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श्रमिकों को मिलेगी राहत:फिर से रफ्तार पकडे़ेंगे मोबाइल मेडिकल यूनिट के पहिए;  5 जुलाई से होगी शुरूआत, सिलकोसिस जांच के लिए पहला शिविर जवाजा CHC में लगेगा

अजमेरएक वर्ष पहले
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MMU की सार सम्भाल करते कर्मचारी। - Dainik Bhaskar
MMU की सार सम्भाल करते कर्मचारी।

खनन और पत्थर पिसाई से जुडे श्रमिकों के लिए राहत भरी खबर है कि लंबे अर्से से बंद पड़ी मोबाइल मेडिकल यूनिट (MMU) फिर से फील्ड में दौड़ेगी। ऐसे में शिविरों के माध्यम से संदिग्ध सिलिकोसिस श्रमिकों की समय पर जांच हो सकेगी। इस वैन का संचालन 5 जुलाई से फिर होने लगेगा और जवाजा के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र(CHC) में पहला शिविर होगा। संदिग्ध सिलिकोसिस श्रमिकों की शिविर के दौरान ही वैन में एक्सरे किए जाएंगे।

शिविर को लेकर ब्यावर अस्पताल प्रबंधन द्वारा अलग-अलग लैब के लिए विशेषज्ञों को चार्ज भी दे दिया गया है। MMU के एक्सरे का चार्ज रेडियोलॉजिस्ट धमेंद्र सोनी को दिया गया है तो वहीं लैब का चार्ज सीनियर लैब टैक्निशियन विनोद जोशी को दिया गया है। MMU को चलाने और देखभाल के लिए चालक बुधाराम को चार्ज दिया गया है।

गौरतलब है कि कोरोना के कारण पिछले करीब एक साल से भी अधिक समय से यह मोबाइल मेडिकल यूनिट ब्यावर के मदर चाइल्ड विंग परिसर में खड़ी है। इसके संचालन के आदेश मिलने के साथ ही वैन को शिविर के लिए तैयार किया गया और स्टॉफ ने इस वैन के उपकरणों की सार संभाल की। कुछ उपकरणों को बदला भी जाएगा ताकि शिविर के दौरान मरीजों को परेशानी ना हो।

अस्पताल के चक्कर से मिलेगी निजात
खान में पत्थर तोड़ने या मकान निर्माण से जुड़े ऐसे श्रमिक जो अभी भी फैक्ट्रियों, खानों और पत्थर की घिसाई जैसे कार्यों से जुड़े हैं, उन्हें जांच करवाने के लिए अब अस्पताल के चक्कर काटने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। ऐसे श्रमिकों को उनकी फैक्ट्री, खान या कार्यस्थल के समीप जाकर ही मेडिकल टीम जांच करेगी।

अगर उसमें सिलिकोसिस के लक्षण दिखाई दिए तो उसे जिला अस्पताल या मेडिकल कॉलेज के न्यूमोकोनाेसिस बोर्ड के पास जांच और प्रमाण पत्र के लिए रैफर करेगी। इससे इन श्रमिकों की मजदूरी भी खराब नहीं होगी और इनकी जांच हो सकेगी। इसके लिए सिलिकोसिस नियंत्रण के तहत वित्तपोषित मोबाइल मेडिकल यूनिट का संचालन फिर से शुरू होगा।

अजमेर व नागौर भी जाती थी

ब्यावर डीटीओ के अधीन संचलित होने वाली मोबाइल मेडिकल यूनिट हर सोमवार को अजमेर और हर शुक्रवार को नागौर जिले के श्रमिकों की जांच के लिए जाती थी। लेकिन लंबे समय से यह वैन मदर चाइल्ड विंग के सामने खड़ी है। फिलहाल इस वैन के प्रोग्राम अजमेर जिले के लिए ही आया है।

माइनिंग और मिनरल श्रमिकों पर फोकस
MMU से उन श्रमिकों पर फोकस किया जाएगा जो महीनों से अपने परिवार समेत फैक्ट्री परिसर में ही निवास भी करते हैं और वहीं मजदूरी भी करते हैं। इन श्रमिकों को जांच और परामर्श देने के मकसद से इस कैंप लगाया जाता है। इसके साथ ही मगरा क्षेत्र के उन माइनिंग क्षेत्रों में भी नजर रहेगी जहां पत्थरों की सूखी और बिना सुरक्षा के कटिंग और घिसाई की जाती है।

(रिपोर्ट : मनीष शर्मा)

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