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एजुकेशन:अब इंजीनियरिंग काॅलेजाें में स्थायी प्राचार्याें की कमी जल्द खत्म होगी

अजमेर10 दिन पहले
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  • पिछले 8 साल से नहीं हैं काॅलेजाें में स्थायी प्राचार्य, प्राचार्य भर्ती प्रक्रिया शुरू, 50 से ज्यादा आवेदन

(सादिक अली) प्रदेश के 11 इंजीनियरिंग काॅलेजाें में स्थायी प्राचार्याें का सूखा अब जल्द खत्म हाेने की उम्मीद है। इस दिशा में काम शुरू हाे गया है। तकनीकी शिक्षा विभाग ने प्राचार्याें की नियुक्ति के लिए प्रक्रिया शुरू की थी। 11 काॅलेजाें में प्राचार्य बनने के लिए 50 से ज्यादा आवेदन मिले हैं। 6 अगस्त काे आवेदनाें की स्क्रूटनी जयपुर में की जाएगी।
प्रदेश में कुल 11 इंजीनियरिंग काॅलेज हैं, जाे कि राज्य सरकार के संस्थान के ताैर पर संचालित किए जाते हैं। पहले इन सभी काॅलेजाें काे राजकीय काॅलेज हाेने का दर्जा दिया गया था। करीब एक साल पहले ही इन काॅलेजाें से राजकीय शब्द हटाया गया। लेकिन राजकीय काॅलेज हाेने के दाैरान भी इन काॅलेजाें में वर्षाें तक स्थायी प्राचार्य नहीं थे।

सूत्राें का कहना है कि तकरीबन 8 साल से किसी भी काॅलेज में स्थायी प्राचार्य नहीं हैं। बीच में एक दाे काॅलेज में लगाए भी गए थे, लेकिन वे ज्यादा समय नहीं रहे। यानी 8 साल से यह काॅलेज प्रभारी प्राचार्याें के भराेसे ही संचालित हाे रहे थे। लेकिन अब इन काॅलेजाें काे स्थायी प्राचार्य देने की कवायद शुरू की गई है।

प्रभारी प्राचार्याें ने भी दिलाई उपलब्धियां
खास बात यह है कि प्रभारी प्राचार्याें के भराेसे संचालित अजमेर के दाेनाें इंजीनियरिंग काॅलेजाें में पिछले एक साल में कई उपलब्धियां जुड़ी है। माखुपुरा स्थित महिला इंजीनियरिंग काॅलेज में डाॅ. जेके डीगवाल ने एक साल में काॅलेज काे गति दी है। उन्हाेंने टैक्यूप 3 के बंद पड़े प्राेजेक्ट काे शुरू किया और इस तेजी से किया कि फिलहाल यह प्रदेश के सभी 11 काॅलजाें में सबसे आगे है। टैक्यूप के तहत ही रिचर्स के संसाधन जुटाए।

इसके अलावा एनाकाेई चैंबर केवल इसी काॅलेज में बना है। यह एंटिना मैजेरमेंट के काम आता है। एकमात्र काॅलेज एंटिना मैजरमेंट की रिचर्स लैब वाला प्रदेश में यह एकमात्र काॅलेज है। इलेक्ट्राॅनिक्स एंड कम्यूनिकेशन में पीएचडी रिसर्च सेंटर भी इसी एक साल में यहां शुरू हुआ। इलेक्ट्रीकल इंजीनियर में भी रिसर्च सेंटर इसी सप्ताह शुरू हाेगा।

प्रदेश में भरतपुर इंजीनियरिंग काॅलेज के बाद इसी काॅलेज में दाे नए काेर्स आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस और आईओटी शुरू किए गए हैं। प्लेसमेंट 20 प्रतिशत से बढ़कर 35 प्रतिशत तक पहुंचा। 5 इंडस्ट्रीज से एमओयू किए गए हैं। इसी तरह बड़लिया स्थित इंजीनियरिंग काॅलेज डाॅ. उमाशंकर माेदानी के प्रभारी प्राचार्य बनने के बाद प्रदेश का एकमात्र सरकारी काॅलेज बना जिसे सीआईआई सर्वे में सिल्वर रैंक हासिल हुई।

यूनिवर्सिटी की क्यूआईवी ग्रेडिंग में भी ए ग्रेड इस काॅलेज काे मिली। 6 इंडस्ट्रीज से एमओयू किया गया। भामाशाहाें काे काॅलेज से जाेड़ा, जिनके सहयाेग से काॅलेज में जल मंदिर का निर्माण, वाटर ट्रीटमेंट प्यूरीफायर सिस्टम लगा। एक लाख से ज्यादा का नकद आर्थिक सहयाेग भी मिला और इसी काॅलेज काे इनकम टैक्स डिपार्टमेंट से एटीजी भी मिली है।

आवेदनाें की स्क्रूटनी 6 काे हाेगी
जानकारी के अनुसार स्थायी प्राचार्य बनने के लिए 50 से ज्यादा आवेदन स्क्रूटनी कमेटी के पास पहुंचे हैं। इनमें से कुछ उम्मीदवार ऐसे भी हैं, जिन्हाेंने एक से ज्यादा आवेदन किए हैं। सूत्राें ने बताया कि 6 अगस्त काे जयपुर में स्क्रूटनी कमेटी की बैठक हाेगी। इस बैठक में आवेदनाें की जांच की जाएगी। याेग्य उम्मीदवाराें काे इसके बाद आगे की प्रक्रिया के लिए आमंत्रित किया जाएगा। यानी 6 अगस्त से स्थायी प्राचार्याें की नियुक्ति की कवायद में तेजी आएगी।

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