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स्मृति शेष:दीवानगी ऐसी कि दरगाह आए ट्रैजेडी किंग का पांव भी जख्मी हाे गया था

अजमेरएक महीने पहलेलेखक: महावीर सिंह 
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  • मुगले आजम देखने के लिए सिनेमा घर के बाहर बिस्तर बिछा दिए

अभिनय सम्राट के नाम से मशहूर दिलीप कुमार की मशहूर निर्माता-निर्देशक महबूब खान की ही तरह ख्वाजा गरीब नवाज में गहरी आस्था थी। वे ख्वाजा साहब की दरगाह में हाजरी देने कई बार आए। दिलीप कुमार की सास और फिल्म अभिनेत्री सायरा बानो की मां नसीम बानो के साथ वे दरगाह आए थे। चादर चढ़ाने के बाद नसीम बानो और दिलीप कुमार काफी देर तक दरगाह में रूके।

कुछ बरस पहले भी वे फिर समय निकाल कर ख्वाजा साहब की बारगाह में हाजरी देने पहुंचे। उनके आने का कार्यक्रम दैनिक भास्कर ने एक दिन पहले ही छाप दिया था। इससे उनके प्रशंसकों की भारी भीड़ जमा हाे गई। हर प्रशंसक उनके करीब जाना चाहता था। दिलीप कुमार प्रशंसकों से घिर गए। उनके साथ आए दो व्यक्तियों ने इन्हें निकालने की कोशिश की। दिलीप कुमार थाेड़ा सा रास्ता मिलते ही तेजी से दाैड़े, प्रशंसक भी दंग रह गए। तब तक पुलिस भी आ चुकी थी। लेकिन भारी भीड़ के कारणा धक्का-मुक्की हुई और उनके पांव बुरी तरह जख्मी हो गए।

अभिनय के दीवाने| अजमेर में दिलीप कुमार के दीवानाें की कमी नहीं थी। के आसिफ की बहुचर्चित फिल्म मुगले आजम जब अजमेर में रिलीज हुई तो इस फिल्म को पहले दिन देखने के लिए दर्शकों ने प्रभात सिनेमा के बाहर बुकिंग विंडों के समीप रात को ही बिस्तर बिछा लिए थे। सुबह उठकर टिकट लेने के लिए ऐसी होड़ मची की देखते-देखते फिल्म शो हाउसफुल हो गया।

क्रांति सिने क्लब बना लिया | दिलीप कुमार के प्रशंसकों ने फिल्म क्रांति के प्रदर्शन के दौरान एक क्लब का गठन किया, क्लब का नाम क्रांति सिने क्लब था। इसका कार्यालय प्लाजा सिनेमा के निकट हुआ करता था।

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