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फैक्ट्री:अब रोज एक एलएचबी कोच तैयार कर रहा कैरिज कारखाना

अजमेर13 दिन पहले
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अजमेर कैरिज कारखाने में अब रोजाना एक एलएचबी कोच तैयार किया जा रहा है। एलएचबी यानी लिंक हॉफमान बुश तकनीक अपर आधारित इस कोच में रेल हादसों की आशंका कम रहती है, साथ ही तेज रफ्तार या ब्रेक लगने पर ट्रेल हिचकाेले भी नहीं खाते हैं।

चार साल पहले कैरिज कारखाने को प्रतिमाह एक-दो कोच मरम्मत करने का लक्ष्य दिया गया था, मगर समय के साथ-साथ कारखाने का लक्ष्य बढ़ाया गया। इसके बाद कारखाने को 13 और इसके बाद 18 कोच मरम्मत करने का लक्ष्य दिया गया।

अब सितंबर से कारखाने को 27 कोच हर महीने मरम्मत करने का लक्ष्य दिया गया है, कारखाना कर्मियों ने यह काम प्रारंभ कर दिया है। महीने में चार दिन का अवकाश रने के बाद औसतन एक कोच रोजाना मरम्मत हो रहा है। अजमेर में मरम्मत हुए कोच देश के विभिन्न रेल मंडलों में भेजे जाते हैं, जो कि एक्सप्रेस गाड़ियों में दौड़ते हैं।

यह हैं एलएचबी कोच | रेलवे ने यात्रा सुरक्षा मानकों को बेहतर बनाने के लिए भारतीय रेलवे लिंक हॉफमान बुश (एलएचबी) डिजाइन कोच का उपयोग करने और पुराने आईसीएफ डिजाइन कोच के उत्पादन को रोकने का फैसला किया था। पुराने डिजाइन के कोच की तुलना में, एलएचबी डिजाइन कोच वजन में हल्का है. एलएचबी कोच के पास बेहतर ढुलाई के साथ-साथ हाई स्पीड क्षमता भी है। एलएचबी कोच में एंटी-क्लाइम्बिंग जैसी विशेषता है, ताकि टकराव की स्थिति में कोच एक-दूसरे पर न चढ़ सकें।

अजमेर रेल मंडल की अधिकांश ट्रेनों में एलएचबी कोच

अजमेर रेल मंडल से संचालित और यहां से गुजरने वाली अधिकांश ट्रेनों में एलएचबी कोच लगाए जा चुके है। लॉक डाउन के पहले अजमेर से संचालित एवं गुजरने वाली करीब 65 गाड़ियों में एलएचबी कोच लगाए हुए थे। मौजूदा समय में संचालित सभी स्पेशल ट्रेनों में एलएचबी कोच लगाए हुए है।

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