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  • You Can Donate Your Plasma For 4 Months After Recovering From Corona, Let's Play Civil Religion, Save Someone's Life

‘भास्कर’ सरोकार:कोरोना से ठीक होने के 4 माह तक डोनेट कर सकते हैं अपना प्लाज्मा, आइए नागरिक धर्म निभाएं, किसी की जान बचाएं

अजमेर6 दिन पहले
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जेएलएन में इनकी देखरेख में प्लाज्मा डोनेट , डाॅ. सीमा गुप्ता, डाॅ. अर्पणा राठी और डाॅ. गाैरव सिंह भाटी
  • सुखद : 11,147 ने कोरोना से जीती जंग
  • चिंता : अभी तक मात्र 44 ने प्लाज्मा डोनेट किया

यह खबर उनके लिए है, जो कोरोना को मात देकर स्वस्थ हो चुके हैं, बावजूद इसके उन्होंने अभी तक अपना प्लाज्मा डोनेट नहीं किया है। जेएलएन अस्पताल में 3 सितंबर काे प्लाज्मा ब्लड बैंक खुला, मकसद था कोरोना से जंग जीत चुके लोग अधिक से अधिक संख्या में अपना प्लाज्मा डोनेट करें, ताकि कोरोना से जंग लड़ रहे मरीजों का जीवन बचाया जा सके।
चिकित्सा विभाग के आंकड़ों के अनुसार प्लाज्मा ब्लड बैंक
खुलने के 46 दिन बाद भी केवल 44 लोगों ने ही अपना प्लाज्मा डोनेट किया है, जबकि जिले में 11,147 की कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव से निगेटिव हो चुकी है।

24 घंटे के अंदर मरीज की रिकवरी रेट दोगुनी हो जाती है

ब्लड में तीन कंपोनेंट्स होते हैं। रेड ब्लड सेल्स (लाल रक्त कोशिका), प्लेटलेट्स और प्लाज्मा। पूरे शरीर के ब्लड का 55 फीसदी प्लाज्मा होता है। ब्लड में जो ऊपरी पीला तरल पदार्थ होता है, वो प्लाज्मा होता है. ये हर इंसान के अंदर पाया जाता है।

जब मरीज कोरोना से ठीक हो जाता है उसमें एंटीबॉडी बनते हैं, यही एंटीबॉडी दूसरे कोरोना संक्रमित के काम आते हैं, जो वायरस से लड़ते हैं। जब कोरोना संक्रमित रहे शख्स से ब्लड लिया जाता है तो मशीन से फिल्टर कर ब्लड से प्लाज्मा, रेड ब्लड सेल्स और प्लेटलेट्स को अलग कर लिया जाता है।

रेड ब्लड सेल्स और प्लेटलेट्स उसी व्यक्ति के शरीर में वापस डाल दिया जाता है, जिसने प्लाज्मा दान किया और प्लाज्मा स्टोर कर लिया जाता है। संक्रमित मरीज को स्वस्थ हो चुके व्यक्ति का प्लाज्मा चढ़ाया जाता है तो 24 घंटे के अंदर मरीज की रिकवरी रेट दोगुनी हो जाती है।

काउंसलिंग में बता रहे, नहीं हाेता है संक्रमण

प्लाजमा डाेनेट करने को लेकर कई लाेगाें में भ्रांतियां हैं कि शरीर से रक्त निकल जाएगा, शरीर में कमजाेरी आ जाएगी, लेकिन ऐसा कुछ नहीं होता है। एक टीम लाेगाें की काउंसलिंग कर रही है जाे शंकाओं का समाधान कर रही है। कई लाेगाें काे आशंका है कि अस्पताल आएंगे ताे किसी के संपर्क में आने से काेविड फिर हाे सकता है। इस कारण अस्पताल प्रशासन ने शास्त्री नगर वाली सड़क से स्टाेर के सामने वाले रास्ते काे खुलवाया है, जहां से सीधे सीढ़ियाें के जरिए ब्लड बैंक में आया जा सकता है।

