​​​​​​​इस राजस्थानी नाश्ते के अंबानी-तेंदुलकर भी मुरीद:कढ़ी-कचौरी खाने वालों की लगती हैं लाइन, 50 करोड़ का सालाना कारोबार

अजमेर5 महीने पहलेलेखक: सुनिल जैन

अजमेर में लोग ब्रेकफास्ट की शुरुआत एक खास जायके से करते हैं। देशभर में चटनी के साथ खाई जाने वाली कचौरी को गर्मा-गर्म कढ़ी के साथ परोसा जाता है। सुनने वालों को ये कॉम्बिनेशन भले ही अजीब लगता है, लेकिन कचौरी के साथ कढ़ी का तड़का ऐसा स्वाद पैदा करता है कि उद्योगपति मुकेश अंबानी से लेकर सचिन तेंदुलकर तक उंगलिया चाटते रह गए थे।

सीजन चाहे जो भी हो, साल भर कढ़ी-कचौरी की दुकानों पर खाने वालों की भीड़ उमड़ती है। अपनी बारी के लिए इंतजार करती भीड़ यहां आम बात है। राजस्थानी जायका की इस कड़ी में आपको लेकर चलते हैं अजमेर के शानदार जायका कढ़ी-कचौरी के सफर पर....

कढ़ी कचौरी का जायका कहां से आया इसके बारे में कोई नहीं जानता। शहर के सबसे पुराने कारोबारी में से एक श्रीमानजी कचौरी वाले के संचालक प्रशांत जोशी कहते हैं कि कढ़ी कचौरी अजमेर की परंपरा बन चुकी है। इसकी शुरुआत करीब 80 साल पहले मानी जाती है। शुरुआत में केवल एक-दो दुकानें हुआ करती थीं, लेकिन आज शहर में करीब 1000 बड़ी-छोटी दुकानों पर करीब 2 लाख कचौरी रोज बिक रही है। कईं बड़ी नामचीन हस्तियां भी इस स्वाद की मुरीद हैं। वहीं इसकी महक विदेशों तक पहुंच गई है।

जब मुकेश अंबानी भी कह उठे- वाह!
प्रशांत जोशी ने बताया कि उदयपुर के होटल उदयविलास में मुकेश अंबानी को उनकी बेटी ईशा की शादी में कढ़ी-कचौरी खिलाई थी। इस दौरान क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर, जया बच्चन, अभिषेक बच्चन सहित कईं लोगों ने इसका स्वाद चखा और तारीफ की। बेंगलुरु में सायरस मिस्त्री के बेटे व अरूण किर्लोस्कर की बेटी की शादी मे लोगों ने कढ़ी-कचौरी खाई। इसी तरह अजमेर की कढ़ी-कचौरी का जायका कई उद्योगपतियों की पार्टी की शान बन चुका है। पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे भी इसका स्वाद चख चुकी हैं।

अजमेर से ले जाते हैं पानी
प्रशांत जोशी ने बताया कि कचौरी तो बहुत जगह बनती है, लेकिन यहां की कढ़ी का जो स्वाद है, वह केवल यहां के पानी से ही मिल सकता है। इसी वजह से जब भी वे अजमेर से बाहर स्टॉल लगाते हैं तो पानी अजमेर से अपने साथ लेकर जाते हैं। ताकि कढ़ी का वही स्वाद बरकरार रख सकें।

एक घंटे में तैयार होती है 100 कचौरी
कारीगर श्योजी गुर्जर ने बताया कि वह बीस सालों से कचौरी बना रहा है। कचौरी का एक पाया 100 का होता है और इसे तैयार करने में करीब एक घंटे का समय लगता है। इसमें 4 किलो मेदा, 4 किलो तेल, आधा किलो दाल, एक किलो मोटा बेसन व बाद में मसाले डाले जाते हैं।

50 करोड़ से ज्यादा का कारोबार
अजमेर में नयाबाजार व वैशाली नगर में श्री मानजी की कचौरी, गोल प्याऊ पर शंकर चाट, केसरगंज में खण्डेलवाल व रामपाल, कडक्का चौक में तेलन बच्ची भाई की कचौरी फेमस है। छोटी बड़ी करीब एक हजार दुकानें-ठेले पर करीब 2 लाख कढ़ी-कचौरी डेली बिकती है। कचौरी 10 रुपए से लेकर 22 रुपए तक मिलती है। एक अनुमान के मुताबिक शहरभर में इसका सालाना कारोबार 50 करोड़ से भी ज्यादा का है। वहीं करीब पांच हजार मजदूर-कारीगरों को रोजगार मिल रहा है।

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