स्कूलें खुल गईं, फिर पुष्कर मेले पर पाबंदी क्यों ?:तीर्थ पुरोहित, जनप्रतिनिधि, होटल व्यवसायी, पशुपालकों ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा

अजमेर2 महीने पहले
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आगामी नवंबर माह में प्रस्तावित पुष्कर के सालाना पशु मेले को जिला प्रशासन की ओर से कोरोना गाइड लाइन का हवाला देते हुए निरस्त किए जाने से लोगों में रोष उत्पन्न हो गया है। आक्रोशित तीर्थ पुरोहितों, जनप्रतिधियों, होटल व्यवसायी, पशुपालक समेत विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने विश्व विख्यात पुष्कर मेले के आयोजन की अनुमति देने की मांग को लेकर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के नाम कलेक्टर प्रकाश राजपुरोहित को ज्ञापन सौंपा।

शिष्टमंडल ने कलेक्टर से कहा कि जब स्कूलें खुल गई हैं, प्रदेश में चुनाव हो रहे है, शादी समारोह व नेताओं की बर्थ डे पार्टियों में हजारों लोग पहुंच रहे तो फिर पुष्कर मेले पर पाबंदी क्यों लगाई जा रही है। इस संबंध में कलेक्टर ने गृह विभाग से मार्ग दर्शन मांग कर शिष्टमंडल को उचित कार्यवाही का भरोसा दिलाया।

कोरोना महामारी की आपदा के कारण इस वर्ष भी मेले के आयोजन पर पाबंदी लगाई जा गई है, जबकि तीर्थ पुरोहितों, व्यवसायियों, होटल गेस्ट हाउस संचालकों,पशु व्यापारियों व इनसे जुड़े कामगारों के लिए रोजगार व एक मुश्त आय अर्जित करने का पुष्कर मेला ही एक मात्र साधन है।

गत दो वर्षों से महामारी की आर्थिक मार झेल रहे तीर्थ पुरोहित, दुकानदार, होटल गेस्ट हाउस संचालक ,मजदूर सभी लोग मेले के आयोजन की आस लगाए बैठे हैं। कलेक्टर को ज्ञापन देने वालों में सामाजिक कार्यकर्ता, अरुण पाराशर, पार्षद रविकांत बाबा, वरिष्ठ कांग्रेस नेता हाजी इंसाफ अली ,तीर्थ गुरू पुरोहित संघ ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष विमल कुमार, होटल ऑनर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष रघु पारीक, बाबूलाल दगदी, पार्षद जय नारायण दगदी, कैमल एवं जीप सफारी यूनियन के अध्यक्ष सत्यनारायण, रेस्क्यू कमेटी के अध्यक्ष अमित भट्ट, संस्कृति प्रचारक अशोक टांक, बैजनाथ पाराशर, संजय दगदी आदि शामिल रहे।

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