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अजमेर में 70 वर्षीय बुजुर्ग ने दी कोरोना को मात:सकारात्मक साेच व परिवार के सहयोग से जीती जंग; बोले- अनुकूलता भाेजन, प्रतिकूलता विटामिंस और चुनौतियाें से जूझना पुरस्कार

अजमेर2 महीने पहले
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मुकेश भार्गव व परिवार के अन्य सदस्य। - Dainik Bhaskar
मुकेश भार्गव व परिवार के अन्य सदस्य।

जिला आबकारी अधिकारी के पद से सेवानिवृत्त 70 वर्षीय मुकेश भार्गव की काेराेना से जंग जीतने की कहानी ऐसे परिवारों के लिए रामबाण साबित होगी, जहां दादा, पाेते-पाेतियां संयुक्त रूप से रहते हैं। पिछले माह भार्गव काे निमोनिया हुआ और शरीर एकदम से कमजोर पड़ गया। घरवालों ने अस्पताल भर्ती कराया, इलाज शुरू हुआ, लेकिन इलाज से ज्यादा असर 8 साल के पोते विराज द्वारा हर रोज फोन पर की गई बातों का हुआ।

भार्गव ने बताया, मेरा पोता विराज मयूर स्कूल में तीसरी कक्षा में पढ़ता है। वो मुझे हर दिन फोन करता। और मैं उसका फोन सुन-सुन कर ठहाके लगाने लगता। कभी मुस्कराता तो कभी हंसता हुआ कुछ कमेंट कर देता। वो बात ही ऐसी करता। कहता था, दादा आपके लिए फ्रिज में आइसक्रीम रखी है, और चॉकलेट भी है, अब मुझसे रहा नहीं जा रहा, आप जल्दी आ जाओ, मेरा मन कर रहा है। आपके हिस्से की भी मैं खा जाऊंगा। लेकिन खा भी तो नहीं सकता। आपके हाथ के बिना चॉकलेट का स्वाद नहीं आता। जल्दी आ जाओ, साथ में खाएंगे।

भार्गव ने कहा कि - पुत्र मधुर, पुत्रवधू संध्या, पत्नी जीसीए से रिटायर्ड उप प्राचार्य डाॅ. मीनू राय और साले डाॅ. अशोक भटनागर हमेशा पॉजिटिव बात करते, ऐसा कभी नहीं लगा कि मैं बीमार हूं। असल में उनकी बातों के कारण मुझे अस्पताल का बेड घर का सोफा या पलंग ही लगता रहा। मैं उनकी बातों के साथ हमेशा उनके इर्द-गिर्द बना रहा। लगा ही नहीं कि अस्पताल में हूं। फिर ऐसी सकारात्मक ऊर्जा मुझे अस्पताल से घर ले आई। दवा अपना काम कर रही थी और यह ऊर्जा शरीर में ऑक्सीजन का। ईश्वर ने सबको ऐसा परिवार दिया है, इसलिए मेरी तरह और लोग भी अस्पताल से घर लौट आएंगे। ईश्वर की कृपा ही कुछ ऐसी है।

बहादुरी अवार्ड से हाे चुके हैं सम्मानित

ट्रेन की चपेट में आने से जब दाे महिलाओं की जान बचाई थी, उस समय भार्गव की उम्र करीब 60 वर्ष थी। इस बहादुरी के लिए वसुंधरा सरकार के समय राज्य स्तर पर बहादुरी अवार्ड से सम्मानित किया गया। साथ ही जयपुर के पूर्व राजपरिवार की सदस्य पद्मिनी द्वारा राजा मानसिंह बहादुरी अवार्ड से सम्मानित किया गया। वर्तमान में भार्गव राजस्थान टैक्स बोर्ड के वकील हैं।

ईश्वर की कृपा से आप सुरक्षित हैं, मैं सिर्फ निमित्त मात्र हूं

भार्गव ने कहा कि उनकी नजर में किसी की जान बचाने से कोई चीज बड़ी नहीं है। चाहे किसी जानवर की जान बचानी हो या फिर इंसान की, हमेशा तत्पर हैं। भार्गव ने इन दिनों चर्चा में रहे महाराष्ट्र में रेलवे कर्मी मयंक द्वारा प्लेटफार्म पर एक छोटी बच्ची की जान बचाने का उदाहरण देते हुए बताया कि - 27 नवंबर 2011 में ऐसा ही वाकया उनके साथ भी हुआ। उदयपुर के मावली जंक्शन पर दाे महिलाएं पटरी से प्लेटफार्म पर चढ़ने की कोशिश कर रही थीं, अचानक चेतक एक्सप्रेस दनदनाती सामने से आती दिखी। ट्रेन की गति से तेज दाैड़कर बारी-बारी से दाेनाें महिलाओं काे सुरक्षित प्लेटफार्म की ओर खींच लिया। दाेनाें की जान बच गई। महिलाओं की आंखें नम थीं और वे बारंबार हाथ जाेड़कर नमन कर रहीं थीं। भार्गव ने बताया कि उन्हाेंने महिलाओं से कहा कि ईश्वर की कृपा से आप सुरक्षित हैं, मैं सिर्फ निमित्त मात्र हूं।

किसी की जान बचाएंगे ताे आपकी जान बचेगी

भार्गव ने कहा कि घरवालों के सकारात्मक सोच ने उन्हें हिम्मत नहीं हारने दी। ऐसा लगा जैसे पुनर्जन्म हुआ हाे। वर्तमान में जाे हालात बन रहे हैं, उसमें यदि आप किसी की जान बचाने में मदद कर सकते हैं ताे सबसे पहले आगे आएं। जब आप किसी की जान बचाते हैं ताे ईश्वरीय शक्ति संचार हाेता है और आपकी जान भी सुरक्षित हाेती है।

(रिपोर्ट:अतुल सिंह)

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