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रीट 2020:नई रीट में पुरानी खामियां नहीं दोहराई जाएं, तब ही अभ्यर्थियों को मिल सकेगा फायदा

अजमेर10 दिन पहले
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  • अब तक सरकार ने रीट की तिथि और विज्ञप्ति जारी नहीं की हैरीट

राज्य सरकार ने तृतीय श्रेणी के 31 हजार पदों की भर्ती की गुगली फेंक दी है, लेकिन अब तक रीट 2020 के बारे में कोई दिशा-निर्देश जारी नहीं किए हैं। प्रदेश के लाखों बेरोजगारों को पहले रीट का इंतजार है। बेरोजगार इस बार आयोजित होने वाली रीट को खामियों से परे देखना चाहते हैं, ताकि अभ्यर्थियों को नौकरी मिल सके।

राजस्थान में शिक्षा के अधिकार अधिनियम (आरटीई) को पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में लागू किया गया था। इसके बाद वर्ष 2010 एवं 2012 में शिक्षक भर्ती पात्रता परीक्षा टेट (टेट) आयोजित कराई गई। टेट के बाद सरकार ने शिक्षक भर्ती के लिए जिला परिषदों के माध्यम से भर्ती परीक्षा का आयोजन कराया।

आरटेट में खामियों के चलते अभ्यर्थी मामले को सुप्रीम कोर्ट तक ले गए

  • आरटेट में सामान्य को 60% एवं अन्य को 50% अंको पर उत्तीर्ण किया गया, जबकि सी टेट के तर्ज पर आरटेट होता है। विसंगति के चलते यह मामला मामला सुप्रीम कोर्ट तक गया और निर्णय में टीएसपी क्षेत्र को छोड़कर सभी को आरटेट में 60% लाना अनिवार्य माना गया।
  • सरकार ने जिला परिषदों के माध्यम से शिक्षक भर्ती कराई। हर जिले का अलग-अलग प्रश्नपत्र आया और हर जिले की अलग-अलग मेरिट सूची बनाई गई। जिससे किसी जिले की मेरिट अधिक रही और किसी जिले की कम मेरिट रही।
  • जिला परिषद के माध्यम से आए प्रश्न पत्रों के आंसर की भी कई बार चेंज हुई और परीक्षा परिणामों को कोर्ट में चैलेंज भी किया गया।

भाजपा ने उठाया फायदा

राजस्थान बेरोजगार संघ के प्रदेश अध्यक्ष दीपेंद्र शर्मा ने बताया कि इस प्रणाली से युवाओं का असंतोष चरम पर था। इसी का फायदा भाजपा ने उठाया और अपने घोषणापत्र में दो परीक्षाओं के स्थान पर एक परीक्षा आयोजित करवाने तथा राज्य स्तर पर एक ही मेरिट बनवाने का चुनाव में युवाओं से वादा किया। भाजपा द्वारा चुनाव में किए गए वादे के अनुसार आरटेट को रीट में परिवर्तन कर 2016 व 2018 में दो बार शिक्षक भर्ती परीक्षाओं का आयोजन किया गया, लेकिन एक बार फिर युवाओं को सरकार ने धोखा दिया।

रीट में भी रहीं विसंगति

  • जहां लेवल प्रथम में नियुक्ति के लिए आरटेट अथवा रीट के अंकों को आधार माना गया, वहीं द्वितीय लेवल में नियुक्ति के लिए 70% आरटेट अथवा रीट के तथा अंक 30% स्नातक का वेटेज जोड़ दिया गया।
  • 30% वेटेज की मार के चलते बेरोजगारों ने फर्जी अंकतालिकाओं का सहारा लेना प्रारंभ किया। एडिशनल विषयों में डिग्री लेनी प्रारंभ की और इसके अतिरिक्त जिन अभ्यर्थियों ने रीट की परीक्षा में मेहनत कर के 150 में से 125 अंक प्राप्त किए, इसके कारण से बाहर हो गए जबकि वेटेज के कारण परीक्षा में 107 अंक लाने वालों का चयन हो गया।
  • बाहरी राज्यों के विद्यार्थियों को रोकने के लिए कोई विशेष प्रयास नहीं किया गया। पाठ्यक्रम ऐसा सरल बनाया गया कि किसी भी राज्य का विद्यार्थी इस परीक्षा को आसानी से दे सकता है। इसमें राजस्थान की इतिहास कला संस्कृति को शामिल नहीं किया गया।

मांग खारिज की गई
दीपेंद्र शर्मा ने बताया कि युवाओं द्वारा वेटेज को कम करने के लिए तत्कालीन भाजपा नेताओं से मांग की लेकिन युवाओं की वेटेज कम करने की मांग को दरकिनार करते हुए सिरे से खारिज कर दिया। अब बेरोजगार कांग्रेस सरकार से भी उम्मीद लगा कर बैठे हैं कि इस बार कांग्रेस ने अपने घोषणा पत्र में रीट संबंधी विसंगतियों को दूर करने का जो वादा किया था यह विसंगतियां कब तक दूर होंगी।

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