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इस साल होगा पुष्कर पशु मेला:5 से 19 नवम्बर तक प्रस्तावित, कोरोना गाइड लाइन की पालना होगी जरूरी; प्रशासन ने शुरू की तैयारी, कार्यक्रम अभी तय नहीं

अजमेरएक महीने पहले
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सिंबोलिक इमेज। - Dainik Bhaskar
सिंबोलिक इमेज।

अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त पुष्कर पशु मेले का इस साल आयोजन होगा। काेराेना महामारी के चलते गत साल मेले का आयोजन नहीं हुआ था, लेकिन इस बार मेले के आयोजन की स्वीकृति मिल चुकी है। मेले में क्या कार्यक्रम होंगे और कैसे, फिलहाल यह तय नहीं है। प्रशासन ने इसके लिए कवायद शुरू कर दी है। पुष्कर में पशु मेला 5 से 19 नवम्बर तक प्रस्तावित है।

मेले के आयोजक पशुपालन विभाग के संयुक्त निदेशक डॉ. प्रफुल्ल माथुर ने बताया कि सरकार की ओर से कोरोना गाइड लाइन के अनुरूप मेले की स्वीकृति जारी कर दी है। मेला आयोजन के लिए पुष्कर मेला समिति बनी हुई है और उसके अध्यक्ष जिला कलेक्टर है। मेले में क्या कार्यक्रम होंगे और कैसे होंगे। इसके लिए विचार विमर्श कर निर्णय किया जाएगा।

यह जारी किया गया है आदेश
यह जारी किया गया है आदेश

यह जारी हुई स्वीकृति

पशुपालन विभाग की शासन सचिव डॉ आरुषि मलिक ने इस संबंध में आदेश जारी कर बताया कि जिला कलेक्टर के कार्यालय से 8 अक्टूबर 2021 को जारी पत्र में उल्लेख किया गया है कि राज्य सरकार की मंशा के अनुरूप पशुपालकों के हितों को ध्यान में रखते हुए पुष्कर में पशु हाट मेले का आयोजन किया जा सकता है। संयुक्त निदेशक पशुपालन विभाग अजमेर द्वारा 12 अक्टूबर 2021 के माध्यम से मेला कार्यक्रमों का अनुमोदन चाहा गया। कोविड-19 के बचाव व नियंत्रण के लिए गृह विभाग की 11 अक्टूबर 2021 के आदेश द्वारा जारी त्रिस्तरीय जन अनुशासन दिशा निर्देशों के मुताबिक जिला प्रशासन द्वारा पालना करवाए जाने पर श्री पुष्कर पशु मेला 2021 के आयोजन की स्वीकृति प्रदान की गई है। पशुपालन विभाग से संबंधित समस्त कार्यक्रम व गतिविधियां राजस्थान सरकार के 11 अक्टूबर के आदेश के अधीन आयोजित की जाएगी।

पुष्कर मेले में ऐसे होती है प्रतियोगिताएं-फाइल फोटो
पुष्कर मेले में ऐसे होती है प्रतियोगिताएं-फाइल फोटो

तीन चरणों में होता है पुष्कर मेला

पुष्कर का 15 दिवसीय मेला तीन चरणों में होता है। पहला चरण पशु मेला दीपावली के दूसरे दिन से शुरू होता है। इसी दिन से पशु व पशुपालकों की आवक शुरू हो जाती है। दूसरा चरण प्रशासनिक स्तर पर कार्तिक शुक्ल गोपाष्टमी से शुरू होता है। इस दिन जिला कलेक्टर मेला स्टेडियम में ध्वजारोहण कर मेले का विधिवत आगाज करते हैं।

इस दिन से खेलकूद व पशु प्रतियोगिता एवं रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम शुरू होते है। तीसरा और अंतिम चरण के तहत धार्मिक मेला देव उठनी एकादशी को शुरू होता है। पांच दिवसीय धार्मिक मेले का समापन कार्तिक पूर्णिमा के मौके पर होने वाले महास्नान के साथ होता है।

हजारों पशुओं की होती है आवक-फाइल फोटो
हजारों पशुओं की होती है आवक-फाइल फोटो

हजारों पशु एवं लाखों श्रद्धालु आते हैं मेले में

पुष्कर पशु मेले में जहां हजारों ऊंट, घोड़े समेत विभिन्न प्रजाति के पशु आते हैं तथा पशुपालकों के बीच करोड़ों रुपयों का लेनदेन होता है। वहीं लाखों श्रद्धालु सरोवर में स्नान व मंदिरों के दर्शन के लिए आते हैं। साथ ही प्रशासन की ओर से मेलार्थियों के मनोरंजन के लिए अनेक रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं। जिसमें राजस्थानी लोक कलाकारों के साथ-साथ कई अंतराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कलाकारों को भी आमंत्रित किया जाता है। मेले के दौरान अनेक पशु प्रतियोगिताएं व देशी-विदेशी पर्यटकों के बीच ग्रामीण खेलकूद प्रतियोगिता आयोजित की जाती है।

पुष्कर पशु मेले में होती है पशुओं की आवक-फाइल फोटो
पुष्कर पशु मेले में होती है पशुओं की आवक-फाइल फोटो
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