषा
परिवार व ग्रामीणों के साथ मनीषा

सरकारी सेवा में रहते हुए मनीषा ने तैयारी की और मिली सफलता
बरना निवासी 25 वर्षीय मनीषा चौधरी ने स्कूलिंग शिक्षा ग्राम बरना व किशनगढ़ की स्कूल में ग्रहण की। जयपुर जाकर सरकारी परीक्षाओं की तैयारी में जुट गई। मनीषा बताती है कि वर्ष 2018 को सरकारी सेवा में चयन हो गया और उद्योग विभाग अजमेर में उद्योग प्रसार अधिकारी के रूप में पोस्टिंग मिली। गांव से 30 किलोमीटर दूर प्रतिदिन अपडाउन करने के बावजूद मनीषा ने सुबह, शाम, रात में पढ़ाई के लिए समय निकाला। आखिर सफलता मिल गई और आरएएस परीक्षा के पहले प्रयास में ही 32 वीं रैंक हासिल कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा लिया।
मनीषा के पिता बालूराम चौधरी राजकीय स्कूल काढ़ा में व्याख्याता हैं। दादा छोटूलाल एडीपी अभियाेजन से सेवानिवृत्त हैं। चारों बुआ सरकारी सेवा में हैं और चाचा फौजी। मनीषा की छोटा भाई जयंत चौधरी भी सरकारी परीक्षा की तैयारी कर रहा हैं। मां सोहनी देवी और दादी गृहिणी हैं। पूरा परिवार सरकारी सेवा में होने की वजह से मनीषा को तैयारी के लिए अच्छा प्लेटफॉर्म मिल गया। मनीषा बताती हैं कि प्रतिदिन पढ़ाई के लिए समय निकाला जा सकता हैं। सुबह व रात का वक्त काफी हैं। पढ़ाई के लिए धैर्य रखें और खुद पर भरोसा रखें। सफलता अपने आप मिलेगी।

परिवार के साथ श्वेता
परिवार के साथ श्वेता

परीक्षा आई तब एक्सीडेंट में हाथ फ्रेक्चर हो गया, डिप्रेशन में चली गई, परिवार का मिला सहयोग
किशनगढ़ के पुराना शहर निवासी 28 वर्षीय श्वेता दाधीच की दसवीं की पढ़ाई किशनगढ़ में हुई। स्कूल लेवल पर हैंडबॉल में अंडर 19 और वनस्थली विद्यापीठ की ओर से स्टेट खेल चुकी हैं। इंफोर्मेशन टेक्नोलोजी में बीटेक किया। श्वेता प्रतिदिन छह से आठ घंटे रेगुलर पढ़ाई करती रही। इस दौरान कत्थक में छह साल की डिग्री ली। पहली बार 2015 में आरएएस की परीक्षा दी लेकिन सफलता नहीं मिली तो फिर से जयपुर जाकर तैयारी में जुट गई।

श्वेता बताती है कि 2018 दिसंबर में परीक्षा से ठीक पहले दुर्घटना में हाथ फ्रेक्चर हो गया। परीक्षा सिर पर और लिखने की स्थिती में नहीं थी। एक महीने डिप्रेशन में चली गई। लेकिन परिजनाें ने हिम्मत बंधाई और कहा कि हार नहीं माननी। फिर लाइब्रेरी में बैठकर घंटाें तैयारी की। आखिर परीक्षा स्थगित हो गई। इसके बावजूद तैयारी जारी रखी और सफलता मिल गई।

श्वेता ने कहा कि पूरे परिवार ने हमेशा आगे बढ़ने में योगदान दिया और हर वक्त सहयोग किया। सफलता के लिए धैर्य जरूरी है, असफलता से घबराएं नहीं,यह भी जीवन का हिस्सा होती है। बहुत कम लोग एक बार में सफल होते हैं। असफलता को स्वीकार कर उसमें कैसे सुधार लाना है, यह सोचकर आगे बढ़ना चाहिए।

उनके दादा रामस्वरूप काकड़ा सरकारी स्कूल में अध्यापक थे। उन्होंने पोती को अफसर बनाने की ठान ली। पिता राजेश शर्मा माध्यमिक शिक्षा बोर्ड में हैं और माता माधवीलता दाधीच सरकारी स्कूल में व्याख्याता हैं। छोटा भाई आशीष प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहा हैं। चाचा राकेश काकड़ा नगर परिषद के पूर्व उपसभापति व पार्षद रह चुके हैं, जबकि चाची ममता काकड़ा वर्तमान में पार्षद हैं।

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