प्लाज्मा डोनेट करने से पहले व्यक्ति की 24 जांचें होती हैं

  • प्लाजमा डाेनेट करने के लिए कम से कम 18 साल उम्र होनी चाहिए।
  • हीमाेग्लाेबिन, प्राेटीन की जांच की जाती है।
  • व्यक्ति का एंटी बाॅडी कार्ड टेस्ट किया जाता है। कार्ड में लाल रंग की लाइन आने पर माना जाता है कि एंटी बाॅडी सेल डेवलप हाे गए हैं। लाइन आए बिना प्लाजमा नहीं लिया जाता। इस कारण काेई भी व्यक्ति जांच करवा सकता है।
  • प्लाज्मा से पहले व्यक्ति की हिस्ट्री जांची जाती है। जैसे, कोरोना पाॅजिटिव हाेने की तिथि, दूसरी बार कब जांच हुई और निगेटिव आई। घर में किसी काे काेराेना हुआ या नहीं। डायबिटीज, ब्लड प्रेशर, टीबी, कैंसर, एलर्जी या दूसरी बीमारी ताे नहीं है।

ये कर सकते हैं प्लाज्मा डोनेट

  • कोरोना संक्रमण हाेने के 28 दिन बाद काेई भी प्लाजमा डाेनेट कर सकता है।
  • निगेटिव रिपाेर्ट आने के हर 15 दिन में एक व्यक्ति प्लाज्मा डाेनेट कर सकता है।
  • पाॅजिटिव हाेने की तिथि से 4 माह तक प्लाज्मा दे सकते हैं।
  • शरीर में चार माह तक एंटी बाॅडी सेल एक्टिव रहते हैं।

महिलाओं के लिए गाइडलाइन नहीं
जेएलएन में अभी केवल पुरुषाें का ही प्लाज्मा डाेनेट हो रहा है। महिलाओं के लिए गाइडलाइन मांगी गई है।

1 डोनर से आमतौर पर 400-500 एमएल प्लाज्मा लेते हैं
विशेषज्ञाें ने बताया कि प्लाज्मा निकालने के लिए टू-वे मल्टीपल 3 अटैच वाली पतली ट्यूब काम में ली जाती है। इसमें एक टयूब से रेड सेल नीचे आता है। प्लाज्मा ऊपर बनी थैली में ही रुक जाता है। नीचे की ओर रेड सेल यानी ब्लड आकर वापस दूसरी टयूब से हाेता हुआ व्यक्ति के शरीर में चला जाता है, यानी ब्लड ताे शरीर से बाहर आया ही नहीं, केवल पानी के रूप में प्लाज्मा लिया गया है। एक डाेनर काे 50 से 60 मिनट का समय लगता है। एक डोनर से आमतौर पर 400-500 एमएल प्लाज्मा लिया जाता है।

  • हम काउंसलिंग और अपील कर रहे हैं कि कोरोना से जंग जीत चुके लोग अपना प्लाज्मा देने आएं। आपके इस पहल से किसी कोरोना संक्रमित मरीज की जान बच सकती है। प्लाज्मा डोनेट करने से शरीर में किसी भी तरह की कोई कमजोरी नहीं आती है। - डाॅ. अनिल जैन, अधीक्षक, जेएलएन अस्पताल
  • जिस प्रकार ब्लड डोनेशन करने से शरीर पर कोई फर्क नहीं पड़ता है, उसी प्रकार प्लाज्मा डोनेट करने से भी शरीर में कोई कमजोरी या बीमारी होने का कोई डर नहीं रहता है। इस महामारी के दौर में किसी का प्लाज्मा किसी संक्रमित को नया जीवन दे सकता है। कोरोना से ठीक हो चुके लोग आगे आएं, लोगों का जीवन बचाएं। - डॉ अनिल सामरिया, सीनियर आचार्य, मेडिसिन विभाग जेएलएन अस्पताल, अजमेर

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