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अजमेर में पहाड़ी काट बनाई राह:छेनी-हथौड़ी की मदद से 10 साल से प्रयासरत थे सोहनसिंह; उबड़-खाबड़ रास्ते को बनाया समतल, मवेशियों के लिए तालाब तक जाना हुआ आसान

अजमेरएक वर्ष पहले
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हम सभी ने बिहार के दशरथ मांझी के बारे में पढ़ा और सुना है। उन्होंने केवल एक हथौड़ा और छेनी की मदद से अकेले ही 25 फीट ऊंचे पहाड़ को काटकर 360 फीट लंबी 30 फीट चौड़ी और सड़क बनाकर 55 किमी की दूरी को घटाकर 15 किलोमीटर कर दिया। जिससे ग्रामीणों को बड़े शहर तक जाना आसान हो गया। ऐसे ही एक ‘माउंटेन मैन’ ब्यावर के निकटवर्ती ग्राम आडीकांकर में भी हैं। जिन्होने गांव के समीप एक पहाड़ी को काटकर मवेशियों के लिए पहाड़ी के उस पार मौजूद जल स्त्रोत तक जाने का रास्ता आसान बनाया।

ग्राम आडीकांकर निवासी सोहन सिंह पिछले लगभग 10 सालों से अकेले ही छेनी-हथौड़ी व फावड़े की मदद से पहाड़ी को काटकर रास्ता बनाने के कार्य में जुटे रहे और पहाड़ी के ऊबड़-खाबड़ व पथरीले रास्ते को मवेशियों के लिए आसान बनाया। हालांकि सोहन सिंह आज भी रास्ते को और भी सुगम बनाने के कार्य में जुटे हुए हैं। ग्रामीणों ने बताया कि सोहन सिंह ने बगैर किसी की मदद से पहाड़ी को काटकर रास्ता बनाया है। ग्रामीण सोहन सिंह ने अकेले के प्रयास से इस रास्ते का निर्माण अन्य ग्रामीणों के सामने एक मिसाल पेश की है।

ऊबड़-खाबड़ रास्ते पर मवेशियों को होती थी परेशानी
ग्रामीणों ने बताया कि पूर्व में पहाड़ी रास्ता काफी पथरीला व झाड़ियों से अटा पड़ा था। जिसके चलते मवेशी पहाड़ी के उस पार तालाब तक नहीं जा पाते थे और ग्रीष्म काल के दौरान उन्हें पानी की तलाश में इधर उधर भटकना पड़ता था। मवेशियों को तालाब तक जाने में होने वाली परेशानी को देखते हुए सोहन सिंह ने सालों पहले बगैर किसी के कहे पहाड़ी को काटना शुरु किया और रास्ता बना दिया। इस रास्ते का उपयोग मवेशियों के साथ ही ग्रामीण भी करने लगे हैं।

दिहाड़ी मजदूरी कर अपना जीवन-यापन करते सोहन सिंह
ग्रामीणों ने बताया कि 60 वर्षीय सोहन सिंह अविवाहित हैं। इनके माता-पिता का भी सालों पूर्व निधन हो चुका है। सोहन सिंह अकेले रहते हैं और दिहाड़ी मजदूरी कर अपना जीवन-यापन कर रहे हैं। सोहन सिंह आज भी पहाड़ी को काटकर रास्ता बनाने के कार्य में जुटे रहते हैं।

(रिपोर्ट-शशांक त्रिपाठी)

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