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भास्कर व अजयमेरू प्रेस क्लब की वेबिनार:संक्रमण नहीं फैलाते, सजग करते हैं अखबार माेबाइल पर तो 20 घंटे तक रहता है काेराना

अजमेर8 महीने पहले
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  • शिक्षाविद्, जनप्रतिनिधि और चिकित्सा विशेषज्ञ हुए शामिल
  • काेराेनाकाल में वेदना की आवाज बना है अखबार

दैनिक भास्कर और अजयमेरू प्रेस क्लब के संयुक्त तत्वावधान में मंगलवार काे राष्ट्रीय वेबिनार का आयाेजन किया गया। काेराेना काल में समाचार पत्राें की भूमिका विषय पर हुई वेबिनार में यह बात सर्वसम्मति से सभी वक्ताओं ने कही कि अखबार से काेराेना नहीं फैलता बल्कि अखबार जागरूकता के जरिए काेराेना काे राेकने का काम कर रहा है। इस वेबिनार में बताैर मुख्य अतिथि हरिदेव जाेशी पत्रकारिता यूनिवर्सिटी जयपुर के कुलपति और एमडीएसयू के कार्यवाहक कुलपति ओम थानवी ने शिरकत की।

मुख्य वक्ताओं के ताैर पर अजमेर उत्तर के विधायक वासुदेव देवनानी, अजमेर दक्षिण की विधायक अनिता भदेल, पुष्कर के पूर्व विधायक श्रीगाेपाल बाहेती, पूर्व विधायक और आईएमए के अध्यक्ष डाॅ. राजकुमार जयपाल, जेएलएन के वरिष्ठ आचार्य और मेडिसिन विभाग के अध्यक्ष डाॅ. संजीव माहेश्वरी माैजूद रहे। भास्कर के संपादक डाॅ. रमेश अग्रवाल विषय प्रवर्तन किया।

दाेपहर 12 बजे शुरू हुई इस वेबिनार में वक्ताओं ने काेराेना के तहत लगे लाॅकडाउन से लेकर काेराेना से संबंधित हर चीज पर अखबाराें की नजर और सकारात्मकता का जिक्र किया। वक्ताओं ने लाॅकडाउन के दाैरान भास्कर के प्रयासाें को सराहा। इस वेबिनार का संचालन पूजा तुंदवाल ने किया।

सकारात्मक हैं अखबार

अनिता भदेल, विधायक

काेराेना काल में पूरा विश्व आर्थिक मंदी से गुजरा। इससे अखबार भी अछूते नहीं रहे। इसके बाद भी अखबाराें ने अपनी सकारात्मक भूमिका निभाई। विज्ञापन नहीं आने के बाद भी भास्कर ने लाेगाें काे जागरूक करने के लिए नाे मास्क नाे एंट्री अभियान भी चलाया। मंत्रियाें तक की फाेटाे मास्क नहीं पहनने पर क्राॅस की।

आंकड़े छुपाने की काेशिशाें काे भी भास्कर ने प्रकाशित किया। लाेग अखबार में छपी बाताें पर भराेसा करते हैं, इसकी एक विश्वसनीयता है। सामाजिक सराेकाराें काे भास्कर ने उजागर किया। शासन, प्रशासन काे भी अखबाराें ने अवेयर किया। अस्पतालाें में संसाधन और सुविधाओं की जरूरत की बात भी सीएम तक अखबाराें के जरिए ही पहुंची। लाेगाें तक भाेजन नहीं पहुंचा ताे अखबाराें ने बताया। मजदूराें की समस्या भी अखबाराें उजागर की।

खामियां भी की उजागर

वासुदेव देवनानी, विधायक

अखबाराें का महत्व तब बढ़ जाता है जब अखबार खबराें तक सीमित न रहते हुए सामाजिक सराेकार भी निभाता है। भास्कर इस मामले में बेहतर साबित हुआ है। हर माैके पर भास्कर सामाजिक सराेकाराें से जुड़ा है। लाॅकडाउन के समय फाेटाे ग्राफर फाेटाे लाए, पत्रकार खबरें लाए और मशीन के व्यक्ति ने रात में काम करके अखबार छापा, सुबह हाॅकर ने अखबार बांटा यह कम सराहनीय नहीं है। अखबार से काेराेना फैलने का एक भ्रामक वातावरण बना।

ज्यादातर लाेगाें ने इस पर भराेसा नहीं किया उन्हाेंने अखबार पर भराेसा किया। भास्कर काे धन्यवाद कि सरकारी जानकारियाें के अलावा कमियाें काे भी उजागर किया। कमियाें काे उजागर किया ताे सकारात्मक उदाहरण भी लिखे कि 103 वर्षीय महिला ठीक हाेकर लाैटी। इससे मरीजाें और उनके परिजनाें काे भी हाैसला मिला।

अखबारों ने साख को बचाए रखा

डाॅ. रमेश अग्रवाल, संपादक दैनिक भास्कर

अजमेरु प्रेस क्लब के अध्यक्ष डाॅ. रमेश अग्रवाल ने कहा कि पहले दाैर यह था कि अखबार ही पूरा मीडिया था। अब मीडिया का दायरा बढ़ा है लेकिन अखबाराें ने अपनी साख काे बनाए रखा है। अखबाराें में खबराें के चयन के लिए संपादक माैजूद है, वह तय करते हैं कि क्या छपेगा कितना छपेगा क्या नहीं छपेगा। लेकिन साेशल मीडिया पर काेई नियंत्रण नहीं है।

साेशल मीडिया पर काेई भी सामग्री बगैर पुष्टी के ही आगे बढ़ा दी जाती है। कई बार एडमिन काे ही पता नहीं हाेता कि उसे भी ग्रुप का एडमिन बना दिया गया है। डाॅ. अग्रवाल ने आईएएनएस और सी वाेटर की एक सर्वे रिपाेर्ट के आंकड़े भी पेश किए।

कोरोनाकाल में सजग प्रहरी हैं अखबार

डॉ. राजकुमार जयपाल, आईएमए के अध्यक्ष

अखबाराें ने लाॅकडाउन में एक सजग प्रहरी के ताैर पर काम किया। काेराेना से जुड़ी हर जानकारी लाेगाें तक पहुंचाई। पत्रकाराें ने संक्रमण की परवाह नहीं की और सामाजिक जिम्मेदारी काे बखूबी निभाया है। जहां तक अखबाराें से संक्रमण फैलने की अफवाह की बात है ताे कहीं से भी यह बात सामने नहीं आई कि अखबाराें से काेराेना फैलता है। ऐसी काेई रिपाेर्ट या सूचना भी नहीं सामने आई कि जिससे पता चलते की अखबाराें से काेराेना फैलता है। यह अफवाह बस अफवाह ही है, अखबाराें ने ताे एक वाॅरियर्स के ताैर पर काम किया है।

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