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दूसरी लहर पीक की ओर:ऑक्सीजन लेवल 67; फिर भी बुजुर्ग काे दाे घंटे टरकाते रहे इधर-उधर

अजमेरएक महीने पहले
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रात 10.48 बजे : जेएलएन में ऑक्सीजन प्लांट के बाहर परिजनों का जमावड़ा - Dainik Bhaskar
रात 10.48 बजे : जेएलएन में ऑक्सीजन प्लांट के बाहर परिजनों का जमावड़ा
  • सेटेलाइट, जेएलएन, पंचशील अस्पतालों के बीच परिजन मरीज काे लिए भटकते रहे

संभाग के सबसे बड़े जेएलएन अस्पताल में कोविड के गंभीर मरीजों काे भर्ती करने में काेई काेताही नहीं बरतने के जिला प्रशासन भले ही बड़े दावे कर रहा हाे लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। शुक्रवार देर शाम 6 बजे श्रीनगर से 65 वर्षीय बुजुर्ग को परिजन गंभीर अवस्था में अस्पताल लेकर पहुंचे।

मरीज के पुत्र ने ‘भास्कर’ काे बताया कि श्रीनगर सीएचसी में दिखाया गया था। ऑक्सीजन की जांच की तो पता चला कि सेचुरेशन 67 आ रहा है। तुरंत परिजनों को अजमेर जवाहरलाल नेहरू अस्पताल ले जाने के लिए कहा।

परिजन ऑक्सीजन वाली एंबुलेंस में बुजुर्ग को लेकर पहले सेटेलाइट अस्पताल पहुंचे जहां से उन्हें जेएलएन जाने के लिए कहा गया। मरीज काे लेकर परिजन जेएलएन आए। यहां चिकित्सकों ने कहा कि यहां पर पलंग पर ऑक्सीजन की व्यवस्था नहीं है इस कारण उन्हें पंचशील के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाएं। परेशान परिजन जैसे तैसे पंचशील पहुंचे।

हालत गंभीर हाेने से डाॅक्टराें ने जेएलएन रैफर किया

परिजनों ने जनप्रतिनिधियों से फोन करवाना शुरू किया, आखिरकार बुजुर्ग को जेएलएन में एडमिट कर लिया गया। हैरान करने वाली बात यह है कि प्रिंसिपल के निर्देश के बावजूद रेजीडेंट ने परिजनों को कहा कि इस पर लिखें कि यहां पर ऑक्सीजन की व्यवस्था नहीं है, अपने रिस्क पर भर्ती कर रहे हैं। लेकिन परिजनों ने लिखने से साफ मना कर दिया।

वहीं, देर शाम जिला प्रशासन की ओर से जारी की गई सूची में जेएलएन में 556 मरीजों को भर्ती दिखाया गया है। इसे आंकड़ों के मुताबिक जेएलएन की क्षमता 581 बेड की है। इस हिसाब से बुजुर्ग मरीज काे भर्ती करने के बावजूद 25 पलंग मरीजों के लिए खाली हैं। यही स्थिति सेटेलाइट की है। वहां 70 मरीजों की व्यवस्था की गई है, 35 मरीज भर्ती हैं।

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