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  • The Trend Towards Granite Has Increased Due To Ready to fit; Marble Business Reduced To 30%, Granite Occupied 70%, Exports Also Increased Abroad

एशिया की सबसे बड़ी मार्बल मंडी से ग्राउंड रिपोर्ट:मार्बल से ज्यादा अब ग्रेनाइट की डिमांड, कोरोना में भी चमक कम नहीं हुई, यूएस और यूके समेत कई देशों में रोजाना 1 करोड़ रुपए का कारोबार

अजमेर9 महीने पहलेलेखक: सुनिल कुमार जैन

एशिया की सबसे बड़ी किशनगढ़ मार्बल मंडी में अब ग्रेनाइट का बोलबाला है। खास बात यह है कि कोरोना काल में भी ग्रेनाइट के कारोबार की चमक विदेशों तक पहुंच गई। संक्रमण का असर ग्रेनाइट के कारोबार पर बिल्कुल भी नहीं हुआ। एशिया की सबसे बड़ी मार्बल मंडी में रोजाना करीब पन्द्रह करोड़ का कारोबार होता है। इसमें से 70 फीसदी यानि 11 करोड़ रुपए का बिजनेस तो अकेले ग्रेनाइट का होता है। रोजाना 1 करोड़ का कारोबार विश्व के 15 देशों के व्यापारियों के साथ होता है। यूएस, यूके और दुबई समेत अन्य देशों में रोज 700 टन ग्रेनाइट एक्सपोर्ट किया जा रहा है, जबकि मार्बल केवल 30 फीसदी तक सिमट कर रह गया है। इसके पीछे मुख्य कारण ग्रेनाइट का रेडी टू फिट होना है।

कोरोना के बाद भी फायदे में मंडी
मार्बल ग्रेनाइट का निर्यात पहले ज्यादातर चीन में होता था, लेकिन अब व्यापारी यूएस, यूके, वियतनाम, मिडिल ईस्ट कंट्री दुबई और सऊदी अरब सहित अन्य देशों में भी निर्यात करने लगे हैं। इन देशों में भारतीय मार्बल-ग्रेनाइट की अच्छी मांग है। वहीं, कोरोना के कारण चीन, ब्राजील, इटली और टर्की में माल का उत्पादन कम होने व महंगा होने के कारण ​आयात कम हो गया है। इससे इन देशों में स्थानीय मार्बल व ग्रेनाइट की डिमांड बढ़ गई है। ऐसे में बढ़ी मांग का फायदा किशनगढ़ की मार्बल मंडी को हुआ।

एक साल में 4500 करोड़ रुपए का कारोबार
मार्बल मंडी से रोजाना 400 गाड़ी निकलती है। इनमें 300 गाड़ी ग्रेनाइट व 100 गाड़ी मार्बल की होती है। एक महीने में 300 करोड़ का ग्रेनाइट और 100 करोड़ रुपए का मार्बल का कारोबार है। यदि सालाना इनका आकलन किया जाए तो कुल 4500 करोड़ रुपए का कारोबार एशिया की इस मार्बल मंडी से होता है।

हजारों लोगों को मिल रहा रोजगार
मार्बल मंडी में हजारों लोगों को रोजगार मिल रहा है। यहां करीब चार हजार व्यापारी हैं। राजस्थान सहित मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, बिहार व बंगाल के करीब 20 से 30 हजार मजदूर भी काम करते हैं। इसके अलावा मार्बल ग्रेनाइट को लाने व ले जाने के काम में आने वाले वाहनों के ट्रांसपोर्टर, ड्राइवर सहित अन्य लोगों का रोजगार भी इससे जुड़ा है।

प्रदेशभर से आता है मार्बल ग्रेनाइट
किशनगढ़ मंडी में मार्बल ग्रेनाइट के ब्लॉक की आवक प्रदेशभर से होती है। यहां पर उसकी कटिंग की जाती है। मार्बल मुख्यरूप से राजसमंद व सावर से आता है। वहीं बांसवाड़ा से भी मार्बल के ब्लॉक मंगवाए जाते हैं। ग्रेनाइट का ज्यादातर प्रोडक्शन केकड़ी व भिनाय के आसपास, टोंक व भीलवाड़ा के अतिरिक्त जालोर, भीम-राजसमंद, आबू, पालनपुर व सिरोही में होती है।

उद्यमी से जानें ग्रेनाइट की खूबी
मार्बल-ग्रेनाइट उद्यमी सुनील दरड़ा ने बताया कि मार्बल में समानता व कलर भी कम मिलते हैं। इसको फिट करने के बाद घिसाई करनी पड़ती है। जबकि ग्रेनाइट रेडी टू फिट है। यहां पर इसकी कटिंग, पोलिशिंग करके तैयार करते हैं और सीधा फिट किया जा सकता है। इसके कलर व रेंज भी बड़ी है। ऐसे में लोगों का रूझान ग्रेनाइट की तरफ बढ़ा है।

अच्छी क्वालिटी व अच्छी क्वांटिटी में मिलता है ग्रेनाइट
मार्बल एसोसिएशन के अध्यक्ष सुधीर जैन ने बताया कि मार्बल का उत्पादन कम हो गया है। भाव भी बढे़ हैं। इसके साथ ही ग्रेनाइट अजमेर जिले व आसपास के क्षेत्र में अच्छी क्वालिटी व अच्छी क्वांटिटी में मिल रहा है। ऐसे में बीते सालों में किशनगढ़ मंडी में ग्रेनाइट का कारोबार बढ़ा है। रोजाना करीब चार सौ गाड़ियों में माल लादा जाता है। इसमें 70 प्रतिशत माल ग्रेनाइट होता है।

मार्बल मंडी में रखे ग्रेनाइट ब्लॉक्स।
मार्बल मंडी में रखे ग्रेनाइट ब्लॉक्स।
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