जैन संत शांति मुनि का देवलोकगमन:​​​​​​​अंतिम दर्शन व ​​​​​​​डोल यात्रा में उमड़े धर्मावलम्बी, जैन समाज में शोक की लहर

अजमेर9 दिन पहले
शांति मुनि की डोल यात्रा।

विश्व वल्लभ वाक् चिंतामणि आचार्य 1008 विजयराजजी म. सा. के आज्ञानुवर्ती गणाधिपति महास्थविर श्रमण श्रैष्ठ तपस्वी शांतिमुनि म. सा. का शुक्रवार रात अजमेर में देवलोक गमन हो गया। डोल यात्रा शनिवार शाम को तेरापंथ भवन, सुंदर विलास से प्रारंभ होकर पुष्कर रोड़ स्थित मुक्ति धाम पहुंची। जिसमें अजमेर सहित देश के विभिन्न कोनो से जैन धर्मावलम्बी ने अपने गुरू भगंवत को अंतिम विदाई दी एवं पवित्र आत्मा को मोक्ष प्राप्ति के लिये प्रार्थना की।

शांति मुनि।
शांति मुनि।

जैन धर्म की पताका लहराई
कृपानिधि राष्ट्र संत शांति मुनि म. सा.का जन्म राजस्थान के चित्तोड़ जिले के ग्राम भदेसर में 29 मई, 1945 तद्नुसार संवत् 2003 ज्येष्ठ कृष्णा 12 को हुआ। पिता शडालचन्द और माता श्रीमती लहरी बाई का साया तीन वर्ष की अवस्था में ही उठ गया। तब लालन-पालन आपके बड़े भाई ने किया।

सांसारिक मोह माया को त्याग कर समता विभूति आचार्य नानेश से 24 फरवरी, 1963 को 16 वर्ष की आयु में जैन दीक्षा अंगीकार की थी। आचार्य नानेश के मार्गदर्शन में अध्ययन करते हुए जैन सिद्धान्त अलंकार की परीक्षा सन् 1972 में प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की।

लगभग 65 वर्षीय जैन संत ने अपने दीर्घकालीन सयंम जीवन मे देश के विभिन्न प्रांतों मे हजारों किलोमीटर की पदयात्रा कर गाँव गाँव ढाणी-ढाणी मे जैन धर्म की पताका लहराई। इनके दिव्य संदेशों से प्रभावित होकर अनेक मुमुक्षों ने संयम मार्ग अपनाया।

श्रमण संस्कृती के दिव्य संवाहक शांति मुनि ने जैनधर्म के विविध विषयों पर अनेक पुस्तकों की रचना कर धर्म का मार्ग प्रशस्त किया। अपने दीर्घकालीन सयमीं जीवन में उन्होंने त्याग व तपस्या से अपनी आत्मा को खूब तपाया।

पुष्कर रोड मुक्ति धाम में हुआ अंतिम संस्कार।
पुष्कर रोड मुक्ति धाम में हुआ अंतिम संस्कार।

संयम के सजग पहरी को खो दिया- आचार्य विजयराज
नागौर जिले के अलाय गांव से हुक्मगच्छ संघ के संघनायक जैनाचार्य प्रवर विजयराज म.सा.ने अपने संदेश में कहा कि जैन समाज ने संयम के सजग पहरी को खो दिया है। संघ व्यथित, चिंतित व गमगीन है। संघ सत्य व संयम के प्रति समर्पित व निष्ठावान बने रहेंगे, यही कृपा निधि म.सा.के प्रति भावांजलि होगी।

अजमेर में होना था चार्तुमास

संघ प्रवक्ता अनिल कोठारी व संघमंत्री सुरेश नाहर ने बताया कि राजस्थान, मध्यप्रदेश, छत्तीगढ़, उड़ीसा, महाराष्ट्र, गुजरात, दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, हिमाचल, जम्मू कश्मीर आदि प्रदेशों में विचरण करते हुए अब तकउत्कृष्ट संयमी जीवन के गौरवशाली 59 चातुर्मास 2021 तक हो चुके थे। आपका आगामी 2022 का चातुर्मास अजमेर में होना था। आपके पावन सान्निध्य में अजमेर में महावीर जयन्ती का कार्यक्रम आयोजित हुआ। तब से आपका अजमेर प्रवास चल रहा था। अजमेर में विभिन्न क्षेत्रों में आप धर्म जागृति की प्रेरणा कर रहे थे।