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प्रभात को मिला लाखों रुपए का पैकेज:जिस हाेटल में खाना सर्व किया, उसी में 15 साल बाद जीएम बने प्रभात

अजमेर15 दिन पहलेलेखक: अतुल सिंह
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  • मामूली वेतन पर काम करने वाले प्रभात को अब मिल रहा है लाखों रुपए का पैकेज

अगर हौसले बुलंद हों तो फर्श पर बैठे इंसान को अर्श तक पहुंचने से कोई नहीं रोक सकता। प्रदेश के नामचीन हाेटलाें में से एक मानसिंह पैलेस के नए जीएम प्रभात रंजन सिंह के संघर्ष की कहानी ऐसी ही है। प्रभात करीब पंद्रह साल पहले जिस हाेटल ग्रुप में गेस्ट का स्वागत करने से लेकर खाना सर्व करने तक का काम करते थे, वहीं आज जनरल मैनेजर हैं। 12वीं पास करने के बाद प्रभात ने अपने करियर की शुरूआत की थी।

फिर हाेटल मैनेजमेंट की डिग्री हासिल कर ट्रेनी के ताैर पर बहुत कम वेतन पर स्टार रेटिंग हाेटल्स से सफर शुरू किया। जिस हाेटल में कभी खिदमतगार (स्टीवर्ड) जैसे छाेटे पद पर थे, आज उसी ग्रुप के हाेटल में जीएम बन गए हैं।

छुट्टी के दिन भी काम में व्यस्त सैलेरी पैकेज अब लाखाें में है औैर काम करने का जज्बा ऐसा कि प्रभात छुट्टी के दिन भी काम में व्यस्त नजर आते हैं। प्रभात ने कहा कि काेराेनाकाल में नए चैलेंज हैं, लेकिन नामुमकिन कुछ भी नहीं। यह संकटकाल खत्म हाेने के साथ ही हाेटल एंड टूरिज्म इंडस्ट्री में बूम आएगा। जितना नुकसान हुआ है, उससे कई गुणा मुनाफा हाेगा।

देशी-विदेशी सैलानियों की संख्या में हाेने लगा इजाफा

हाेटल ऑपरेशनल ट्रेनी के ताैर पर प्रभात रंजन ने जयपुर के मानसिंह पैलेस में कॅरिअर की शुरुआत की थी। इसके बाद करीब दस साल यानी 2010 तक अजमेर के मानसिंह पैलेस में फूड एंड बैवरेज मैनेजर के ताैर पर व्यवस्थाएं संभाली।

इस दाैरान प्रभात ने कई फूड फेस्टिवल कराए। उनके हाथ से बने व्यंजन के जायके की चर्चा देशी-विदेशी सैलानियाें की जुबान पर भी होने लगी। प्रभात ने यहां कश्मीरी फूड फेस्टिवल, थाई फूड फेस्टिवल, ढाबा फेस्टिवल, डिफरेंट क्यूजीन फेस्टिवल जैसे कई ऐसे सफल आयाेजन किए, जिसमें क्षेत्र के लाेगाें काे देश-दुनिया के जायकेदार व्यंजन यहीं पराेसे गए।

लाेगाें ने प्रभात के इन प्रयासाें काे खूब सराहा। इससे पर्यटन काे खूब बढ़ावा मिलने लगा। प्रभात ने कहा कि इस तरह के आयाेजन सैलानियाें काे आकर्षित करते हैं। इस दाैरान इनकी संख्या में काफी इजाफा हुआ।

आसान नहीं था जीएम तक सफर, कई बाधाएं लेकिन कदम बढ़ते चले गए

प्रभात बताते हैं कि किसी हाेटल ग्रुप में छाेटी सी शुरुआत से शीर्ष पदाें पर पहुंचना इतना आसान नहीं है। मानसिंह के अलावा कई बड़े हाेटल ग्रुप्स में बताैर हाेटल ऑपरेशन ट्रेनी, फूड एंड बैवरेज मैनेजर, रेजिडेंट मैनेजर, सैल्स मैनेजर, जनरल मैनेजर औप वीपी जैसे पदाें पर उन्होंने सेवाएं दीं। इस दाैरान कई बाधाएं आई, लेकिन कदम डगमगाए नहीं औैर बढ़ते चले गए।

काम के लिए कभी फटकार ताे कभी थपथपाई पीठ प्रभात ने कहा कि आज जिस हाेटल में जीएम हूं, कभी यहीं जीएम ने काम काे लेकर फटकार भी लगाई ताे कई बार पीठ थपथपाई। सीखने की लगन ऐसी थी कि हर फटकार कुछ न कुछ सुधार करती चली गई, और आज इस मुकाम पर पहुंच गया। प्रभात ने युवाओं काे संदेश देते हुए कहा कि काेई भी काम छाेटा या बढ़ा नहीं हाेता, मेहनत सही दिशा में हो, तो रंग जरूर लाती है। धैर्य रखें तो एक दिन मुकाम जरूर हासिल हाेगा।

​​​​​​​काेराेनाकाल में पर्यटन काे बढ़ाना है सबसे बड़ा चैलेंज, कई बदलाव हैं जरूरी जीएम प्रभात रंजन कहते हैं कि काेराेना काल में पर्यटन काे बढ़ाना सबसे बड़ा चैलेंज है, लेकिन नामुमकिन नहीं। हाेटल की पूरी टीम के साथ इसी दिशा में काम किया जा रहा है।

नए बदलाव हैं, रेस्तरां में खाने की क्वालिटी से लेकर रूम फैसेलिटी तक में नयापन लाया जा रहा है। नई जनरेशन काे आकर्षित करने के लिए तरह-तरह के फेस्टिवल प्लान किए गए हैं। काेराेना गाइडलाइन की पालना के साथ आयाेजित किया जाएगा।

प्रभात की सीख बदल सकती है जिंदगी

  • काम काेई भी छाेटा बड़ा नहीं हाेता, जाे भी काम मिले उसे पूरी मेहनत के साथ करें।
  • धैर्य रखें, जल्दबाजी नहीं करें। फिर एक दिन जरूर आपका हाेगा।

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