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सूखे कचरे, प्लास्टिक और कागज से बनेंगे ब्रिक्स:कंक्रीट, पॉलीथिन एवं मिट्टी की होगी छंटनी, 3 लाख 60 हजार टन कचरा साफ करने का लगेगा प्लांट, 8 करोड़ का वर्क ऑर्डर जारी

अजमेर2 महीने पहले
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अजमेर शहर को लिगेसी वेस्ट (पुराना एवं प्रत्यक्त कूड़ा) से निजात मिलेगी। स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत माखुपुरा ट्रेचिंग ग्राउंड पर 3 लाख 60 हजार टन कचरा साफ करने का प्लांट लगाया जा रहा है। इस प्लांट के लिए ट्रोमल मशीन आ गई है और इसके इंस्टॉलेशन की प्रक्रिया आरंभ होगी। इस मशीन के माध्यम से जो लिगेसी वेस्ट से कंक्रीट, पॉलीथिन एवं मिट्टी को अलग किया जाएगा। साथ ही इससे निकलने वाला आरडीएफ (जलने वाला कूड़ा) का ईंधन के रूप में काम में लिया जाएगा।

स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत माखुपुरा ट्रेंचिंग ग्राउंड पर लिगेसी वेस्ट के निस्तारण के लिए 8 करोड 74 लाख रुपए के वर्क ऑर्डर जारी किए जा चुके हैं और माखुपुरा ग्राउंड पर काम भी शुरू हो चुका है। पोकलेन मशीन की मदद से वर्षों से जमीन में दबे कचरे को उथल-पुथल किया जा चुका है। ट्रेंचिंग ग्राउंड पर विन्ड्रो बनाई गई है। जिसमें कचरे को सूखाया जा रहा है और उस पर कल्चर का छिड़काव किया जा रहा है। जिससे कचरे की मात्रा कम हो रही है। ट्रोमल मशीन स्थापित करने के लिए जगह को खाली किया जा चुका है।

दो ट्रोमल मशीन अजमेर पहुंच चुकी हैं। इनको स्थापित करने हेतु जमीन समतल कर पीसीसी किया जा चुका है। मशीनों को चलाने के लिए बिजली कनेक्शन के लिए लाइनें लग चुकी हैं। ट्रांसफार्मर आदि साइट पर पहुंच चुके हैं। अगस्त माह के अंतिम सप्ताह तक कचरे को अलग – अलग करने का कार्य आरंभ हो सकेगा। ट्रोमल मशीन की मदद से कचरे को अलग-अलग किया जाएगा। यहां पर 3 लाख 60 हजार टन कचरा साफ करने की क्षमता का प्लांट लगाया जाएगा।

वर्तमान में अजमेर शहर में लगभग 250 टन कचरा प्रतिदिन उत्पन्न हो रहा है। जो कि माखुपुरा ट्रेंचिंग ग्राउंड में डाला जा रहा है। यह व्यवस्था गत कई वर्षों से जारी है। जिसके चलते वहां 27 एकड़ क्षेत्र में कचरा फैल चुका है। प्लांट के आरंभ होने के बाद शहर को न सिर्फ लिगेसी वेस्ट (पुराना एवं प्रत्यक्त कूड़ा) से निजात मिलेगी वरन अजमेर नगर निगम को बहुमूल्य जमीन भी खाली एवं समतल प्राप्त होगी। जिस पर हरियाली आदि लगाकर शहर के वातावरण को शुद्ध हवा प्राप्त होगी।

ट्रेचिंग ग्राउंड पर रखे उपकरण व अन्य सामान
ट्रेचिंग ग्राउंड पर रखे उपकरण व अन्य सामान

इस प्रकार किया जाएगा कचरे को अलग-अलग

लिगेसी वेस्ट के निस्तारण के लिए ट्रोमल ( मशीन) लगाई जा रही है। इस मशीन के माध्यम से विभिन्न साइज एवं विभिन्न प्रकार के कचरे को अलग-अलग किया जाएगा। कचरे में प्राप्त उपयोगी वस्तु जैसे प्लास्टिक, कागज आदि को उपयोग के अनुसार ठेकेदार द्वारा ही निस्तारित किया जाएगा। शेष रही मिट्‌टी को ट्रेंचिंग ग्राउंड में ही बिछाकर समतल किया जाएगा।

प्लास्टिक का उपयोग ईंधन के रूप में

प्लांट में पुराने कूड़े से प्लास्टिक, पॉलीथिन आदि ज्वलनशील पदार्थ को अलग किया जाएगा। इसके अलावा मिट्टी और कंक्रीट को भी अलग-अलग किया जा सकेगा। लिगेसी वेस्ट से निकलने वाले प्लास्टिक का इस्तेमाल ईंधन के रूप में हो सकेगा। इस ईंधन की डिमांड सीमेंट फैक्ट्रियों में रहती है।

प्रदूषण से मिलेगा छुटकारा

माखुपुरा ट्रेंचिंग ग्राउंड में बार बार कचरे में आग लग जाती है और धुआं से आस-पास का वातावरण दूषित होता है। कचरे का समय पर परिशोधन होने से वातावरण शुद्ध होगा और यहां पर बनने वाले वेक्टिरिया भी समाप्त होगा। बरसात के दिनों में कचरे में पानी जाने के कारण भूमिगत जल दूषित होने की संभावना बनी रहती है। उससे भी पूर्ण रूप से मुक्ति मिलेगी।

परिशोधन संयंत्र से बनेगी खाद

माखुपुरा ट्रेंचिंग ग्राउंड पर 15 करोड़ की लागत से परिशोधन संयंत्र लगाया जा रहा है। इस संयंत्र के माध्यम से प्रतिदिन नए आने वाले 300 टन कचरे का निस्तारण हो सकेगा। प्रोसेंसिंग संयंत्र में सूखा एवं गीला कचरे को अलग-अलग किया जाएगा। गीले कचरे से खाद बनाई जाएगी। जिसका उपयोग जैविक खेती के लिए किया जा सकेगा। वहीं दूसरी ओर सूखे कचरे में से प्लास्टिक, कागज इत्यादि को अलग करके ईंधन की ब्रिक्स बनाई जा सकेगी जो कि बायलर आदि में ईंधन के रूप में उपयोग में लाई जा सकेंगी।

एकत्र किए गए कचरे में 10 प्रतिशत कचरा ऐसा होता है जिसका कोई उपयोग नहीं किया जा सकता। ऐसे कचरे का सेनेटरी लैंडफिल में डाला जाता है। जिसके लिए आगामी 5 वर्षों की गणना करते हुए 75 हजार घन मीटर क्षमता की सेनेटरी लैंडफिल भी बनाया जाना प्रस्तावित है।

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