हरियाली के शिखर पर सुहाग की देवी:पुष्कर में 3,280 फीट ऊंची रत्नागिरी पहाड़ी पर विराजती हैं सावित्री माता

अजमेर2 महीने पहले
  • कॉपी लिंक
रत्नागिरी पहाड़ी से 300 फीट ऊपर ड्रोन से ली गई तस्वीर, फोटो | मुकेश परिहार - Dainik Bhaskar
रत्नागिरी पहाड़ी से 300 फीट ऊपर ड्रोन से ली गई तस्वीर, फोटो | मुकेश परिहार

जगत पिता ब्रह्माजी की पहली पत्नी सावित्री माता अखंड़ सुहाग का प्रतीक मानी जाती हैं। करीब 3280 फीट ऊंची रत्नागिरी पहाड़ी के शिखर पर स्थित सावित्री माता मंदिर की भव्यता इस मानसून सीजन में दमक रही है। भक्त करीब एक हजार सीढ़ियां चढ़कर पहाड़ी के शिखर पर पहुंचते हैं। श्रद्धालु रोप-वे से भी मंदिर के दर्शन के लिए आ-जा सकते हैं। मंदिर के निर्माण का तो इतिहास नहीं मिला है, लेकिन इसका जीर्णाेद्धार 16वीं सदी में मारवाड़ के महाराजा अजीत सिंह ने कराया था। मंदिर मेंं प्रतिवर्ष भाद्र पद की सप्तमी को सालाना रात्रि जागरण व अष्टमी को मेला भरता है। इस दौरान महिलाएं अपने सुहाग के दीर्घायु होने की कामना करती हैं। पश्चिम बंगाल के श्रद्धालु सावित्री माता की कुल देवी के रूप में पूजा करने आते है।

यह है मान्यता पुष्कर में ब्रह्मा जी ने अपनी पहली धर्मपत्नी सावित्री के स्थान पर गायत्री देवी को साथ में बैठा कर यज्ञ किया। सावित्री कुपित हो गईं। सावित्री ने यज्ञ में उपस्थित सभी देवी-देवताओं को अलग-अलग श्राप दिया और आखिरी में ब्रह्मा जी को यह श्राप देते हुए सावित्री माता एक हजार मीटर ऊंची रत्नागिरी पहाड़ी पर रूठकर विराजमान हो गईं कि उनका (ब्रह्मा जी)मंदिर पुष्कर के अलावा पूरे विश्व में दूसरी जगह कहीं नहीं होगा। ब्रह्माजी के साथ गर्भगृह में उनकी दूसरी पत्नी गायत्री विराजमान हैं। जबकि ब्रह्माजी के मंदिर के पिछवाड़े स्थित रत्नागिरी पहाड़ी के शिखर पर सावित्री माता का मंदिर है।

खबरें और भी हैं...