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फैसला:उपभाेक्ता विवाद : शिशु के गर्भनाल की रिपाेर्ट देरी से देने पर संस्था काे दाेषी माना

अजमेरएक महीने पहले
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  • जिला उपभाेक्ता मंच के आदेश काे राज्य आयाेग ने कुछ संशाेधन के साथ उचित ठहराया
  • भविष्य में हाेने वाली बीमारियाें के उपचार के लिए सुरक्षित रखवाते हैं गर्भनाल

जयपुर स्थित राज्य उपभोक्ता आयोग ने नवजात शिशु के गर्भनाल की रिपोर्ट देने में देरी के मामले में क्रायोबैंक इंटरनेशनल इंडिया के विरूद्ध अजमेर के जिला उपभाेक्ता मंच के निर्णय को आंशिक संशोधन के साथ उचित ठहराया है। जिला मंच ने अपने आदेश में क्रायोबैंक को आदेश दिया था कि वह नागपुर निवासी हर्षिता और जितेंद्र गुप्ता को उनके नवजात शिशु का अम्बिलिकल कोर्ड ब्लड स्टेमसेल (गर्भनाल) पर्याप्त सावधानी बरतते हुए लौटाएं और उनकी अग्रिम जमा राशि 19 हजार रुपए के साथ ही एक लाख क्षतिपूर्ति राशि और 5 हजार रुपए परिवाद खर्च सहित अदा करें।

राज्य आयोग के पीठासीन अधिकारी महावीर प्रसाद शर्मा और एसके जैन तथा सदस्य शैलेंद्र भट्ट ने क्रायाेबैंक की अपील पर सुनवाई कर जिला मंच के निर्णय सही ठहराते हुए केवल क्षतिपूर्ति राशि को संशाेधित कर एक लाख से 50 हजार किया है। प्रार्थी दंपती ने जिला मंच अजमेर में वकील सूर्यप्रकाश गांधी के जरिये परिवाद कर बताया कि अजमेर में निवास के दौरान उन्होंने अपने होने वाले शिशु की गर्भनाल को प्रोसेस व सुरक्षित रखने बाबत क्रायोबैंक से 55 हजार रुपये का सेवर-1 प्लान लिया। इस प्लान के अनुसार क्रायोबैंक को नवजात शिशु की स्टेमसेल रिपोर्ट 75 दिन में देनी थी। 1 फरवरी 2014 को स्थानीय निजी अस्पताल में बच्चे का जन्म हुआ।

क्रायोबैंक ने अस्पताल से बच्चे का ब्लड सैंपल और स्टेमसेल प्राप्त कर ली। गुप्ता दंपती का आरोप था कि क्रायोबैंक ने न केवल उनका प्लान बदल दिया बल्कि स्टेमसेल की रिपोर्ट भी 75 दिन में नही दी। काफी पत्राचार के बाद क्रायोबैंक ने 20 सिंतबर 2014 को गर्भनाल की रिपोर्ट दी उसमें भी बच्चे का सेक्स बदल दिया। इस मुद्दे काे लेकर दायर परिवाद काे जिला उपभाेक्ता मंच ने मंजूर कर लिया जिसके खिलाफ क्रायोबैंक की ओर से राज्य आयोग में अपील की गई।

अपील में उनका तर्क था कि शिशु के ब्लड ग्रुप में विसंगति होने तथा धमनियां नही मिलने से रिपोर्ट देने में देरी हुई जाे उनके वश में नहीं था। उनका यह भी तर्क था कि जिला मंच ने जो एक लाख रुपए क्षतिपूर्ति का आदेश पारित किया है उसका कोई आधार नही है।
क्षतिपूर्ति राशि 50 हजार की
गुप्ता दंपती के वकील सूर्य प्रकाश गांधी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये तर्क रखा कि जिला मंच ने सभी तथ्यों व दस्तावेजों को देखकर विधिसम्मत निर्णय पारित किया है इसलिए अपील खारिज की जाए। राज्य आयाेग ने जिला मंच का निर्णय सही ठहराते हुए केवल क्षतिपूर्ति राशि 1 लाख रुपए से घटाकर 50 हजार रुपए की है। गाैरतलब है कि भविष्य में हाेने वाली बीमारी में उपचार के लिए शिशु के गर्भनाल काे सुरक्षित रखवाया जाता है।

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