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होटल इंडस्ट्री पर संकट:शहर के दो सौ से अधिक होटल व रिसोर्ट सूने, बैंक की किश्तें चुकाना भी मुश्किल

अजमेर23 दिन पहलेलेखक: भीकम शर्मा
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पर्यटकों की आवक बंद होने के कारण सूने पड़े पुष्कर के होटल-रिसोर्ट। - Dainik Bhaskar
पर्यटकों की आवक बंद होने के कारण सूने पड़े पुष्कर के होटल-रिसोर्ट।
  • सैकड़ों कर्मचारी बेरोजगार, बिल भुगतान अटके

धार्मिक व पर्यटन नगरी पुष्कर में कोरोना का सबसे बड़ा साइड इफैक्ट होटल इंडस्ट्री पर पड़ा है। लाखों-करोड़ों रुपए की लागत से निर्मित होटल, गेेस्ट हाऊस व रिसोर्ट सूने हैं। सैकड़ों कर्मचारी बेरोजगार होकर घरों में बैठे हैं। इनकम शून्य होने के कारण मालिकों को बिजली-पानी के बिल व बैंकों की मासिक किश्तें भारी पड़ रही हैं। होटल कारोबारियों के लिए मुनाफा कमाना ताे दूर रहा, लागत खर्च भी नहीं जुटा पा रहे हैं।

पुष्कर एवं पुष्कर के पैराफेरी क्षेत्र के गांवों में छोटे-बड़े 200 से अधिक होटल, गेस्ट हाऊस व रिसोर्ट हैं। इनमें से करीब 50 होटल व रिसोर्ट तो ऐसे हैं, जिसमें करोड़ों रुपए निवेश हो रखे हैं। लाखों रुपए तो हर माह केवल मेंटीनेंस पर खर्च हो रहे हैं। ये सभी होटल-रिसोर्ट बीते सवा साल से बंद हैं। पिछले मार्च माह से देशी-विदेशी पर्यटकों की आवक बंद है।

हालांकि गत वर्ष छह महिने के लंबे लॉकडाउन के बाद 6 सितंबर को पुष्कर में विश्व प्रसिद्ध ब्रह्मा मंदिर के खुलने से श्रद्धालुओं व घरेलू पर्यटकों की आवक शुरू हुई, जिससे होटल कारोबारियों को हल्की राहत मिली थी। कोरोना की दूसरी लहर के कारण गत 16 अप्रैल से वापस मंदिर बंद होने के साथ ही श्रद्धालु-पर्यटकों की आवक थम गई है। नतीजतन पुष्कर के सभी होटल व रिसोर्ट में फिर से सन्नाटा पसर गया। इनकम नहीं होने के कारण होटल में काम करने वाले अनावश्यक श्रमिकों को मालिकों ने नौकरी से हटा दिया है। आर्थिक संकट से जूझ रहे होटल व्यवसायी लगातार सरकार से पानी-बिजली के बिलों व बैंकों की ईएमआई में रियायत के साथ-साथ आर्थिक पैकेज की मांग कर रहे है। लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही है।

इनका कहना है

देश के सबसे बड़े उद्योगों में आतिथ्य उद्योग भी शामिल है। लॉकडाउन के कारण देश भर में होटल कारोबारियों को 90 हजार करोड़ का नुकसान हुआ है तथा 10 लाख कर्मचारी बेरोजगार हुए हैं। होटल इंडस्ट्री जीडीपी में 8 से 10 प्रतिशत सहयोग दे रही है। ऐसे में सरकार को आर्थिक संकट से जूझ रही होटल इंडस्ट्री के लिए विशेष आर्थिक पैकेज मंजूर करना चाहिए।’
-सुभाष टहलियानी, प्रबंधक, अवतार रिसोर्ट

लॉकडाउन के कारण पुष्कर में यात्री-पर्यटकों आवक बंद है। सभी होटल-रिसोर्ट खाली हैं। मेंटीनेंस, स्टाफ सैलेरी, पानी-बिजली के बिल और ईएमआई सहित लाखों रुपए के व्यय जारी है। आमदनी नहीं होने के कारण घर के खर्चे भी निकालना भारी पड़ रहा है। सरकार को चाहिए कि पानी-बिजली के बिलों में स्थायी शुल्क माफ करें तथा बैंक की ईएमआई में राहत दे। साथ ही होटल व्यापारियों के लिए विशेष आर्थिक पैकेज मंजूर करें।’
-राजेंद्र सिंह राठौड़, प्रबंधक, पुष्कर फोर्ट

कोरोना महामारी के कारण पुष्कर का पर्यटन व्यवसाय पूरी तरह से चौपट हो गया है तथा व्यवसायी आर्थिक तंगी से जूझ रहे है। होटले बंद होने के बावजूद प्रतिमाह 5 हजार से 5 लाख रुपए तक के बिजली के बिल आ रहे है। स्थायी शुल्क समेत अन्य शुल्क लगा कर आर्थिक शोषण किया जा रहा है। कोरोनाकाल तक बैंक ऋण की किश्तों में छूट व ब्याज माफ करना चाहिए। कोरोनाकाल के बाद होटल व्यवसाय को पुनर्जीवित करने के लिए सरकार की ओर से विशेष कार्य योजना तैयार करनी चाहिए।
-रघु पारीक, अध्यक्ष, होटल ऑनर्स एसोसिएशन पुष्कर

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