पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

हिंदी है मेरा अभिमान:हिंदी से मेरी पहचान, अजयमेरू प्रैस क्लब की साहित्य धारा में कवियों ने किया हिंदी का गुणगान

अजमेर7 दिन पहले
  • कॉपी लिंक

हिन्दी दिवस की पूर्व वेला पर रविवार को आयोजित हुई अजयमेरू प्रैस क्लब की मासिक साहित्यिक संगोष्ठी ‘साहित्य धारा‘ में गीत, गज़ल और कविताओं के माध्यम से नगर के वरिष्ठ और युवा कवियों ने हिन्दी भाषा की विशेषताओं का गुणगान करते हुए अपने दैनन्दिनी व्यवहार में हिन्दी का अधिकाधिक प्रयोग करने का संकल्प लिया।

संयोजक उमेश कुमार चौरसिया ने आरंभ में कहा कि हिन्दी दिवस का अर्थ अंग्रेजी से वैर बढ़ाना नहीं वरन अपनी भाषा को अपनाते हुए विस्तार देकर प्रबल-सशक्त बनाना है। गोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे चिकित्सा अधिकारी व कवि डाॅ. लाल थदानी ने चिकित्सकों की पीड़ा को उकेरते हुए ‘मैं डाॅक्टर हूं भगवान नहीं इंसान हूं‘ रचना सुनाई।

गीतकार गौरव दुबे सुरीले गीत ‘संबंध बनाने की खातिर अनुबंध बनाने पड़ते हैं‘ और गज़लगो तस्दीक अहमद की ‘जब भी कहीं किसी से मुलाकात करो हिंदी जुबां में ही सदा बात करो‘ व ‘जब से देखा तुमको सनम पत्थर जैसे हो गए हम‘ ने खूब दाद बटोरी। गोष्ठी का सरस संचालन कर रहे गोविन्द भारद्वाज की रचना ‘सितारे ही सितारे हैं गगन के आशियाने में‘ ने बड़ा प्रभावित किया। डाॅ. पूनम पाण्डे के गीत ‘हिंदी कह गूंज अनुगूंज है सकल विश्व में‘, सैयद सादिक़ अली ‘ज़की‘ के गीत ‘हम हैं कर्मवीर डोल रहा है धीर‘ और हिन्दी के महत्व और गुणों को दर्शाते उमेश कुमार चौरसिया के गीत ‘हिन्दी से मेरी पहचान हिन्दी है मेरा अभिमान, स्नेह एकता की संवाहक हिन्दी से है हिन्दुस्तान‘ को सभी ने सराहा।

देवदत्त शर्मा ने ‘हिंदी है भारत के माथे की बिंदी‘, डाॅ. विनीता अशित जैन ने ‘सबका सम्मान सिखाती हिंदी‘, लखनलाल माहेश्वरी ने ‘हिन्दी जन जन की भाषा‘, भावना शर्मा ने ‘हिंदी से हिंदी विस्मृत हो जाएगी ये पीड़ा कैसे सही जाएगी‘, सोनू सिंहल ने ‘हिन्दी राजभाषा से हैं हम‘, डाॅ. केके शर्मा ने ‘मुझे गर्व है इसपे मेरी भाषा हिंदी‘, लता शर्मा ने ‘अभिव्यक्ति सिखाती है भाषा‘, आरजे रेखा भाटिया ने ‘हिंदी में मुस्काता हिन्दुस्तान‘, संदीप पाण्डे ने ‘देशप्रेम की कड़ी है हिन्दी‘, कृष्ण कुमार शर्मा ने ‘जनजन की भाषा है हिंदी‘ रचनाओं के द्वारा हिन्दी की श्रेष्ठता को बताया।

रामावतार यादव ‘सहर‘ ने गज़ल ‘तेरे जहान के लोगों की रहनुमाई‘, डाॅ. महिमा श्रीवास्तव ने ‘ऐसा मिले वरदान‘, पुष्पा क्षेत्रपाल ने ‘फिर से रामराज्य आ जाए‘, डाॅ. तेजसिंह कछवाहा ने ‘तेरा प्यार पनप रहा है‘, आकार अग्रवाल ने ‘मीडिल क्लास कविता‘, कुलदीप खन्ना ने ‘साहित्यधारा सबका मेल कराती आत्मीयता प्रेम बढ़ाती‘, योबी जाॅर्ज ने ‘मैंने झूठ को दौड़ते देखा‘ काव्य रचनाएं और नरेन्द्र माथुर ने ‘मास्क की पीड़ा‘ व्यंग्य सुनाया। गोष्ठी में अब्दुल सलाम कुरैशी और अकलेश जैन का सहयोग रहा।

खबरें और भी हैं...