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आम आदमी पार्टी ने जताया रोष:वाजिब हो बिजली दरें, BPL को फ्री मिलें; बिजली महकमे की ऑडिट हो, सामाजिक अंकेक्षण की अनुमति दें, CM के नाम ज्ञापन सौंपा

अजमेरएक महीने पहले
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ADM को ज्ञापन। - Dainik Bhaskar
ADM को ज्ञापन।

आम आदमी पार्टी ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर बिजली की दरों को लेकर रोष जताया और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन जिला कलेक्टर को सौंपा। उन्होंने बिजली की दरों को वाजिब स्तर तक लाने व गरीबी की रेखा के नीचे जीवन यापन करने वालों को बिजली फ्री देने की मांग की। साथ् ही बिजली महकमे में व्याप्त भ्रष्टाचार को रोकने के लिए ऑडिट रिपोर्ट का पुनरीक्षण करके सामाजिक अंकेक्षण की अनुमति देने की बात कही।

जिलाध्यक्ष मीना त्यागी ने बताया कि आप की ओर से सौंपे ज्ञापन में बताया कि राजस्थान की बिजली दरें, देश के अन्य किसी भी राज्य के मुकाबले ऊंची हैं। जबकि राजस्थान सस्ती और राज्य की जरूरत से ज्यादा बिजली उत्पादन के लिए जाना जाता है। ज्यादती यह है कि राजस्थान के लोगों की आय दूसरे राज्यों के मुकाबले बहुत कम है। कोरोना लोकडाउन अवधि के बिजली बिल माफ करने चाहिए क्योंकि उस अवधि में लोग बेरोजगार रहे हैं। कमाई के साधन भी घट गए। हमारी यह भी पुरजोर मांग रही है कि 200 यूनिट तक बिजली फ्री की जानी चाहिए। इससे गरीब जनता को राहत मिलेगी।

मीडिया प्रभारी पृथ्वीसिंह नरूका ने बताया कि वर्तमान में राजस्थान की बिजली दर 7 रुपये प्रति यूनिट से ज्यादा है। अन्य शुल्क व चार्जेज जोड़े दें तो यह दर 10 रुपये से भी ज्यादा हो रही है। राजस्थान अकेला राज्य है जहां हर तरीके से बिजली पैदा की जाती है- जैसे पनबिजली, कोयला, गैस, एटॉमिक, विंड और सोलर आदि सभी तरीकों से सस्ती बिजली का उत्पादन होता है। इसके बावजूद आम आदमी अन्य राज्यों की तुलना में अधिक भुगतान करने को मजबूर है। दूसरे राज्य राजस्थान की बिजली खरीद कर अपने उपभोक्ताओं को राजस्थान से सस्ती बिजली दे रहे हैं। यह क्यों और कैसे हो रहा है? इस सवाल का जवाब ढूंढने की जरुरत है। ज्ञापन में बताया कि बिजली वितरण कंपनियों और राज्य सरकार के बीच सांठगांठ के आरोप लगते हैं। जिसके तहत बिजली कम्पनियां अपने खातों में ऊंची दरों पर बिजली खरीद दिखाती हैं। बिजली की चोरी और दूसरे तरीकों से भारी बनावटी घाटा दिखाती हैं। उसके आधार पर राज्य सरकार बिजली की दरें बढ़ाने की अनुमति दे देती हैं। इससे जो वसूली होती है,उसकी बंदरबांट की जाती है। अत: ऑडिट व सामाजिक अंकेक्षण कराकर इस पर अंकुश लगाया जाना चाहिए। इस मौके पर अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ जिला अध्यक्ष अफाक अली, साउथ विधानसभा अध्यक्ष हेमंत गहरवाल , संगठन मंत्री राजवीर सिंह, जिला सह कोषाध्यक्ष राजेश नायक, टैक्सी-टेंपो चालक जिला उपाध्यक्ष दीपक कुमार , महिला शक्ति उपाध्यक्ष विमला वर्मा, पूनम मेहरा, हेमनंदिनी, ऋषिदत्त शर्मा मौजूद रहे ।

दस सवाल पर चर्चा कर जाननी चाहती है जवाब

ज्ञापन में बताया कि आम आदमी पार्टी प्रदेश के ऊर्जा विभाग, बिजली कम्पनियों व उनके ऑडिटर्स से निम्नलिखित 10 प्रश्नों पर चर्चा करना चाहती है और जनता भी इनके जवाब जानना चाहती है।

  • बिजली की उपभोक्ता से वसूली जाने वाली दरें और कंपनियों की बिजली खरीद दरें, दूसरे राज्यों के मुकाबले ज्यादा क्यों होती है ?
  • पाँच तरह के अनावश्यक शुल्क (स्थाई शुल्क, फ्यूल चार्ज, विद्युत शुल्क, नगरीय उपकर, अन्य शुल्क) की वसूली क्यों की जाती है?
  • अत्यधिक विद्युत छीजत व विद्युत चोरी रोकने मे असफलता का भार आम आदमी पर क्यों डाला जाता है?
  • बिजली लाईन मेन्टीनेंस में अनावश्यक भुगतान क्यों? स्टाफ होते हुए ठेकेदारों से काम कराना कहां तक उचित है?
  • कृषि, व्यवसायिक और साधारण नए कनेक्शन या रि-कनेक्शन में भ्रष्टाचार और ज्यादा चार्जेज क्यों वसूले जा रहे है ?
  • पुरानी लाईनों के बदलने व ट्रांसफार्मर्स लगाने में ठेकेदारों के साथ मिलीभगत से घोटाला क्यों होते हैं ?
  • नई लाईनें बिछाने का खर्च तो जोड़ दिया जाता है किन्तु पुरानी एल्युमिनियम तार व पुराने लोहे के खम्भों के बेचने से होने वाली आय खातों में नदारद रहती है ? ऐसा क्यों?
  • आम जनता से मिलने वाली सौर ऊर्जा की बिजली का कोई भुगतान नहीं करना होता, इसके बावजूद घाटा कम क्यों नहीं होता ?
  • आम जनता से वर्ष 2017-18 व 2018-19 मे अतिरिक्त जमानत राशि वसूली गई, फिर भी महकमे का घाटा ज्यो का त्यों क्यों है?
  • बिजली कम्पनी की ऑडिट रिपोर्ट में घाटा होने के कारणों व उक्त सभी बिन्दुओं पर विस्तृत विवरण क्यों नहीं बताया जाता?
  • बिजली चोरी व खरीद घोटालों के लिए जिम्मेदार अधिकारी / कर्मचारियों की आय व सम्पत्तियों की जाँच क्यों नहीं ?
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