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अजमेर में पशुप्रेम का अनूठा उदाहरण:मगरे के माउंटेन मैन ने दस साल तक अकेले पहाड़ी को काटकर बना ही दिया मवेशियाें केे लिए तालाब तक पहुंचने का रास्ता

ब्यावर2 महीने पहलेलेखक: शशांक त्रिपाठी
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सोहनसिंह की 10 साल की मेहनत को सलाम। - Dainik Bhaskar
सोहनसिंह की 10 साल की मेहनत को सलाम।
  • मिसाल-बेमिसाल: आडी कांकर निवासी सोहनसिंह ने पशुप्रेम का अनूठा उदाहरण पेश किया
  • पहले गांव के मवेशियों को जंगलों, ऊबड़-खाबड़ रास्ते और कंटीली झाड़ियाें से बामुश्किल निकलना पड़ता था

यदि व्यक्ति मन में कुछ करने की ठान ले तो फिर मुश्किल काम भी सरल लगने लगता है। इस बात को सच साबित कर दिखाया मगरे के माउंटेन मैन सोहन सिंह ने। उनकी हिम्मत के आगे पहाड़ी को भी झुकना पड़ा और एक दिन वह भी आया जब उनके बनाए रास्ते से गांव के मवेशी आसानी से तालाब तक पहुंचने लगे। दस साल पहले जब ग्राम आडीकांकर निवासी सोहन सिंह ने मवेशियों को तालाब तक आसानी से पहुंचाने के लिए रास्ता बनाने का संकल्प लिया तो ये बात ग्रामीणों की कल्पना से परे थी।

अपने इस संकल्प के साथ सोहन सिंह ने 10 साल में छैनी-हथोड़े व फावड़े की मदद से करीब 20 फीट ऊंची पहाड़ी को काटकर छोटा रास्ता बनाया। ग्रामीणों ने बताया कि सोहन सिंह ने दस साल में बिना किसी की मदद से पहाड़ी को काटकर रास्ता बनाया। उन्होंने अकेले अपने दम पर इस कठिन लक्ष्य को दस साल में पहाड़ी पर छैनी-हथौड़ा चलाकर हासिल किया और अन्य ग्रामीणों के सामने एक मिसाल पेश की। हालांकि सोहन सिंह आज भी इस रास्ते को और सुगम बनाने में जुटे हैं।

पहाड़ काे काटकर बनाया गया रास्ता।
पहाड़ काे काटकर बनाया गया रास्ता।
गांव में सोहनसिंह का कच्चा मकान।
गांव में सोहनसिंह का कच्चा मकान।

ताकि मवेशी आसानी से पहुंचे तालाब तक
मवेशियों के लिए मुख्य जलस्रोत पहाड़ी के उस पार स्थित तालाब है। जहां पहुंचने के लिए मवेशियों को पथरीले व कंटीली झाड़ियाें के बीच पहाड़ी चढ़कर तालाब तक पहुंचना पड़ता था। मवेशियों की इस परेशानी को देख सोहन सिंह ने संकल्प लिया कि यदि पहाड़ी को काट दिया जाए तो मवेशी आसानी से तालाब तक पहुंच सकेंगे। अपने इस संकल्प को लेकर उन्होंने ग्रामीणों से चर्चा की लेकिन जब कोई सहयोग करता नजर नहीं आया तो वे खुद ही छैनी-हथौड़ा लेकर पहाड़ी की ओर निकल पड़े। एक दृढ़ संकल्प के साथ पिछले दस सालों से वे इस काम में जुटे हैं।

गांव आडीकांकर में पहाड़ी व ऊबड़ खाबड रास्ता जिसे सोहन ने मवेशियों के लिए किया आसान।
गांव आडीकांकर में पहाड़ी व ऊबड़ खाबड रास्ता जिसे सोहन ने मवेशियों के लिए किया आसान।

दिहाड़ी मजदूरी से करता है जीवन यापन

  • माता-पिता के निधन बाद 60 वर्षीय सोहन सिंह अकेले रहते हैं और दिहाड़ी मजदूरी कर जीवन-यापन करते हैं। वे आज भी इस पहाड़ी को काटकर रास्ता और सुगम बनाने में जुटे हैं। सोहन सिंह पिछले कई वर्षों से पहाड़ी को काटकर मवेशियों के तालाब तक जाने का सुगम रास्ता बनाने में जुटे हैं। वे इस काम को अपने दम तक अकेले ही कर रहे हैं। उनकी मेहनत रंग लाई और आज मवेशी पहाड़ी के पार तालाब तक आसानी से पहुंचने लगे हैं। - मदनसिंह, पूर्व सैनिक, ग्रामीण
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